पुराने अखबार, जनजातीय कला और ढेर सारी यादें… PIMS छात्रों का एजुकेशनल ट्रिप आखिर क्यों बना यादगार?

भोपाल। पढ़ाई सिर्फ किताबों और क्लासरूम तक सीमित नहीं होती। जब छात्र किसी इतिहास, संस्कृति या विषय को अपनी आंखों से देखते हैं, तो सीखने का अनुभव और भी खास बन जाता है। इसी सोच के साथ People’s Institute of Media Studies (PIMS) के छात्रों के लिए 3 सितंबर को एक खास एजुकेशनल विजिट आयोजित की गई। इस दौरान छात्रों ने माधव सप्रे संग्रहालय और मध्य प्रदेश जनजातीय संग्रहालय का भ्रमण किया। यह सफर पढ़ाई के साथ-साथ मस्ती, बातचीत और नई यादों से भी भरा रहा।
सुबह 10 बजे PIMS से शुरू हुआ सफर
एजुकेशनल ट्रिप की शुरुआत सुबह करीब 10 बजे PIMS बिल्डिंग से हुई। छात्र बस से संग्रहालयों के लिए रवाना हुए। सफर के दौरान छात्रों में काफी उत्साह नजर आया। दोस्तों के साथ बातचीत, हंसी-मजाक और तस्वीरें खींचने का सिलसिला चलता रहा। क्लासरूम से अलग माहौल मिलने के कारण छात्रों के लिए यह दिन काफी खास रहा।
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छात्र बस से संग्रहालयों के लिए रवाना हुए।
माधवराव सप्रे संग्रहालय में खुली पत्रकारिता की पुरानी दुनिया
ट्रिप का पहला पड़ाव माधवराव सप्रे संग्रहालय रहा। यहां जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन के छात्रों को पत्रकारिता के पुराने दौर को करीब से समझने का मौका मिला। संग्रहालय में रखे पुराने अखबार, पत्र-पत्रिकाएं, किताबें और पत्रकारिता से जुड़ी ऐतिहासिक सामग्री ने छात्रों का ध्यान खींचा। किताबों में पढ़ी गई पत्रकारिता की बातें जब सामने रखी पुरानी सामग्री के जरिए देखने को मिलीं, तो छात्रों की दिलचस्पी और बढ़ गई। उन्होंने जाना कि पुराने समय में पत्रकारिता किस तरह की जाती थी और समय के साथ प्रिंट मीडिया में किस तरह बदलाव आया।
माधवराव सप्रे के योगदान को भी जाना
इस दौरान छात्रों ने माधवराव सप्रे के जीवन और हिंदी पत्रकारिता में उनके योगदान के बारे में भी जानकारी हासिल की। संग्रहालय में मौजूद सामग्री के माध्यम से छात्रों को उनके लेखन, विचारों और पत्रकारिता से जुड़े कार्यों को समझने का अवसर मिला। छात्रों ने यह भी जाना कि हिंदी पत्रकारिता ने अपने शुरुआती दौर से लेकर आज के डिजिटल दौर तक करीब 200 साल का लंबा सफर तय किया है। पुराने दौर की पत्रकारिता से लेकर आधुनिक मीडिया तक का यह बदलाव छात्रों के लिए काफी रोचक रहा।
हिंदी पत्रकारिता का करीब 200 साल का लंबा सफर देखा।
विजय दत्त श्रीधर से बातचीत का मिला मौका
माधवराव सप्रे संग्रहालय की यात्रा के दौरान छात्रों को पद्म श्री विजय दत्त श्रीधर से बातचीत करने का अवसर भी मिला। छात्रों ने पत्रकारिता, इतिहास, संग्रहालय और वहां रखी सामग्री से जुड़े कई सवाल पूछे। उन्होंने छात्रों के सवालों का जवाब देते हुए कई महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं।
जनजातीय संग्रहालय में दिखी MP की अनोखी संस्कृति
इसके बाद छात्र मध्य प्रदेश जनजातीय संग्रहालय पहुंचे। यहां उन्हें प्रदेश की अलग-अलग जनजातियों की संस्कृति, परंपराओं और जीवनशैली को करीब से देखने का अवसर मिला। संग्रहालय में बने पारंपरिक घर, दीवारों पर बनी चित्रकारी, लोककला, पहनावे, खेती-किसानी से जुड़ी चीजें और रोजमर्रा के जीवन में इस्तेमाल होने वाली वस्तुओं ने छात्रों का ध्यान आकर्षित किया। छात्रों ने अलग-अलग हिस्सों में घूमकर जनजातीय समाज की जीवनशैली को समझा और कई यादगार तस्वीरें भी लीं।
अलग-अलग जनजातियों की संस्कृति, परंपराओं और जीवनशैली को करीब से देखा
सीखने के साथ खूब हुई मस्ती
इस पूरे सफर में पढ़ाई के साथ मनोरंजन का भी पूरा माहौल रहा। दोस्तों के साथ घूमना, बातचीत करना, नई जगहों को देखना और तस्वीरों में यादगार पलों को कैद करना छात्रों के लिए खास अनुभव रहा।
यह एजुकेशनल ट्रिप छात्रों के लिए ज्ञान, अनुभव, संस्कृति और मनोरंजन का खूबसूरत संगम बनी। इस यात्रा ने छात्रों को यह समझाया कि शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं है। इतिहास और संस्कृति को करीब से देखना, जानकारों से बातचीत करना और अपने सवालों के जवाब पाना भी सीखने का अहम हिस्सा है।



















