Type 1 और Type 2 Diabetes में क्या है फर्क? जानिए कारण, लक्षण और बचाव!

डायबिटीज आज दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली बीमारियों में शामिल है। आमतौर पर लोग टाइप 1 और टाइप 2 डायबिटीज को एक ही बीमारी मान लेते हैं, जबकि दोनों की वजह, लक्षण और इलाज अलग होते हैं। टाइप 1 डायबिटीज में शरीर इंसुलिन बनाना बंद कर देता है, जबकि टाइप 2 में शरीर इंसुलिन का सही इस्तेमाल नहीं कर पाता। सही जानकारी और समय पर इलाज से दोनों प्रकार की डायबिटीज को बेहतर तरीके से नियंत्रित किया जा सकता है। इसलिए इनके बीच का अंतर समझना हर व्यक्ति के लिए जरूरी है।
डायबिटीज में क्या अंतर है?
डायबिटीज ऐसी बीमारी है जिसमें शरीर में ब्लड शुगर का स्तर सामान्य से अधिक हो जाता है। इसकी सबसे बड़ी वजह इंसुलिन हार्मोन का सही तरीके से काम न करना है। हालांकि टाइप 1 और टाइप 2 डायबिटीज का असर एक जैसा दिख सकता है, लेकिन दोनों के कारण और इलाज अलग-अलग होते हैं। टाइप 1 डायबिटीज में शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली गलती से अग्न्याशय की उन कोशिकाओं पर हमला कर देती है जो इंसुलिन बनाती हैं। इसके कारण शरीर में इंसुलिन बनना लगभग बंद हो जाता है। वहीं टाइप 2 डायबिटीज में शरीर या तो पर्याप्त इंसुलिन नहीं बना पाता या फिर बना हुआ इंसुलिन ठीक से काम नहीं करता।
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दोनों बीमारियों के कारण अलग हैं
टाइप 1 डायबिटीज एक ऑटोइम्यून बीमारी मानी जाती है। इसके पीछे मुख्य कारण अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है, लेकिन आनुवंशिक कारण इसकी संभावना बढ़ा सकते हैं। दूसरी ओर टाइप 2 डायबिटीज में उम्र बढ़ना, मोटापा, शारीरिक गतिविधि की कमी, असंतुलित खानपान और पारिवारिक इतिहास जैसे कई कारण जोखिम बढ़ाते हैं। यह दुनिया में सबसे ज्यादा पाए जाने वाला डायबिटीज का प्रकार है।
लक्षण कैसे अलग दिखाई देते हैं?
टाइप 1 डायबिटीज के लक्षण अक्सर अचानक और तेजी से सामने आते हैं। वहीं टाइप 2 डायबिटीज धीरे-धीरे विकसित होती है, इसलिए कई लोगों को लंबे समय तक इसका पता ही नहीं चलता। दोनों में बार-बार पेशाब आना, ज्यादा प्यास लगना, थकान, धुंधला दिखाई देना, बिना वजह वजन घटना, ज्यादा भूख लगना और घाव देर से भरना जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। अगर ऐसे लक्षण लगातार बने रहें तो डॉक्टर से जांच करानी चाहिए।
इलाज और नियंत्रण का तरीका
टाइप 1 डायबिटीज में इंसुलिन लेना जरूरी होता है क्योंकि शरीर खुद इंसुलिन नहीं बना पाता। इसके साथ संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और समय समय पर ब्लड शुगर की जांच भी जरूरी होती है। टाइप 2 डायबिटीज में शुरुआती अवस्था में कई मरीज स्वस्थ खानपान, नियमित व्यायाम और वजन नियंत्रित रखकर ब्लड शुगर को संभाल सकते हैं। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर दवाइयां या इंसुलिन भी दे सकते हैं।
क्या डायबिटीज से बचाव संभव है?
टाइप 1 डायबिटीज को फिलहाल रोका नहीं जा सकता। इस पर लगातार शोध चल रहा है। वहीं टाइप 2 डायबिटीज का खतरा स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर काफी हद तक कम किया जा सकता है। नियमित व्यायाम, संतुलित भोजन, वजन नियंत्रित रखना और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच कराना इसके जोखिम को कम करने में मदद करता है।
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भावनात्मक स्वास्थ्य का भी रखें ध्यान
डायबिटीज केवल शारीरिक ही नहीं मानसिक रूप से भी प्रभावित कर सकती है। लंबे समय तक दवा, खानपान और जीवनशैली का ध्यान रखना कई लोगों के लिए चुनौती बन जाता है। ऐसे में परिवार का सहयोग, सही जानकारी और डॉक्टर की सलाह मरीज का आत्मविश्वास बढ़ाने में मदद करती है। समय पर इलाज और सकारात्मक सोच के साथ डायबिटीज के बावजूद सामान्य जीवन जिया जा सकता है।











