बुखार-खांसी से डर रहे हैं? स्वाइन फ्लू से बचना है तो कौन सा टीका लगवाएं? H1N1 वैक्सीन को लेकर दूर करें ये बड़ा भ्रम!

नई दिल्ली। बारिश और बदलते मौसम के बीच फ्लू जैसे संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे में H1N1 यानी स्वाइन फ्लू को लेकर लोगों के बीच वैक्सीन से जुड़े कई सवाल सामने आते हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या स्वाइन फ्लू के लिए अलग से कोई इंजेक्शन लगवाना पड़ता है। दरअसल, H1N1 अब मौसमी इन्फ्लूएंजा के वायरस में शामिल है और मौसमी फ्लू वैक्सीन में H1N1 के खिलाफ सुरक्षा दी जाती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन भी फ्लू से बचाव के लिए हर साल टीकाकरण को अहम मानता है, खासकर उन लोगों के लिए जिन्हें संक्रमण की गंभीर बीमारी का ज्यादा खतरा रहता है।
क्या H1N1 के लिए अलग टीका है?
H1N1 के नाम से अलग वैक्सीन खोजने की जरूरत नहीं होती। मौसमी इन्फ्लूएंजा वैक्सीन में ऐसे वायरस स्ट्रेन शामिल किए जाते हैं, जिनसे उस मौसम में संक्रमण फैलने की आशंका रहती है। WHO की मौजूदा जानकारी के मुताबिक मौसमी फ्लू वैक्सीन की संरचना समय-समय पर बदली जाती है, क्योंकि इन्फ्लूएंजा वायरस लगातार बदलते रहते हैं।
टीका कब लगवाना बेहतर रहता है?
फ्लू वैक्सीन का सही समय व्यक्ति के इलाके और वहां फ्लू के फैलने के मौसम पर निर्भर करता है। आम तौर पर संक्रमण का दौर शुरू होने से पहले टीका लगवाना बेहतर माना जाता है। WHO के अनुसार टीकाकरण के बाद शरीर को सुरक्षा विकसित करने में करीब दो सप्ताह लग सकते हैं। हालांकि अगर सीजन शुरू होने के बाद टीका लगाया जाए, तब भी इससे फायदा मिल सकता है। भारत में अलग-अलग हिस्सों में फ्लू का मौसम एक जैसा नहीं रहता। इसलिए वैक्सीन की टाइमिंग स्थानीय संक्रमण और डॉक्टर की सलाह के अनुसार तय करना बेहतर है। खासकर सितंबर-अक्टूबर के दौरान उत्तर भारत में रहने वाले लोग अपने डॉक्टर से मौसमी फ्लू वैक्सीन के सही समय के बारे में जानकारी ले सकते हैं।
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किन लोगों के लिए ज्यादा जरूरी है टीका?
फ्लू किसी को भी हो सकता है, लेकिन कुछ लोगों में इसके गंभीर होने का खतरा ज्यादा रहता है। बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं, छोटे बच्चे और पहले से किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे लोगों को विशेष सावधानी की जरूरत होती है। WHO इन समूहों को मौसमी इन्फ्लूएंजा टीकाकरण के प्रमुख समूहों में रखता है।
क्या वैक्सीन लगने के बाद फ्लू हो सकता है?
फ्लू वैक्सीन का मकसद संक्रमण और खासकर गंभीर बीमारी का खतरा कम करना है। यह हर व्यक्ति को 100 प्रतिशत संक्रमण से बचाने की गारंटी नहीं देती। वायरस में बदलाव और वैक्सीन में शामिल स्ट्रेन के बीच मेल के आधार पर इसका असर अलग-अलग हो सकता है। फिर भी टीकाकरण बीमारी के गंभीर रूप, अस्पताल में भर्ती होने और जटिलताओं के खतरे को कम कर सकता है।
हर साल वैक्सीन क्यों बदलती है?
इन्फ्लूएंजा वायरस लगातार अपना रूप बदलते हैं। इसी वजह से WHO हर साल वैक्सीन में शामिल वायरस की संरचना की समीक्षा करता है। मौसमी फ्लू वैक्सीन की संरचना को नए वायरस के हिसाब से अपडेट किया जाता है, ताकि आने वाले सीजन में बेहतर सुरक्षा मिल सके।
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हल्की सर्दी में लगवा सकते हैं टीका?
सिर्फ हल्की सर्दी या मामूली तबीयत खराब होने पर टीकाकरण जरूरी तौर पर टालना नहीं पड़ता। लेकिन अगर तेज बुखार है या व्यक्ति गंभीर रूप से अस्वस्थ है, तो वैक्सीन लगवाने का सही समय डॉक्टर से पूछना बेहतर रहेगा। जिन लोगों को पहले किसी फ्लू वैक्सीन से गंभीर एलर्जी हुई हो, उन्हें टीका लगवाने से पहले डॉक्टर को इसकी जानकारी जरूर देनी चाहिए। भारत का राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (NCDC) का मौसमी इन्फ्लूएंजा पेज H1N1 और मौसमी इन्फ्लूएंजा से जुड़ी सरकारी जानकारी और दिशा-निर्देश भी उपलब्ध कराता है।



















