Naresh Bhagoria
3 Feb 2026
अयोध्या के तपस्वी छावनी पीठाधीश्वर जगतगुरु परमहंस आचार्य ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समर्थन में खुलकर सामने आते हुए साफ चेतावनी दी है कि यदि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपनी अभद्र टिप्पणियों के लिए माफी नहीं मांगते, तो उन्हें अयोध्या में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा। परमहंस आचार्य ने इसे संत परंपरा के खिलाफ बताया और कहा कि ऐसी भाषा किसी भी संत को शोभा नहीं देती।
यह पूरा विवाद मौनी अमावस्या के दिन प्रयागराज के संगम क्षेत्र से शुरू हुआ। उस दिन स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को रथ के साथ त्रिवेणी संगम घाट जाने से रोक दिया गया था। पुलिस और मेला प्रशासन द्वारा उन्हें स्नान से रोके जाने के बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने इस कार्रवाई को पुलिस की बर्बरता बताते हुए विरोध जताया और मेला प्रशासन के खिलाफ धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया।
इसी क्रम में उन्होंने CM योगी पर भी तंज कसे, जिससे विवाद और बढ़ गया। बयान सामने आने के बाद संत समाज और राजनीतिक हलकों में हलचल मच गई। अब इसी मुद्दे पर जगतगुरु परमहंस आचार्य भी खुलकर मैदान में उतर आए हैं।
परमहंस आचार्य ने CM योगी आदित्यनाथ पर की गई टिप्पणियों पर गहरी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि CM योगी उत्तर प्रदेश के विकास और सनातन धर्म के संरक्षण के लिए निरंतर काम कर रहे हैं। ऐसे व्यक्ति के खिलाफ अपमानजनक भाषा का प्रयोग न केवल अनुचित है, बल्कि यह संत मर्यादा के भी खिलाफ है। अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा था कि आपको हम 40 दिनों का समय दे रहे हैं। इन 40 दिनों में आप यह प्रमाण दीजिए कि आप वास्तव में गो-भक्त हैं।
उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को अपने शब्द वापस लेने चाहिए और मुख्यमंत्री योगी से सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए। जब तक ऐसा नहीं होता, तब तक अयोध्या जैसी पवित्र नगरी में उनका प्रवेश स्वीकार नहीं किया जाएगा।
राजनीति से प्रेरित होने का आरोप- परमहंस आचार्य ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के गोरक्षा आंदोलन पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन केवल गाय तक सीमित है, जबकि गोवंश में बैल, बछड़ा और नंदी भी शामिल हैं। अगर सिर्फ गाय की रक्षा की बात होगी, तो संपूर्ण गोवंश का संरक्षण संभव नहीं है।
उनका कहना था कि गोरक्षा का मुद्दा बेहद संवेदनशील है और इसे राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल करना ठीक नहीं। परमहंस आचार्य ने आरोप लगाया कि यह आंदोलन विपक्ष के इशारे पर सरकार को कमजोर करने के उद्देश्य से चलाया जा रहा है, जो सनातन धर्म के हित में बिल्कुल भी नहीं है।
परमहंस आचार्य ने केंद्र सरकार और सभी राज्य सरकारों से अपील की कि गोवंश को राष्ट्रीय धरोहर और राज्य धरोहर घोषित किया जाए। उन्होंने कहा कि केवल गाय को ‘राष्ट्र माता’ का दर्जा देने से समस्या का समाधान नहीं होगा। जब तक पूरे गोवंश को कानूनी संरक्षण नहीं मिलेगा, तब तक गौहत्या पर पूरी तरह रोक नहीं लग सकती।
अंत में परमहंस आचार्य ने संत समाज से संयम और मर्यादा बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि संतों का कार्य समाज को दिशा देना है, न कि विवाद और राजनीति को बढ़ावा देना। अभद्र भाषा और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से न तो सनातन धर्म मजबूत होगा और न ही समाज में सकारात्मक संदेश जाएगा।