मंत्री विजय शाह मामले में अब निगाहें ‘लोक भवन’ की ओर, कैबिनेट ने जो तय किया उस पर राज्यपाल की राय रहेगी अहम

भोपाल। मंत्री विजय शाह पर एसआईटी को अभियोजन (केस चलाने) पर कैबिनेट की मनाही मप्र में सबसे अहम राजनीतिक ट्विस्ट है। सूत्रों की मानें तो सरकार ने रिपोर्ट कैबिनेट की सिफारिश के साथ राज्यपाल मंगुभाई पटेल को भेज दी गई है। उधर, गृह विभाग सुप्रीम कोर्ट को अपने जवाब की तैयारी कर रहा है जिसमें यह बताया जा सकता है कि मामला अब लोक भवन में राज्यपाल के पास लंबित है। खबर है कि राज्यपाल के 31 अगस्त को भोपाल लौटेंगे, उसी दिन सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की अगली सुनवाई है।
सरकार के मंत्रियों ने साधी चुप्पी
डॉ. मोहन यादव कैबिनेट की बैठक के बाद 25 अगस्त को पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह ने सार्वजनिक ब्रीफिंग में कहा गया था कि मंत्री विजय शाह का प्रस्ताव एजेंडे में नहीं था और चर्चा नहीं हुई, जबकि मंत्रालय के सूत्रों से खबर बाहर आई कि कैबिनेट ने अभियोजन मंजूरी नहीं देने का रुख लेकर फाइल राज्यपाल को भेजी। प्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार ने निजी चैनल के हवाले से भी यह अहम जानकारी साझा की है। सरकार इस मामले में 31 अगस्त को ही एफिडेविट के जरिए अपना पक्ष रख सकती है। इस मामले में सरकार के मंत्रियों ने फिलहाल चुप्पी साध रखी है। रक्षाबंधन, महीने के आखिरी शनिवार और रविवार की छुट्टी होने के कारण ज्यादातर मंत्री-विधायक अपने क्षेत्रों में हैं। हालांकि मुख्यमंत्री शनिवार को बालाघाट में जन विश्वास कार्यक्रम में शामिल होंगे।
ये भी पढ़ें: मंत्री विजय शाह मामले में सीधे सुप्रीम कोर्ट में एफिडेविट पेश करेगी मप्र सरकार, SIT को अभियोजन की मंजूरी नहीं देगी!
एसआईटी ने सरकार से मांगी केस चलाने की मंजूरी स्वीकृति
मंत्री विजय शाह के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति के लिए गठित विशेष जांच दल (SIT) ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 196(1)(a) के तहत अभियोजन (केस) चलाने की अनुमति मांगी है। इस मामले में मध्यप्रदेश सरकार की ओर से अब तक कोई अंतिम निर्णय सामने नहीं आया है।
जनवरी से चल रही ‘सुप्रीम सुनवाई’
19 जनवरी 2026 की सुनवाई में यह स्पष्ट हुआ था कि एसआईटी अपनी जांच पूरी कर चुकी है, लेकिन अभियोजन स्वीकृति का मामला सरकार के स्तर पर लंबित था। कोर्ट ने उस समय सरकार को दो सप्ताह का समय दिया था। मई में मामला फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, तब भी सरकार की ओर से कोई फैसला नहीं आया। कोर्ट ने पुराने आदेश का पालन करने के साथ चार सप्ताह में अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने को कहा था। 23 जुलाई की ऑफिस रिपोर्ट में सामने आया कि 8 मई के आदेश के बावजूद दस्तावेज दाखिल नहीं किए गए थे। इस देरी के कारण सरकार पर दबाव बढ़ता जा रहा है।
ये भी पढ़ें: 'कटे-पिटे लोगों को उनकी बहन भेजकर...' कर्नल सोफिया को लेकर मंत्री विजय शाह का विवादित बयान, मचा सियासी बवाल
महू में मंत्री विजय शाह ने दिया था विवादित बयान
यह पूरा विवाद मई 2025 में महू के रायकुंडा गांव में आयोजित हलमा कार्यक्रम के दौरान शुरू हुआ था। कार्यक्रम में मौजूद मंत्री विजय शाह ने ऑपरेशन सिंदूर के संदर्भ में कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर टिप्पणी की थी। बयान सामने आने के बाद देशभर में तीखी प्रतिक्रिया हुई। विजय शाह ने बाद में तीन बार माफी मांगी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उनकी माफी पर भी नाराजगी जताई थी। 19 जनवरी की सुनवाई में कोर्ट ने टिप्पणी की थी कि माफी मांगने में काफी देर हो चुकी है।




















