भोपाल में वक्फ बोर्ड की बड़ी कार्रवाई, 20 साल पुराने कब्जे पर FIR; 28.91 करोड़ की रिकवरी

नए वक्फ कानून के लागू होने के बाद मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड ने भोपाल में बड़ी कार्रवाई की है। बोर्ड ने सुल्तानिया रोड स्थित इदारा यतीमखाना शाहजहानी की करीब 2.7 एकड़ वक्फ संपत्ति पर कथित अवैध कब्जे और उससे किराया वसूलने के मामले में FIR दर्ज कराई है। वक्फ बोर्ड का आरोप है कि पिछले करीब 20 वर्षों से इस जमीन पर इज्तिमा बाजार और अस्पताल समेत अन्य गतिविधियां संचालित की जा रही थीं और इनसे हर साल करोड़ों रुपये की किराया आय हुई।
शाहिद अलीम समेत अन्य पर FIR
वक्फ बोर्ड की शिकायत पर शाहजहांनाबाद थाना पुलिस ने दारुल शफकत सोसाइटी के अध्यक्ष शाहिद अलीम खान और अन्य पदाधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) और 316(2) के तहत FIR दर्ज की है। मामले की जांच अब पुलिस कर रही है।
28.91 करोड़ रुपये की रिकवरी का दावा
वक्फ बोर्ड के मुताबिक, कथित तौर पर 20 वर्षों तक वक्फ संपत्ति से किराया वसूलकर बोर्ड को इसकी जानकारी नहीं दी गई। बोर्ड का दावा है कि इस दौरान करीब 28.91 करोड़ रुपये की राशि बकाया बनती है। इस राशि की वसूली के लिए वक्फ बोर्ड ने रेवेन्यू रिकवरी सर्टिफिकेट यानी RRC भी जारी किया है।
1961 से वक्फ संपत्ति के रूप में दर्ज है जमीन
वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सनवर पटेल के मुताबिक, सुल्तानिया रोड की यह करीब 2.7 एकड़ जमीन वर्ष 1961 से वक्फ संपत्ति के तौर पर गजट में नोटिफाइड है। बोर्ड का कहना है कि दारुल शफकत सोसाइटी को जमीन के सीमित हिस्से में संस्था संचालित करने की अनुमति दी गई थी। आरोप है कि सोसाइटी ने पूरी जमीन पर अपना अधिकार जताते हुए अलग-अलग गतिविधियों के लिए संपत्ति का इस्तेमाल किया।
अस्पताल निर्माण को लेकर भी सवाल
FIR में आरोप लगाया गया है कि वक्फ संपत्ति के एक हिस्से पर अस्पताल की इमारत का निर्माण कराया गया। इसके लिए नगर निगम से अनुमति ली गई, लेकिन वक्फ बोर्ड से इसके लिए अनुमति या NOC नहीं ली गई। बोर्ड का आरोप है कि अस्पताल भवन से संबंधित दस्तावेजों में दारुल शफकत समिति और उसके पदाधिकारियों ने खुद को जमीन का मालिक बताया।
शपथ पत्र में जमीन का मालिकाना हक जताने का आरोप
वक्फ बोर्ड के मुताबिक, नगर निगम में दिए गए आवेदन, घोषणा और शपथ पत्रों में सोसाइटी और उसके पदाधिकारियों ने खुद को वक्फ संपत्ति का स्वामी और अधिकृत संस्था बताया। बोर्ड का यह भी आरोप है कि वर्ष 2004-05 से अब तक इन संपत्तियों से होने वाली किराया आय और खर्च से संबंधित कोई जानकारी वक्फ बोर्ड को नहीं दी गई।
20 साल से चल रहा था इज्तिमा बाजार
वक्फ बोर्ड अध्यक्ष के मुताबिक, पिछले करीब 20 वर्षों से इस जमीन पर इज्तिमा बाजार संचालित किया जा रहा था। आरोप है कि सैकड़ों दुकानों को किराए पर देकर हर साल करीब 2 करोड़ रुपये से अधिक की आय की गई। बोर्ड के अनुसार, इसी आधार पर करीब 28.91 करोड़ रुपये की रिकवरी का दावा किया गया है।
उम्मीद पोर्टल पर जांच के दौरान खुलासा
वक्फ बोर्ड का कहना है कि केंद्र सरकार के नए वक्फ प्रावधानों के तहत ‘उम्मीद पोर्टल’ पर दर्ज वक्फ संपत्तियों की जांच के दौरान इस मामले से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताएं सामने आईं। बोर्ड के अध्यक्ष ने आरोप लगाया है कि इस जमीन पर कब्जे से जुड़े लोगों के राजनीतिक संबंध भी हैं। हालांकि, ये सभी आरोप जांच का विषय हैं और मामले में अंतिम स्थिति पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगी। फिलहाल पुलिस ने FIR दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है, जबकि वक्फ बोर्ड 28.91 करोड़ रुपये की कथित बकाया राशि की वसूली की प्रक्रिया आगे बढ़ा रहा है।




















