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बालाघाट में फर्जी D.Ed डिग्री से नौकरी का दावा, शिक्षक ने खुद कबूला- नियुक्ति के लिए दी थी डेढ़ लाख की रिश्वत

बालाघाट के बिरसा विकासखंड में एक संविदा शिक्षक ने फर्जी D.Ed डिग्री के आधार पर नौकरी पाने का दावा किया है। शिक्षक ने नियुक्ति और संविलियन के लिए करीब डेढ़ लाख रुपये देने का आरोप लगाया है। मामले की जांच की मांग उठी है।
बालाघाट में फर्जी D.Ed डिग्री से नौकरी का दावा, शिक्षक ने खुद कबूला- नियुक्ति के लिए दी थी डेढ़ लाख की रिश्वत
बालाघाट में फर्जी D.Ed डिग्री से नौकरी का दावा

बालाघाट। बिरसा विकासखंड में फर्जी D.Ed डिग्री के आधार पर शिक्षक भर्ती का मामला अब नए मोड़ पर पहुंच गया है। प्राथमिक शाला करियाटोला में पदस्थ संविदा शिक्षक महादेव मरकाम ने खुद सामने आकर दावा किया है कि वर्ष 2007 में नियुक्ति के समय उनके पास D.Ed की डिग्री नहीं थी। उन्होंने आरोप लगाया कि नौकरी पाने के लिए फर्जी डिग्री तैयार कराई गई और इसमें विभाग व जनपद पंचायत से जुड़े कुछ कर्मचारियों ने मदद की। मरकाम का दावा है कि नियुक्ति से लेकर संविलियन तक अलग-अलग चरणों में उन्होंने करीब डेढ़ लाख रुपये दिए।

नियुक्ति के लिए फर्जी डिग्री बनवाने का दावा

महादेव मरकाम के मुताबिक नौकरी हासिल करने के लिए सबसे पहले फर्जी D.Ed डिग्री तैयार कराई गई, जिसके लिए 50 हजार रुपये दिए गए। इसके बाद संविलियन कराने के नाम पर 30 हजार रुपये और लिए गए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि नौकरी बचाए रखने और मामला दबाने के लिए अलग-अलग समय पर अतिरिक्त रकम भी देनी पड़ी। मरकाम ने प्राथमिक शिक्षा देवरबेली, आश्रम अधीक्षक भीकम चौधरी, मलाजखंड CM Rise स्कूल के प्राचार्य गंगाप्रसाद कटरे समेत कुछ अन्य कर्मचारियों की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

2011 में ही सामने आ गई थी डिग्री की सच्चाई

महादेव मरकाम का दावा है कि वर्ष 2011 में ही उनकी डिग्री के गलत होने की जानकारी विभागीय स्तर पर पहुंच गई थी। इसके बावजूद उनके खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई और वे लगातार नौकरी करते रहे।

9 से 10 अन्य नियुक्तियों पर भी उठाए सवाल

मरकाम ने दावा किया कि वर्ष 2007 की संविदा शिक्षक भर्ती में उनके अलावा 9 से 10 अन्य अभ्यर्थियों ने भी कथित तौर पर फर्जी D.Ed डिग्री के आधार पर नौकरी हासिल की थी। उनके अनुसार इनमें से कुछ शिक्षक आज भी अलग-अलग स्कूलों में पदस्थ हैं, जबकि कुछ का संविलियन भी हो चुका है। उन्होंने पूरे भर्ती प्रकरण की जांच कर सभी संबंधित शिक्षकों के दस्तावेजों का सत्यापन कराने की मांग की है।

2011 की शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं होने पर सवाल

मामले के शिकायतकर्ता चित्रसेन राहांगडाले ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2011 में ही इस मामले की शिकायत कर कार्रवाई की मांग की थी। उनका कहना है कि शिकायत के बावजूद इतने वर्षों तक विभाग ने कोई कार्रवाई क्यों नहीं की, इसकी भी जांच होनी चाहिए। उन्होंने डिग्री तैयार कराने, नियुक्ति प्रक्रिया और संविलियन तक पूरे मामले की न्यायिक जांच कराने की मांग उठाई है।

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जनपद पंचायत CEO बोले- जांच के बाद होगी कड़ी कार्रवाई

जनपद पंचायत बिरसा के CEO नितिन भट्ट ने कहा कि फिलहाल मामला उनके संज्ञान में नहीं था। उन्होंने बताया कि पूरे प्रकरण की जानकारी लेकर जांच कराई जाएगी। उनके मुताबिक जांच में जो भी व्यक्ति संलिप्त पाया जाएगा, उसके खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

Sanjay Tiwari
By Sanjay Tiwari

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