National Handloom Day 2026: कांजीवरम से बनारसी तक! जानिए किस राज्य की कौन-सी हैंडलूम साड़ी, सबसे ज्यादा है मशहूर

नई दिल्ली। हर साल 7 अगस्त को राष्ट्रीय हैंडलूम दिवस मनाया जाता है। यह दिन देश के लाखों बुनकरों और उनकी पारंपरिक कला को सम्मान देने के लिए मनाया जाता है। भारत की पहचान सिर्फ उसकी संस्कृति और इतिहास से नहीं बल्कि यहां के हस्तनिर्मित कपड़ों और हैंडलूम से भी है। अलग अलग राज्यों की अपनी खास बुनाई और डिजाइन है, जो उन्हें बाकी जगहों से अलग बनाती है। इस मौके पर अगर आप भारत की प्रसिद्ध हैंडलूम साड़ियों के बारे में जानना चाहते हैं, तो आइए जानते हैं कि किस राज्य की कौन-सी साड़ी सबसे ज्यादा पसंद की जाती है।
बनारसी और पटोला की अलग पहचान
उत्तर प्रदेश की बनारसी साड़ी दुनिया भर में अपनी शानदार जरी और सिल्क के लिए मशहूर है। इसे तैयार करने में बुनकरों को कई दिन और कभी-कभी महीनों का समय लगता है। वहीं गुजरात की पटोला साड़ी अपनी खास डबल इकत बुनाई के लिए जानी जाती है। इसकी डिजाइन दोनों तरफ एक जैसी दिखाई देती है, जो इसे बेहद खास बनाती है।
दक्षिण भारत की सिल्क साड़ियों का जलवा
तमिलनाडु की कांजीवरम साड़ी भारतीय शादी-ब्याह की सबसे पसंदीदा साड़ियों में गिनी जाती है। शुद्ध रेशम से बनी यह साड़ी अपने चौड़े बॉर्डर और पारंपरिक डिजाइन के लिए प्रसिद्ध है। केरल की कसावु साड़ी सफेद रंग और सुनहरे बॉर्डर की वजह से अलग पहचान रखती है। तेलंगाना की पोचमपल्ली और आंध्र प्रदेश की उप्पडा जामदानी भी अपनी बारीक बुनाई के लिए जानी जाती हैं।
मध्य और पूर्वी भारत की खास बुनाई
मध्य प्रदेश की चंदेरी साड़ी अपनी हल्की बनावट और खूबसूरत चमक के कारण काफी पसंद की जाती है। वहीं छत्तीसगढ़ की कोसा सिल्क साड़ी प्राकृतिक रेशम से तैयार होती है। बिहार की भागलपुरी टसर सिल्क और झारखंड की टसर बुनाई भी देशभर में अपनी खास पहचान बना चुकी है।
राजस्थान और पश्चिम बंगाल की पारंपरिक साड़ियां
राजस्थान की बांधनी, लहरिया और टाई-डाई साड़ियां अपने रंग-बिरंगे डिजाइन के लिए मशहूर हैं। पश्चिम बंगाल की बालूचरी, जामदानी और कॉटन साड़ियां पारंपरिक कला का सुंदर उदाहरण मानी जाती हैं। इन साड़ियों पर हाथ से की गई बारीक बुनाई लोगों को खूब पसंद आती है।
पहाड़ी और पूर्वोत्तर राज्यों की भी अलग पहचान
हिमाचल प्रदेश की कुल्लू पट्टी और उत्तराखंड की पंचाचूली हैंडलूम साड़ियां स्थानीय बुनाई की बेहतरीन मिसाल हैं। असम की मुगा सिल्क साड़ी अपनी प्राकृतिक चमक के लिए प्रसिद्ध है। वहीं मेघालय की एरी सिल्क और सिक्किम की पारंपरिक बुनाई भी भारतीय हैंडलूम की समृद्ध विरासत को दर्शाती है।
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हैंडलूम खरीदना क्यों है खास
हैंडलूम की हर साड़ी किसी मशीन से नहीं बल्कि कारीगरों के हाथों से तैयार होती है। इसे बनाने में समय, मेहनत और हुनर लगता है। जब लोग हैंडलूम उत्पाद खरीदते हैं तो इससे लाखों बुनकर परिवारों को रोजगार मिलता है और भारत की पुरानी कला भी सुरक्षित रहती है। यही कारण है कि राष्ट्रीय हैंडलूम दिवस केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि देश की विरासत को आगे बढ़ाने का अवसर भी है।











