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पल्लवी वाघेला,भोपाल। राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण प्रदेश भर में सामुदायिक मध्यस्थता पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। दरअसल, भोपाल में संचालित मध्यस्थता केंद्र के अच्छे नतीजों के बाद पूरे भोपाल जिले में सामुदायिक स्तर पर योजना को शुरू करने की तैयारी है। इसके लिए भोपाल जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा विशेष रूप से डिजाइन मध्यस्थता ट्रेनिंग प्रोग्राम भी आयोजित किया गया है। इस 20 घंटे के स्पेशल प्रोग्राम में विभिन्न समाज का प्रतिनिधित्व कर रहे 35 लोगों को मास्टर ट्रेनर्स ने मध्यस्थता के गुर सिखाए, ताकि लोग थाने-कोर्ट के चक्कर काटने से बचें और कोर्ट पर पड़ने वाला अतिरिक्त भार भी कम हो सके। 8 माह में 50 से ज्यादा मामले जिला मध्यस्थता केंद्र से निपटे हैं। इसी तरह इंदौर में भी इसकी ट्रेनिंग हो चुकी है, बाकी जिलों में इसकी शुरुआत होगी।
कोर्ट तक पहुंचने वाले छोटे-छोटे विवाद अब सामुदायिक मध्यस्थता केंद्र में जाएंगे और ट्रेंड मध्यस्थ दोनों पक्षों में सुलह करवाएंगे। इसके लिए हुई ट्रेनिंग में मुस्लिम, कुशवाह, ब्राह्मण, क्रिश्चियन, अग्रवाल, पंजाबी आदि समाज के लोग शामिल थे। ट्रेनिंग का हिस्सा रहीं उपासना बेहार ने बताया कि मीडिएशन भी एक कला है और ट्रेनिंग के दौरान सेवानिवृत्त जजेज ने लाइव एग्जांपल की मदद से यह सिखाया। इसके लिए हर ट्रेनर को केस दिए गए। ट्रेनिंग में बताया गया कि कोर्ट में जिरह होती है, लेकिन मीडिएशन का मुख्य भाव दोनों पक्षों को संतुष्ट करना है। हालांकि, ट्रेनिंग के बाद शुरू किए जाने वाले मध्यस्थता केंद्र का भाव सर्वधर्म आधारित होगा। यानी किसी भी सेंटर पर किसी भी धर्म या जाति का व्यक्ति जाकर मदद ले सकता है।
ब्राह्मण समाज के प्रतिनिधि योगाचार्य डॉ. पवन गुरु ने बताया कि जैसे समाज में विघटन चल रहा है और छोटे-छोटे विवाद में पूरा परिवार सफर करता है। ऐसे में यह कोर्ट की बहुत अच्छी पहल है। इन केन्द्र में ट्रेनिंग लेने वाले सभी लोग नि:शुल्क सेवा देने को तैयार हैं और मध्यस्थता के लिए आने वालों का भी पैसा खर्च नहीं होगा। डालसा के सचिव सुनीत अग्रवाल ने कहा कि प्रयास है कि समुदाय के लोगों के मध्य उत्पन्न होने वाले मुकदमा पूर्व विवाद जैसे- पारिवारिक, सिविल विवाद, समझौता योग्य आपराधिक विवाद, चैक अनादरण संबंधी विवाद, भू-राजस्व संहिता के अंतर्गत उत्पन्न विवाद इत्यादि का मध्यस्थता के माध्यम से निराकरण करवा सकेंगे।
सामाजिक कार्यकर्ता एवं ट्रेनी शिवराज कुशवाहा ने कहा कि सामाजिक पंचायतों के प्रतिनिधियों को मीडिएटर के रूप में तैयार कर मध्यस्थता में मदद ली जाए। यदि कोई यहां संतुष्ट नहीं है तो कोर्ट का अंतिम उपाय हमेशा उनके पास है।