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सुबह उठते ही क्यों बढ़ने लगती है बेचैनी? क्या यह कोई बीमारी के हैं लक्षण या है बड़ा खतरा

रात में फोन पर लगातार न्यूज, सोशल मीडिया और नकारात्मक कंटेंट स्क्रॉल करने की आदत को डूमस्क्रॉलिंग कहा जाता है। डॉक्टरों के मुताबिक, इससे नींद आने में देरी, थकान, चिड़चिड़ापन और सुबह बेचैनी महसूस हो सकती है। जानिए डूमस्क्रॉलिंग क्या है, इसका नींद और मानसिक स्वास्थ्य पर कैसे असर पड़ता है और इससे बचने के आसान तरीके क्या हैं।
सुबह उठते ही क्यों बढ़ने लगती है बेचैनी? क्या यह कोई बीमारी के हैं लक्षण या है बड़ा खतरा
रात में फोन पर लगातार न्यूज, सोशल मीडिया और नकारात्मक कंटेंट स्क्रॉल करने की आदत को डूमस्क्रॉलिंग कहा जाता है।

आजकल बिस्तर पर जाते ही फोन चलाना आम बात हो गई है। लोग न्यूज, सोशल मीडिया पोस्ट और वीडियो देखते-देखते कब घंटों बिता देते हैं, पता ही नहीं चलता। खासकर जब हम लगातार क्राइम, हादसों, विवाद या डराने वाली खबरें देखते रहते हैं और चाहकर भी फोन नहीं रख पाते। इस आदत को डूमस्क्रॉलिंग कहा जाता है।

क्या है डूमस्क्रॉलिंग?

डूमस्क्रॉलिंग का मतलब है लगातार नकारात्मक या परेशान करने वाला कंटेंट स्क्रॉल करते रहना। डॉक्टरों के मुताबिक, यह सिर्फ ज्यादा स्क्रीन टाइम की समस्या नहीं है, बल्कि इसका असर हमारी नींद और मानसिक स्थिति पर भी पड़ सकता है।

सोने के समय भी दिमाग रहता है एक्टिव

डॉक्टरों का कहना है कि सोने से ठीक पहले लगातार नकारात्मक खबरें देखने से दिमाग शांत होने के बजाय अलर्ट मोड में रह सकता है। शरीर बिस्तर पर पहुंच जाता है, लेकिन दिमाग नई-नई जानकारियां प्रोसेस करता रहता है। इस वजह से नींद आने में समय लग सकता है और नींद की क्वालिटी भी खराब हो सकती है। अगले दिन थकान, चिड़चिड़ापन और काम पर ध्यान लगाने में परेशानी महसूस हो सकती है।

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सुबह उठते ही क्यों होती है बेचैनी?

रात की खराब नींद और परेशान करने वाली खबरों का असर सुबह तक रह सकता है। ऐसे में बिना किसी साफ वजह के बेचैनी, घबराहट, चिड़चिड़ापन या मन भारी लगने जैसा महसूस हो सकता है। डॉक्टरों के मुताबिक, लगातार नींद पूरी न होने से फोकस, मूड और तनाव को संभालने की क्षमता भी प्रभावित हो सकती है। इसलिए सुबह की बेचैनी को हमेशा मानसिक कमजोरी समझना सही नहीं है। कई बार इसके पीछे नींद की कमी और रात की गलत डिजिटल आदत भी हो सकती है।

फोन और एंग्जायटी का बन सकता है चक्र

हालांकि, फोन को एंग्जायटी की एकमात्र वजह नहीं माना जा सकता। कई बार पहले से मौजूद तनाव के कारण भी व्यक्ति बार-बार फोन देखने लगता है। फिर नकारात्मक कंटेंट देखने से नींद खराब होती है और अगले दिन तनाव और बढ़ जाता है।

यानी तनाव → फोन चलाना → नेगेटिव कंटेंट देखना → नींद खराब होना → अगले दिन ज्यादा तनाव का एक चक्र बन सकता है।

सोने से पहले क्या करें?

डॉक्टरों की सलाह है कि बिस्तर पर जाने के बाद फोन चलाने के बजाय किताब पढ़ना, हल्का संगीत सुनना या कुछ मिनट रिलैक्सेशन एक्सरसाइज करना बेहतर विकल्प हो सकता है। सुबह उठते ही फोन देखने से भी बचें। दिन की शुरुआत पानी पीने, हल्की स्ट्रेचिंग करने, कुछ समय प्राकृतिक रोशनी में रहने और दिन के जरूरी काम तय करने से करें। अगर कई हफ्तों तक नींद खराब रहे, सुबह की बेचैनी बनी रहे या एंग्जायटी का असर रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ने लगे, तो डॉक्टर या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है। फोन हमारी जरूरत है, लेकिन रात में उसे दिमाग का आखिरी और सुबह का पहला साथी बना लेना अच्छी नींद के लिए ठीक नहीं। शरीर की तरह दिमाग को भी सोने से पहले डिजिटल ब्रेक की जरूरत होती है।

Dolly Wasvani
By Dolly Wasvani

डोली वासवानी | People’s Institute of Media Studies से BAMC Student। पत्रकारिता की दुनिया में नई शुरु...Read More

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