हादसे के समय कोहरा इतना घना था कि कुछ मीटर आगे तक भी दिखाई नहीं दे रहा था। विजिबिलिटी 50 मीटर से भी कम बताई जा रही है। इसी बीच एक वाहन के अचानक ब्रेक लगाने से पीछे चल रहे वाहन संभल नहीं पाए और एक के बाद एक टकराते चले गए। देखते ही देखते एक्सप्रेसवे पर अफरा-तफरी मच गई और यातायात पूरी तरह ठप हो गया। हादसे के बाद कुछ बसों में आग लग गई। आग इतनी तेजी से फैली कि कई यात्रियों को बाहर निकलने का मौका तक नहीं मिला। प्रशासन ने 13 लोगों की मौत की पुष्टि की है। बताया जा रहा है कि ये मौतें जलने की वजह से हुई हैं। जले हुए वाहनों को देखकर हर कोई स्तब्ध रह गया।
एक चश्मदीद ने बताया कि वह बस में सो रहा था, तभी तेज झटका लगा। टक्कर के बाद चारों तरफ चीख-पुकार मच गई। लोग जान बचाने के लिए बसों से बाहर भागने लगे। कुछ यात्रियों ने खिड़कियां तोड़कर खुद को बाहर निकाला। चारों ओर धुआं और आग देखकर लोग दहशत में आ गए।
घटना की सूचना मिलते ही मथुरा और आगरा से पुलिस, फायर ब्रिगेड और एंबुलेंस मौके पर पहुंच गईं। राहत और बचाव कार्य तुरंत शुरू किया गया। फायर ब्रिगेड की टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। पुलिस और स्थानीय लोगों की मदद से फंसे हुए यात्रियों को बाहर निकाला गया। घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जबकि गंभीर रूप से घायल यात्रियों को आगरा और मथुरा के बड़े अस्पतालों में रेफर किया गया है।
प्रशासन के अनुसार, इस हादसे में करीब 25 लोग घायल हुए हैं। सभी का इलाज अस्पताल में चल रहा है। डॉक्टरों की टीम घायलों की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। वहीं, मृतकों की पहचान करने और उनके परिजनों को सूचना देने की प्रक्रिया भी जारी है।
मथुरा के SSP श्लोक कुमार ने बताया कि प्रारंभिक जांच में हादसे की वजह घना कोहरा और कम विजिबिलिटी सामने आई है। लो विजिबिलिटी के चलते वाहन आपस में टकरा गए। पूरे मामले की जांच की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं लापरवाही या तेज रफ्तार भी हादसे की वजह तो नहीं बनी।
दिल्ली-आगरा एक्सप्रेसवे पर हुए इस दर्दनाक हादसे पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि घायलों को हर संभव चिकित्सा सहायता दी जाए। साथ ही मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख रुपए की आर्थिक सहायता देने का ऐलान किया है।