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Kanker:कांकेर में 7 फीट गहरे सेप्टिक टैंक में गिरे भालू के दो शावक, बचाने पहुंची मादा ने ग्रामीणों को दौड़ाया

7 फीट गड्ढे में फंसे भालू के शावक, वन विभाग ने किया सुरक्षित रेस्क्यू। कांकेर जिले में वन्यजीवों के रिहायशी इलाकों के करीब पहुंचने का सिलसिला थमता नजर नहीं आ रहा है। भालू और तेंदुए जैसे जंगली जानवरों की लगातार मौजूदगी से ग्रामीणों में दहशत का माहौल बना हुआ है।
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कांकेर में 7 फीट गहरे सेप्टिक टैंक में गिरे भालू के दो शावक, बचाने पहुंची मादा ने ग्रामीणों को दौड़ाया
कांकेर: कांकेर में इंसानी बस्ती के करीब वन्यजीवों की मौजूदगी ने एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है। ग्राम कोकपुर में मादा भालू के दो शावक करीब 7 फीट गहरे पुराने सेप्टिक टैंक में गिर गए। बच्चों को गड्ढे में फंसा देख मादा भालू उन्हें निकालने की कोशिश करती रही और बाद में ग्रामीणों को दौड़ाने लगी। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम और वन्यप्राणी विशेषज्ञ मौके पर पहुंचे और दोनों शावकों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। इसके बाद मादा भालू अपने दोनों बच्चों के साथ जंगल की ओर लौट गई।

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रिहायशी इलाके में फिर वन्यजीव की दस्तक

कांकेर जिले में वन्यजीवों के रिहायशी इलाकों के करीब पहुंचने का सिलसिला थमता नजर नहीं आ रहा है। भालू और तेंदुए जैसे जंगली जानवरों की लगातार मौजूदगी से ग्रामीणों में दहशत का माहौल बना हुआ है। हाल ही में मरकाटोला-लारगांव क्षेत्र में भालू के हमले में दो लोगों की मौत और एक महिला के घायल होने की घटना सामने आई थी। वहीं सरोना क्षेत्र में भी एक भालू भोजन की तलाश में कुएं में गिर गया था।

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7 फीट गहरे टैंक में गिरे दो शावक

सोमवार को कांकेर वन परिक्षेत्र के ग्राम कोकपुर में मादा भालू के दो शावक सड़क किनारे स्थित एक पुराने करीब 7 फीट गहरे सेप्टिक टैंक में गिर गए। रात में विचरण के बाद जंगल की ओर लौट रही मादा भालू के दोनों बच्चे गड्ढे में फंस गए।

बच्चों को बचाने ग्रामीणों को दौड़ाया

शावकों को गड्ढे से निकालने में असफल मादा भालू आसपास घूमती रही। इसी दौरान सुबह मॉर्निंग वॉक और खेतों की ओर जा रहे कुछ ग्रामीण उसके सामने आ गए। बच्चों की सुरक्षा को लेकर आक्रामक हुई मादा भालू ने ग्रामीणों को दौड़ा दिया। अचानक भालू के पीछे पड़ने से ग्रामीणों में कुछ देर के लिए अफरा-तफरी मच गई।

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ग्रामीणों ने दी वन विभाग को सूचना

घटना की जानकारी मिलते ही ग्रामीणों ने ग्राम पंचायत सरपंच निशा दुग्गा और उपसरपंच चुनेश्वर कुमार जैन को सूचना दी। इसके बाद वन विभाग को पूरे मामले की जानकारी दी गई। सूचना मिलते ही वन विभाग के बीट ऑफिसर चंद्रशेखर तेता मौके पर पहुंचे।

ड्रोन से लिया गया जायजा

वन्यप्राणी विशेषज्ञ चेतन पवार को भी घटनास्थल पर बुलाया गया। टीम ने सबसे पहले ड्रोन की मदद से गड्ढे और आसपास के क्षेत्र की स्थिति का जायजा लिया। इसके बाद मादा भालू और शावकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए रेस्क्यू की रणनीति तैयार की गई।

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सीढ़ी बनी शावकों के लिए बाहर निकलने का रास्ता

वन विभाग की टीम और ग्रामीणों ने सावधानीपूर्वक गहरे गड्ढे में सीढ़ी उतारी। कोशिश थी कि दोनों शावक खुद सीढ़ी के सहारे बाहर निकल सकें। रेस्क्यू के दौरान टीम ने मादा भालू से सुरक्षित दूरी बनाए रखी, ताकि किसी तरह की अप्रिय स्थिति न बने।

सुरक्षित बाहर आए दोनों शावक

ग्रामीणों की तत्परता और वन विभाग की सूझबूझ से दोनों शावकों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। रेस्क्यू के बाद मादा भालू अपने दोनों बच्चों के साथ जंगल की ओर लौट गई। इस तरह समय रहते सूचना मिलने से शावकों की जान बच गई और मां-बच्चों का प्राकृतिक मिलन भी सुरक्षित तरीके से हो गया।

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वन विभाग ने ग्रामीणों से की अपील

कांकेर वन विभाग ने जंगल और पहाड़ी क्षेत्रों के आसपास रहने वाले ग्रामीणों से विशेष सतर्कता बरतने की अपील की है। विभाग ने कहा है कि सुबह-शाम अकेले जंगल की ओर जाने से बचें। किसी वन्यजीव के दिखाई देने पर उसके करीब न जाएं और न ही उसे छेड़ने या घेरने का प्रयास करें।

बच्चों के आसपास न जाएं

वन विभाग के अनुसार, यदि किसी वन्यजीव के बच्चे दिखाई दें तो उनके पास जाने से बचना बेहद जरूरी है। बच्चों के आसपास मादा वन्यजीव अपने शावकों की सुरक्षा के लिए आक्रामक हो सकती है। ऐसी स्थिति में तत्काल वन विभाग को सूचना देने की अपील की गई है।

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वन विभाग का बयान

कांकेर वन परिक्षेत्र अधिकारी अमितेश परिहार ने बताया कि कोकपुर के ग्रामीणों से भालू के गड्ढे में गिरने की सूचना मिली थी। वन विभाग की टीम तत्काल मौके पर पहुंची और दो भालू शावकों को गड्ढे से सुरक्षित बाहर निकाला गया।

PREM

मै People's Updates रायपुर,छग में CHIEF EDITOR के पद में कार्यरत हूँ।अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत...Read More

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