सोहागपुर में तेंदुआ शावक का अंतिम संस्कार, सड़क हादसे में हुई थी मौत

सोहागपुर। मृत मादा तेंदुआ शावक की उम्र लगभग तीन माह बताई गई है। पोस्टमार्टम विशेषज्ञ वन्यप्राणी चिकित्सकों की मौजूदगी में किया गया, जिसमें मृत्यु के कारणों और दुर्घटना से संबंधित आवश्यक तथ्यों की जांच की गई।
झिरिया-मटकुली मार्ग पर मृत मिला था शावक
2 अक्टूबर को झिरिया–मटकुली मार्ग पर एक मादा तेंदुआ शावक सड़क दुर्घटना में मृत अवस्था में पाया गया था। घटना की सूचना मिलने के बाद सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के वन अमले द्वारा मौके पर पहुंचकर आवश्यक कार्रवाई की गई। मृत वन्यप्राणी को सुरक्षित अभिरक्षा में लेकर प्रारंभिक कार्रवाई के बाद पोस्टमार्टम के लिए सुरक्षित रखा गया था।
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एनटीसीए के दिशा-निर्देशों के तहत पोस्टमार्टम
शनिवार को एनटीसीए के निर्धारित दिशा-निर्देशों के तहत विशेषज्ञ वन्यप्राणी चिकित्सकों की मौजूदगी में पोस्टमार्टम की कार्रवाई की गई। पोस्टमार्टम के दौरान वन्यप्राणी की मृत्यु के कारणों और दुर्घटना से संबंधित आवश्यक तथ्यों की जांच की गई। इसके बाद निर्धारित प्रक्रिया का पालन करते हुए मृत तेंदुआ शावक का शवदाह किया गया।
अधिकारियों और वन्यप्राणी डॉक्टर रहे मौजूद
पूरी कार्रवाई में सतपुड़ा टाइगर रिजर्व की फील्ड डायरेक्टर राखी नंदा, डिप्टी डायरेक्टर ऋषिभा नेताम, वन्यप्राणी चिकित्सक डॉ. गुरुदत्त शर्मा, डॉ. प्रशांत देशमुख (डब्ल्यूसीटी) और डॉ. हमजा नदीम (डब्ल्यूसीटी) सहित संबंधित अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों की मौजूदगी में पोस्टमार्टम और शवदाह की प्रक्रिया पूरी की गई। कार्रवाई के दौरान निर्धारित कानूनी और तकनीकी प्रक्रिया का पालन किया गया।
नायब तहसीलदार सहित अन्य अधिकारी रहे मौजूद
इसके अलावा नीरज सिंह बैस, नायब तहसीलदार पिपरिया, आशीष खोबरागड़े, सहायक संचालक पिपरिया, मटकुली परिक्षेत्र अधिकारी, सतीश साहू, एनटीसीए प्रतिनिधि, ग्राम पंचायत समनापुर के सरपंच कामरान सिंह और वन विभाग, संबंधित अन्य स्टाफ मौजूद रहा। सभी की मौजूदगी में पोस्टमार्टम और शवदाह किया गया। वन्यप्राणी के शव का परीक्षण, आवश्यक नमूनों एवं साक्ष्यों की प्रक्रिया भी पूरी की गई।
वन्यप्राणी क्षेत्र में वाहन चालकों से सावधानी की अपील
वन्यप्राणी की मृत्यु के मामले में विभाग द्वारा निर्धारित कानूनी और तकनीकी प्रक्रिया का पालन किया गया। सतपुड़ा टाइगर रिजर्व क्षेत्र वन्यप्राणियों के लिए महत्वपूर्ण आवास क्षेत्र है और इसके आसपास के मार्गों पर वन्यप्राणियों की आवाजाही भी होती रहती है। ऐसे में सड़क मार्गों पर वाहन चालकों से सावधानी बरतने की आवश्यकता रहती है, ताकि वन्यप्राणियों की आवाजाही वाले क्षेत्रों में दुर्घटनाओं की संभावना को कम किया जा सके।




















