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मैटरनिटी लीव ली तो नौकरी खतरे में? जानें गर्भवती महिला कर्मचारियों के कानूनी अधिकार

क्या मैटरनिटी लीव लेने या प्रेग्नेंसी की वजह से कंपनी महिला को नौकरी से निकाल सकती है? जानिए मैटरनिटी बेनिफिट एक्ट के तहत महिलाओं को मिलने वाली नौकरी की सुरक्षा, 26 हफ्ते की छुट्टी, 80 दिन की पात्रता, गलत तरीके से टर्मिनेशन पर शिकायत की प्रक्रिया और Contract या Temporary महिला कर्मचारियों के अधिकारों के बारे में पूरी जानकारी आसान भाषा में।
मैटरनिटी लीव ली तो नौकरी खतरे में? जानें गर्भवती महिला कर्मचारियों के कानूनी अधिकार
जानिए मैटरनिटी बेनिफिट एक्ट के तहत महिलाओं को मिलने वाली नौकरी की सुरक्षा|

मां बनना किसी भी महिला की जिंदगी का बेहद खास समय होता है। नौकरी करने वाली महिलाओं के लिए यह दौर थोड़ा और चुनौतीपूर्ण हो जाता है, क्योंकि उन्हें एक साथ अपनी सेहत, इलाज और बच्चे की देखभाल का ध्यान रखना पड़ता है। ऐसे में मैटरनिटी लीव यानी मातृत्व अवकाश उनके लिए काफी जरूरी होता है। लेकिन इसी दौरान कई महिलाओं के मन में एक बड़ा सवाल रहता है- क्या मैटरनिटी लीव लेने या प्रेग्नेंट होने की वजह से कंपनी उन्हें नौकरी से निकाल सकती है? आम तौर पर इसका जवाब है नहीं। कानून महिला कर्मचारियों को ऐसी स्थिति में सुरक्षा देता है।

मैटरनिटी लीव लेने पर नौकरी से निकाल सकती है कंपनी?

मैटरनिटी बेनिफिट एक्ट, 1961 की धारा 12 के मुताबिक, सिर्फ मैटरनिटी लीव लेने की वजह से किसी महिला कर्मचारी को नौकरी से नहीं निकाला जा सकता। कंपनी उसकी नौकरी की शर्तों में भी ऐसा बदलाव नहीं कर सकती, जिससे उसे नुकसान हो। यानी अगर कोई महिला कानून के तहत मैटरनिटी लीव ले रही है और कंपनी सिर्फ इस वजह से उसे नौकरी से हटा देती है कि वह कुछ समय ऑफिस नहीं आ रही, तो ऐसी कार्रवाई को चुनौती दी जा सकती है।

कितनी मिलती है मैटरनिटी लीव?

कानून के तहत पात्र महिला कर्मचारियों को सामान्य तौर पर 26 हफ्ते तक की मैटरनिटी लीव मिल सकती है। हालांकि इसके लिए कुछ शर्तें भी होती हैं। आमतौर पर महिला ने डिलीवरी की संभावित तारीख से पहले के 12 महीनों में संबंधित संस्थान में कम से कम 80 दिन काम किया होना चाहिए। ध्यान देने वाली बात यह है कि हर महिला की स्थिति एक जैसी नहीं होती। बच्चों की संख्या, नौकरी की स्थिति और कानून में दी गई दूसरी परिस्थितियों के आधार पर छुट्टी की अवधि और पात्रता अलग हो सकती है।

सिर्फ प्रेग्नेंसी की वजह से नौकरी खत्म नहीं की जा सकती

कानून महिला को सिर्फ मैटरनिटी लीव के दौरान ही नहीं, बल्कि प्रेग्नेंसी से जुड़े मामलों में भी सुरक्षा देता है। अगर महिला को सिर्फ गर्भवती होने या मातृत्व लाभ लेने की वजह से नौकरी से हटाया जाता है, तो यह कानूनी तौर पर गंभीर सवाल खड़ा कर सकता है। महिला को नौकरी से हटाने की कार्रवाई होने पर भी कुछ परिस्थितियों में उसका मैटरनिटी बेनिफिट या मेडिकल बोनस अपने आप खत्म नहीं हो जाता।

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लेकिन हर स्थिति में नौकरी से बचाव नहीं

इसका मतलब यह नहीं है कि किसी महिला कर्मचारी को किसी भी परिस्थिति में नौकरी से हटाया ही नहीं जा सकता। अगर कर्मचारी पर गंभीर गलत आचरण यानी Gross Misconduct का आरोप है और कंपनी ने कानून के मुताबिक सही प्रक्रिया का पालन किया है, तो मामला अलग हो सकता है। इसलिए नौकरी से हटाने की असली वजह और अपनाई गई प्रक्रिया काफी मायने रखती है।

कंपनी नौकरी खत्म करने की बात करे तो क्या करें?

ऐसी स्थिति में सबसे पहले घबराने के बजाय अपने सभी जरूरी दस्तावेज संभालकर रखें। खास तौर पर इन चीजों को सुरक्षित रखना मददगार हो सकता है:

  • ऑफर लेटर और नौकरी से जुड़े दस्तावेज
  • सैलरी स्लिप
  • मैटरनिटी लीव का आवेदन
  • कंपनी के ईमेल और मैसेज
  • WhatsApp या अन्य बातचीत के रिकॉर्ड
  • टर्मिनेशन लेटर

कंपनी से नौकरी खत्म करने की वजह लिखित में मांगना भी जरूरी हो सकता है। इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि कंपनी ने किस आधार पर कार्रवाई की है। आगे शिकायत या कानूनी कार्रवाई की जरूरत पड़ने पर यही रिकॉर्ड काम आ सकते हैं।

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गलत तरीके से नौकरी से निकाला तो कहां शिकायत करें?

अगर किसी महिला को लगता है कि उसे प्रेग्नेंसी या मैटरनिटी लीव की वजह से गलत तरीके से नौकरी से निकाला गया है, तो वह संबंधित लेबर अथॉरिटी या सक्षम प्राधिकारी के सामने शिकायत कर सकती है। कुछ मामलों में कानून के तहत आदेश के खिलाफ 60 दिनों के भीतर अपील का भी प्रावधान है। जरूरत के हिसाब से महिला लेबर कोर्ट या दूसरे उचित कानूनी मंच का सहारा भी ले सकती है। मामले के तथ्यों के आधार पर नौकरी पर वापस लेने, बकाया वेतन या दूसरी राहत की मांग की जा सकती है। हालांकि, अंतिम फैसला संबंधित मामले और लागू कानून पर निर्भर करेगा।

Contract या Temporary नौकरी वाली महिलाओं के अधिकार भी जानें

मैटरनिटी बेनिफिट का अधिकार सिर्फ इस बात से तय नहीं होता कि महिला को कंपनी ने ‘Permanent Employee’ बताया है या नहीं। सुप्रीम कोर्ट ने Municipal Corporation of Delhi vs Female Workers मामले में मातृत्व अवकाश के महत्व पर जोर दिया था। इस फैसले में अस्थायी और दिहाड़ी महिला कर्मचारियों के अधिकारों को भी मान्यता दी गई थी। इसलिए अगर कोई महिला Contract, Temporary या किसी दूसरी व्यवस्था के तहत काम कर रही है, तो उसे अपनी नौकरी की स्थिति के मुताबिक मिलने वाले अधिकारों की जानकारी जरूर लेनी चाहिए।

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मैटरनिटी लीव कंपनी की मेहरबानी नहीं

सबसे जरूरी बात यह है कि पात्र महिला के लिए मैटरनिटी लीव कोई कंपनी की कृपा या एहसान नहीं, बल्कि कानून के तहत मिलने वाला अधिकार है। इसलिए सिर्फ गर्भवती होने, मैटरनिटी लीव मांगने या कानून के तहत छुट्टी पर रहने की वजह से नौकरी खत्म करना सामान्य तौर पर कानूनी सुरक्षा के खिलाफ हो सकता है। ऐसी स्थिति आने पर तुरंत इस्तीफा देने के बजाय पहले अपने दस्तावेज सुरक्षित करें, कंपनी से लिखित जवाब लें और जरूरत पड़ने पर लेबर अथॉरिटी या किसी योग्य वकील से सलाह लें। सही रिकॉर्ड और समय पर उठाया गया कदम अपने अधिकारों की रक्षा में काफी मदद कर सकता है।

Dolly Wasvani
By Dolly Wasvani

डोली वासवानी | People’s Institute of Media Studies से BAMC Student। पत्रकारिता की दुनिया में नई शुरु...Read More

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