Modi शासन में नक्सलवाद का किला ढहाया :सरकार ने संसद में दी जानकारी, आत्मसमर्पित नक्सलियों को अब ये मिल रही सुविधाएं

नई दिल्ली। सरकार ने मंगलवार को लोकसभा में बताया कि देश में इस समय केवल आठ जिले ही उग्र वामपंथ यानी कि नक्सलवाद की समस्या से प्रभावित हैं। इनमें से केवल तीन जिले ऐसे हैं, जहां यह समस्या सबसे अधिक गंभीर बनी हुई है। सरकार के मुताबिक, वर्ष 2016 में देश के 126 जिले उग्र वामपंथ से प्रभावित थे, लेकिन केंद्र और राज्य सरकारों के संयुक्त प्रयासों के चलते अब यह संख्या घटकर आठ रह गई है।
सुरक्षाबलों की कार्रवाई से नक्सलवाद नियंत्रण में- सरकार
लोकसभा में एक तारांकित सवाल के जवाब में सरकार ने बताया कि वर्ष 2010 में वामपंथी उग्रवाद से जुड़ी 1,936 घटनाएं दर्ज की गई थीं, जबकि वर्ष 2025 में ऐसी घटनाओं की संख्या घटकर केवल 234 रह गई है। सरकार ने कहा कि सुरक्षा बलों की कार्रवाई, विकास योजनाओं और प्रशासनिक उपायों के कारण उग्र वामपंथ पर प्रभावी नियंत्रण संभव हो पाया है।
भाजपा सांसदों ने मांगी नक्सलियों की कई जानकारी?
बीजेपी सांसद रमेश अवस्थी और कमलजीत सहरावत ने सरकार से सवाल पूछा था कि 31 मार्च 2026 तक भारत को नक्सल मुक्त बनाने की दिशा में अब तक क्या प्रगति हुई है। इसके साथ ही उन्होंने नक्सलियों की गिरफ्तारी, आत्मसमर्पण और पुनर्वास से जुड़ी जानकारी भी मांगी थी। जहां इन सवालों का लिखित जवाब गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने लोकसभा में दिया। उन्होंने बताया कि वामपंथी उग्रवाद से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने वर्ष 2015 में ‘एलडब्लूई से निपटने के लिए राष्ट्रीय नीति एवं कार्य योजना’ लागू की थी।
3681 करोड़ से ज्यादा की मदद की गई
सरकार के मुताबिक, सुरक्षा संबंधी व्यय (एसआरई) योजना के तहत उग्र वामपंथ से प्रभावित राज्यों को अब तक 3,681 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता दी गई है। इस राशि का उपयोग सुरक्षा बलों की तैनाती, आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के पुनर्वास और वामपंथी उग्रवाद में मारे गए नागरिकों तथा शहीद सुरक्षाकर्मियों के परिवारों की मदद के लिए किया गया है।
आत्मसमर्पित वामपंथी उग्रवादी को मिलती है इतने रुपए
गृह राज्य मंत्री ने सदन को बताया कि एसआरई योजना के तहत आत्मसमर्पण सह पुनर्वास नीति भी लागू की गई है, जिसके अंतर्गत केंद्र सरकार राज्यों को आर्थिक सहायता देती है। इस नीति के तहत आत्मसमर्पण करने वाले उच्च रैंक के वामपंथी उग्रवादी कैडरों को तुरंत 5 लाख रुपये का अनुदान दिया जाता है, जबकि अन्य कैडरों को 2.5 लाख रुपये की सहायता राशि मिलती है।
इसके अलावा, हथियार और गोला-बारूद के साथ आत्मसमर्पण करने पर अलग से प्रोत्साहन राशि दी जाती है। वहीं, आत्मसमर्पण करने वाले उग्र वामपंथियों को पुनर्वास के लिए तीन साल तक हर महीने 10 हजार रुपये का वजीफा भी दिया जाता है।











