कच्ची रोटी-पतली दाल से भड़की छात्राएं, अधीक्षिका को हटाने की मांग पर किया प्रदर्शन

छिंदवाड़ा। न्यूटन स्थित अनुसूचित जाति कन्या जूनियर छात्रावास की छात्राएं सोमवार सुबह अचानक सड़क पर उतर आईं। छात्राओं का आरोप था कि हॉस्टल में उन्हें ठीक खाना नहीं दिया जा रहा है। कच्ची रोटी और पतली दाल मिलने से नाराज छात्राओं ने छात्रावास के बाहर प्रदर्शन किया और अधीक्षिका माया मांडवार को हटाने की मांग की। स्थानीय भाजपा नेता भी छात्राओं के समर्थन में मौके पर पहुंच गए। मामला बढ़ता देख प्रशासन और पुलिस के अधिकारी भी छात्रावास पहुंचे। खबर लिखे जाने तक छात्राओं और अधिकारियों के बीच गतिरोध बना हुआ था।
सुबह 9 बजे छात्राओं ने शुरू किया प्रदर्शन
बताया गया कि सोमवार सुबह करीब 9 बजे छात्राएं छात्रावास से बाहर निकल आईं। उस समय अधीक्षिका माया मांडवार हॉस्टल में मौजूद नहीं थीं। छात्राओं ने स्थानीय लोगों के साथ रैली निकाली और अधीक्षिका के खिलाफ नारे लगाए। छात्राओं का कहना था कि उनके साथ अच्छा व्यवहार नहीं किया जाता। इसके अलावा खाने की गुणवत्ता को लेकर भी उन्होंने गंभीर शिकायतें कीं। छात्राओं ने बताया कि उन्हें अक्सर कच्ची रोटी और बहुत पतली दाल दी जाती है। उन्होंने साफ कहा कि जब तक अधीक्षिका अपना सामान लेकर हॉस्टल से नहीं जातीं, तब तक वे वापस अंदर नहीं जाएंगी।
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अधिकारी मौके पर पहुंचे
मामले की जानकारी मिलने के बाद जामई के बीईओ ओपी जोशी सबसे पहले मौके पर पहुंचे और छात्राओं से बातचीत की। इसके बाद नायब तहसीलदार राम सूर्यवंशी और टीआई ईश्वरी पटले भी छात्रावास पहुंचे। सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए डायल-112 की टीम भी मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने छात्राओं को समझाने की कोशिश की, लेकिन छात्राएं अपनी मांग पर अड़ी रहीं।
जांच में भोजन की गुणवत्ता मिली खराब
जामई बीईओ ओपी जोशी ने बताया कि छात्राओं की भोजन को लेकर की गई शिकायत जांच में सही पाई गई। खाने की गुणवत्ता ठीक नहीं थी। इसके बाद छात्राओं के लिए खीर और पूरी बनवाकर खिलाई गई। साथ ही हॉस्टल में भोजन की गुणवत्ता सुधारने के निर्देश दिए गए। बीईओ ने बताया कि अधीक्षिका को हटाने की कार्रवाई प्रस्तावित कर उच्च अधिकारियों को भेज दी गई है।
एक हॉस्टल में दो अधीक्षिका का मामला
इस छात्रावास में अधीक्षिका को लेकर पहले से ही विवाद की स्थिति बनी हुई है। जानकारी के मुताबिक, अधीक्षिका माया मांडवार को पहले हटाया गया था। इसके बाद उन्होंने इस आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट का रुख किया और कोर्ट से उन्हें स्थगन आदेश यानी स्टे मिल गया। वहीं, दूसरी अधीक्षिका सीमा मिश्रा भी इसी छात्रावास में पदस्थ हैं। बताया गया है कि उन्हें उनकी मूल शाला कुआं बादला वापस नहीं भेजा गया है। इस तरह फिलहाल हॉस्टल में दो अधीक्षिकाओं की स्थिति बनी हुई है।
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स्थानीय राजनीति का भी रहा है हस्तक्षेप
स्थानीय लोगों के मुताबिक, न्यूटन के इस छात्रावास में अधीक्षिकाओं को लेकर पहले भी शिकायतें सामने आती रही हैं। स्थानीय राजनीति और बाहरी हस्तक्षेप के कारण यहां विवाद की स्थिति बनी रहती है। दूसरी अधीक्षिका सीमा मिश्रा स्थानीय हैं और उनका घर छात्रावास की दीवार से लगा हुआ है। बताया गया है कि आदिम जाति कल्याण विभाग ने उन्हें उनके घर के पास स्थित इसी हॉस्टल में अटैच किया है, जबकि उनकी मूल शाला कुआं बादला है। फिलहाल प्रशासन ने भोजन की गुणवत्ता सुधारने और अधीक्षिका को हटाने की कार्रवाई आगे बढ़ाने की बात कही है। अब देखना होगा कि छात्राओं की मांग पर विभाग क्या अंतिम फैसला लेता है।












