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3,000 साल से खुला है मुंह... क्या मौत के वक्त चीख रही थी ये रहस्यमयी महिला?

3,000 साल से एक महिला की ममी का मुंह खुला है, जैसे मौत के वक्त वह चीख रही हो... लेकिन असली कहानी इससे कहीं ज्यादा रहस्यमयी है। वैज्ञानिकों ने दोबारा जांच की, फिर भी मौत की वजह का पक्का जवाब नहीं मिला। आखिर उस दिन हुआ क्या था?
3,000 साल से खुला है मुंह... क्या मौत के वक्त चीख रही थी ये रहस्यमयी महिला?

मिस्र की जमीन के नीचे दफन इतिहास आज भी कई ऐसे रहस्य अपने अंदर समेटे हुए है, जिनका जवाब वैज्ञानिक सदियों बाद भी तलाश रहे हैं। ऐसी ही एक ममी करीब 3,000 साल से लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। इस ममी का सबसे रहस्यमयी हिस्सा है उसका चेहरा, खासकर उसका खुला हुआ मुंह। पहली नजर में ऐसा लगता है जैसे महिला किसी दर्द या डर की वजह से चीख रही हो। इसी वजह से इसे 'स्क्रीमिंग वुमन ममी' कहा जाता है।

इस ममी की खोज साल 1935 में मिस्र के लक्सर इलाके में हुई थी। यह उस जगह के नीचे मिली थी, जहां प्राचीन मिस्र की महारानी हत्शेपसुत के दौर के वास्तुकार सेनमुत से जुड़ा मकबरा था। खुदाई के दौरान पुरातत्वविदों को लकड़ी के एक ताबूत में एक अज्ञात महिला की ममी मिली। ताबूत पर ऐसा कोई शिलालेख नहीं था, जिससे महिला की पहचान की जा सके। ममी की लंबाई करीब 158 सेंटीमीटर थी। शरीर का ज्यादातर हिस्सा अच्छी तरह संरक्षित था, लेकिन उसका मुंह काफी खुला हुआ था। यही बात वैज्ञानिकों के लिए सबसे बड़ा सवाल बनी। आखिर बाकी ममियों की तरह इस महिला का मुंह बंद क्यों नहीं था?

क्या महिला की मौत बेहद दर्दनाक हुई थी?

ममी का खुला मुंह और चेहरे की मुद्रा देखकर यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि शायद महिला की मौत बेहद दर्दनाक तरीके से हुई होगी या वह मौत के समय चीख रही होगी। हालांकि, वैज्ञानिक जांच इस दावे की पुष्टि नहीं करती। उपलब्ध सबूतों से यह तय नहीं किया जा सका है कि महिला की मौत किस वजह से हुई थी। साल 2024 में Frontiers in Medicine में प्रकाशित एक रिसर्च में इस ममी की दोबारा वैज्ञानिक जांच की गई। काहिरा यूनिवर्सिटी की ममी रेडियोलॉजिस्ट डॉ. सहर सलीम और मिस्र के पर्यटन एवं पुरावशेष मंत्रालय से जुड़ी समिया एल-मेरघानी ने CT Scan, X-ray और दूसरी वैज्ञानिक तकनीकों की मदद से ममी का अध्ययन किया।

CT Scan से क्या पता चला?

जांच के आधार पर वैज्ञानिकों ने अनुमान लगाया कि महिला की मौत करीब 48 साल की उम्र में हुई होगी। उसके दांतों में घिसावट थी और कुछ दांत गायब भी थे। रीढ़ और जोड़ों में उम्र से जुड़ी समस्याओं के संकेत भी मिले। हालांकि, इन जांचों से उसकी मौत की कोई निश्चित वजह सामने नहीं आई। स्कैन में शरीर के अंदर कई अहम अंगों के अवशेष भी मिले। इनमें दिल, फेफड़े, लिवर, प्लीहा, किडनी और आंतों के अवशेष शामिल थे। शोधकर्ताओं को ऐसा स्पष्ट सबूत भी नहीं मिला कि सामान्य ममीकरण प्रक्रिया के तहत शरीर से इन अंगों को निकालने के लिए चीरा लगाया गया था।

फिर मुंह खुला कैसे रह गया?

यही इस ममी के रहस्य का सबसे अहम हिस्सा है। वैज्ञानिकों ने ममीकरण की प्रक्रिया में इस्तेमाल किए गए पदार्थों की भी जांच की। शरीर और बालों में इस्तेमाल किए गए पदार्थों में आयातित रेजिन मिले। इनमें जुनिपर रेजिन और फ्रैंकिंसेंस यानी लोबान से जुड़े पदार्थ शामिल थे। इन महंगे और अच्छी गुणवत्ता वाले पदार्थों के इस्तेमाल से संकेत मिलता है कि महिला का ममीकरण साधारण तरीके से नहीं किया गया था। इसलिए यह संभावना कमजोर पड़ती है कि केवल ममीकरण के दौरान हुई लापरवाही की वजह से उसका जबड़ा खुला रह गया।

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कैडेवरिक स्पैज्म हो सकती है वजह

Frontiers in Medicine में प्रकाशित रिसर्च के मुताबिक, खुले मुंह की एक संभावित वजह कैडेवरिक स्पैज्म हो सकती है। यह एक दुर्लभ स्थिति है, जिसमें मौत के आसपास कुछ मांसपेशियां अचानक सिकुड़कर उसी स्थिति में स्थिर हो सकती हैं। शोधकर्ताओं का अनुमान है कि अगर महिला की मौत अचानक हुई हो, तो उसके चेहरे और जबड़े की स्थिति उसी समय स्थिर हो गई हो सकती है। इससे उसका मुंह खुला रह गया होगा। हालांकि, यह अंतिम निष्कर्ष नहीं है। वैज्ञानिकों ने यह साबित नहीं किया है कि महिला की मौत इसी प्रक्रिया के कारण हुई थी या वह वास्तव में चीखते हुए मरी थी। इसलिए उसके खुले मुंह को देखकर उसकी मौत के तरीके के बारे में निश्चित दावा नहीं किया जा सकता।

क्या महिला शाही परिवार से जुड़ी थी?

ममीकरण में इस्तेमाल किए गए महंगे पदार्थों से इतना जरूर पता चलता है कि महिला को अच्छी गुणवत्ता वाली अंतिम संस्कार प्रक्रिया मिली थी। लेकिन उपलब्ध सबूतों के आधार पर उसे शाही परिवार का सदस्य कहना सही नहीं होगा। उसकी दफन मुद्रा भी शाही ममियों से अलग थी। उसके हाथ सीने पर क्रॉस किए हुए नहीं थे। इसके अलावा, महिला की पहचान बताने वाला कोई शिलालेख भी ताबूत पर नहीं मिला था।

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बालों में मिली खास चीज

महिला के सिर पर एक जटिल विग भी मिली थी। शोधकर्ताओं के मुताबिक, इसे खजूर के पेड़ से मिलने वाले रेशों से तैयार किया गया था। उसके बालों में मेहंदी के संकेत भी मिले। ममी पर इस्तेमाल किए गए पदार्थों से यह भी पता चलता है कि प्राचीन मिस्र में शवों को सुरक्षित रखने के लिए अलग-अलग प्राकृतिक और आयातित सामग्रियों का इस्तेमाल किया जाता था।

3,000 साल बाद भी रहस्य बरकरार

नई वैज्ञानिक जांच ने इस ममी के बारे में कई अहम जानकारियां जरूर सामने रखी हैं, लेकिन उसकी मौत का रहस्य पूरी तरह नहीं सुलझ पाया है। CT Scan से मौत की कोई निश्चित वजह नहीं मिली। खुले मुंह के लिए कैडेवरिक स्पैज्म एक संभावित वैज्ञानिक व्याख्या है, लेकिन इसे प्रमाणित निष्कर्ष नहीं माना गया है। करीब 3,000 साल बाद भी इस अनाम महिला का खुला मुंह लोगों की जिज्ञासा बढ़ाता है। 1935 में खोजे जाने के दशकों बाद भी यह ममी प्राचीन मिस्र में मृत्यु और ममीकरण की प्रक्रियाओं को समझने के लिए वैज्ञानिकों के अध्ययन का विषय बनी हुई है।

Sona Rajput
By Sona Rajput

माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन किया है। साल 2022 ...Read More

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