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मुंबई। गुजरात के जामनगर स्थित वंतारा परियोजना में रखी गई 36 वर्षीय हथिनी महादेवी को वापस कोल्हापुर के नंदनी मठ लाने की कोशिशें तेज हो गई हैं। बुधवार को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने वंतारा प्रबंधन के वरिष्ठ अधिकारियों से मुंबई में मुलाकात की और इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की। मुख्यमंत्री ने बताया कि वंतारा ने इस मामले में महाराष्ट्र सरकार के साथ मिलकर सुप्रीम कोर्ट में दायर की जाने वाली याचिका में सहभागी होने पर सहमति दे दी है।
विवाद तब शुरू हुआ जब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत महादेवी हथिनी को कोल्हापुर के नंदनी मठ से जामनगर स्थित राधे कृष्ण मंदिर हाथी कल्याण ट्रस्ट में भेजा गया, जिसका प्रबंधन वंतारा करता है। यह निर्णय जैन समाज और स्थानीय लोगों की भावनाओं के खिलाफ जाता नजर आया, जिसके चलते पूरे महाराष्ट्र में विरोध की लहर उठी।
मुख्यमंत्री से चर्चा के दौरान वंतारा के अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन भर किया है और हथिनी महादेवी को अपने कब्जे में लेने का उनका कोई इरादा नहीं था।
वंतारा एक पशु बचाव और पुनर्वास केंद्र है जिसे रिलायंस फाउंडेशन संचालित करता है। उन्होंने मुख्यमंत्री से कहा कि वे कानूनी प्रक्रिया में महाराष्ट्र सरकार को पूरा सहयोग देने के लिए तैयार हैं।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मंगलवार को ही यह स्पष्ट किया था कि राज्य सरकार महादेवी हथिनी को वापस लाने के लिए हर संभव कानूनी प्रयास करेगी। सुप्रीम कोर्ट में पहले जैन तीर्थस्थल की ओर से समीक्षा याचिका दायर की जाएगी और राज्य सरकार उसमें हस्तक्षेप याचिका दाखिल कर समर्थन देगी।
फडणवीस ने यह भी बताया कि राज्य वन विभाग कोल्हापुर के नंदनी मठ के समीप वंतारा जैसी सुविधाओं वाला एक हाथी पुनर्वास केंद्र स्थापित करने की योजना बना रहा है। इस प्रस्ताव को वंतारा ने भी समर्थन दिया है और कहा है कि अगर ऐसी कोई योजना लागू होती है तो वे राज्य सरकार को हरसंभव सहायता देंगे।
विवाद और जनभावनाओं को देखते हुए वंतारा ने एक आधिकारिक प्रेस रिलीज जारी की, जिसमें उन्होंने कहा कि वे सिर्फ सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का पालन कर रहे थे और अगर उनके किसी कार्य से जैन समुदाय या कोल्हापुर के लोगों की भावनाएं आहत हुई हों, तो वे उसके लिए दिल से खेद व्यक्त करते हैं।
प्रेस नोट में लिखा- ,
"यदि हमारे किसी विचार, वचन या कर्म से जानबूझकर या अनजाने में किसी को ठेस पहुंची हो, तो हम आपसे क्षमा चाहते हैं। हम सभी धार्मिक भावनाओं का आदर करते हैं।"
गौरतलब है कि महादेवी उर्फ माधुरी पिछले 30 वर्षों से अधिक समय से कोल्हापुर के नंदनी मठ में रह रही थी और जैन समुदाय के बीच एक श्रद्धा का केंद्र बन चुकी थी। उसे गठिया जैसी स्वास्थ्य समस्याएं भी हैं, जिस कारण जामनगर भेजे जाने पर विरोध की लहर उठी। लोगों ने सड़कों पर प्रदर्शन किए और सोशल मीडिया पर भी सरकार से कार्रवाई की मांग की। अब महाराष्ट्र सरकार, नंदनी मठ और वंतारा मिलकर सुप्रीम कोर्ट में हथिनी की वापसी के लिए एकजुट होने जा रहे हैं।