Naresh Bhagoria
12 Jan 2026
योगेश सोनी, जबलपुर। सरकारी कामों में भ्रष्टाचार होने के आरोप लगना आम बात है। यदि किसी काम में भ्रष्टाचार हुआ है, तो भारत के हर एक नागरिक को उस काम से संबंधित जानकारी पाने का अधिकार है। इस बारे में वर्ष 2005 में सूचना का अधिकार अधिनियम लागू किया गया। इसका मकसद साफ था कि अफसर किसी जानकारी को देने में यदि आनाकानी करें, तो वह राइट टू इन्फॉर्मेशन (आरटीआई) के तहत हासिल की जा सकती है। भारत का कोई भी नागरिक इस अधिकार का उपयोग करके किसी भी सरकारी विभाग से जानकारी मांग सकता है।
सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 कानून का मकसद पारदर्शिता, जवाबदेही और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाना है। भारत का कोई भी नागरिक केंद्र सरकार, राज्य सरकार, जिला प्रशासन, पंचायत या किसी भी सरकारी दफ्तर से इस अधिकार के तहत सूचना हासिल कर सकता है।
इस कानून में स्पष्ट प्रावधान है कि आरटीआई में मांगी गई जानकारी 30 दिनों में देना ही होगी। यदि लोक सूचना अधिकारी 30 दिनों में जानकारी नहीं देता, तो कानून में प्रथम अपील और फिर द्वितीय अपील करने का भी प्रावधान है। इसके बाद भी जानकारी न देने पर सूचना आयोग संबंधित अधिकारी पर 250 रुपए प्रतिदिन के हिसाब से जुर्माना लगा सकता है।
सूचना के अधिकार में कुछ अपवाद भी हैं। मसलन, इस अधिकार के तहत वे जानकारियां नहीं दी जा सकतीं, जो देश की राष्ट्रीय सुरक्षा, सेना की गोपनीयता या खुफिया ऑपरेशन से जुड़ी हों। इसके अलावा किसी व्यक्ति की निजी जानकारी से संबंधित जानकारी भी इस एक्ट के तहत नहीं दी जा सकती।
आरटीआई के तहत जानकारी प्राप्त करने ऑनलाइन आवेदन https://rtionline.gov.in/ और ऑफलाइन मोड में संबंधित विभाग के लोक सूचना अधिकारी को दिया जाएगा। जिन बिन्दुओं की जानकारी प्राप्त करना है, वो स्पष्ट और साफ शब्दों में लिखना अनिवार्य है।
याद रखें अधिकार की जानकारी ही असली ताकत है। जब आप अपने हक से परिचित होंगे, तभी आप कानून के दायरे में रहकर गलत व्यवहार का विरोध कर पाएंगे।
पीपुल्स अपडेट, आपके साथ आपके अधिकारों के साथ