Kishor Kumar :रिकॉर्डिंग के बीच रुक गए थे किशोर कुमार, फिर उसी धुन पर गाया ऐसा गीत जो बन गया सदाबहार क्लासिक

हिंदी सिनेमा के महान पार्श्वगायक किशोर कुमार की आवाज आज भी करोड़ों संगीत प्रेमियों के दिलों में बसती है। उन्होंने अपने करियर में हजारों गाने गाए, लेकिन कुछ गीत ऐसे रहे जिन्होंने समय की सीमाएं पार कर अमर पहचान बना ली। ऐसा ही एक गीत है 'हजार राहें मुड़ के देखीं', जिसकी रिकॉर्डिंग से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा आज भी संगीत प्रेमियों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। बहुत कम लोग जानते हैं कि इस गीत की रिकॉर्डिंग के दौरान किशोर कुमार खुद बीच में रुक गए थे। उन्हें पहले इस गाने की धुन पर संदेह था, लेकिन बाद में जब उन्होंने उसी मूल धुन को समझा, तो ऐसा गीत रिकॉर्ड किया जिसने हिंदी फिल्म संगीत के इतिहास में अपनी अलग जगह बना ली।
फिल्म 'थोड़ी सी बेवफाई' का यादगार गीत
साल 1980 में रिलीज हुई फिल्म 'थोड़ी सी बेवफाई' का गीत 'हजार राहें मुड़ के देखीं'आज भी हिंदी सिनेमा के सबसे भावुक और यादगार गीतों में गिना जाता है। इस गीत का संगीत दिग्गज संगीतकार खय्याम ने तैयार किया था, जबकि इसके बोल प्रसिद्ध गीतकार गुलजार ने लिखे थे। दर्द और बिछड़ने के एहसास को बेहद सरल शब्दों में पिरोया गया यह गीत आज भी लोगों की पसंदीदा प्लेलिस्ट का हिस्सा है।
धीमी धुन को लेकर थी किशोर कुमार की आपत्ति
रिपोर्ट्स के अनुसार, जब खय्याम और गुलजार इस गीत की रिकॉर्डिंग की तैयारी कर रहे थे, तब इसकी धुन काफी धीमी रखी गई थी। किशोर कुमार को लगा कि इतनी धीमी गति वाला गीत शायद
दर्शकों को पसंद न आए। उन्होंने संगीतकार खय्याम से धुन को थोड़ा तेज करने का सुझाव भी दिया। माना जाता है कि रिकॉर्डिंग शुरू होने से पहले इस पर चर्चा हुई, लेकिन जब रिकॉर्डिंग शुरू हुई तो किशोर कुमार खुद पूरी तरह सहज महसूस नहीं कर पाए।
बीच में रोक दी रिकॉर्डिंग, फिर बदला फैसला
रिकॉर्डिंग के दौरान किशोर कुमार अचानक रुक गए। उन्होंने महसूस किया कि बदली हुई सोच के साथ यह गीत अपना असली भाव खो रहा है। इसके बाद वह वापस खय्याम और गुलजार के पास गए और कहा कि इस गीत की मूल धीमी धुन ही इसकी सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने स्वीकार किया कि अब वह इस धुन की गहराई को समझ चुके हैं। फिर गाने को उसी मूल धुन पर रिकॉर्ड किया गया, जिसे खय्याम ने तैयार किया था।
रिलीज होते ही लोगों के दिलों में उतर गया गीत
जब 'हजार राहें मुड़ के देखीं' रिलीज हुआ तो इसे श्रोताओं का जबरदस्त प्यार मिला। किशोर कुमार की भावपूर्ण आवाज, खय्याम का सधा हुआ संगीत और गुलजार के संवेदनशील शब्दों ने इस गीत को कालजयी बना दिया। यह गीत खासतौर पर उन लोगों के बीच बेहद लोकप्रिय हुआ, जो प्यार, बिछड़ने और यादों के एहसास से जुड़ाव महसूस करते थे। आज भी यह गीत हिंदी फिल्म संगीत के सबसे भावुक गीतों में शामिल माना जाता है।
गीत ने दिलाए फिल्मफेयर अवॉर्ड
इस गाने की सफलता केवल लोकप्रियता तक सीमित नहीं रही। किशोर कुमार को इस गीत के लिए सर्वश्रेष्ठ पुरुष पार्श्वगायक (Best Male Playback Singer) का फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला। वहीं गुलजार को इसके बोल लिखने के लिए सर्वश्रेष्ठ गीतकार (Best Lyricist) का फिल्मफेयर पुरस्कार मिला। यह सम्मान इस बात का प्रमाण था कि कभी जिस धीमी धुन पर सवाल उठे थे, वही आगे चलकर हिंदी सिनेमा के सबसे यादगार गीतों में शामिल हो गई।
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राजेश खन्ना ने भी जताई थी खुशी
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस गीत और फिल्म के संगीत की शानदार सफलता से अभिनेता राजेश खन्ना भी बेहद खुश थे। कहा जाता है कि उन्होंने संगीतकार खय्याम को उनकी बेहतरीन संगीत रचना के लिए एक कार उपहार में दी थी। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है, लेकिन यह किस्सा लंबे समय से फिल्म जगत में सुनाया जाता रहा है।
आज भी लोगों की पसंद बना हुआ है यह गीत
चार दशक से ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी 'हजार राहें मुड़ के देखीं' की लोकप्रियता कम नहीं हुई है। यह गीत आज भी रेडियो, संगीत मंचों और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उतनी ही पसंद से सुना जाता है। किशोर कुमार की गायकी, खय्याम का संगीत और गुलजार की लेखनी ने मिलकर ऐसा जादू रचा, जिसने इस गीत को हिंदी सिनेमा की अमर धरोहर बना दिया।












