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जमानी में सजा हरिशंकर परसाई स्मृति समारोह, साहित्य, रंगमंच और कला का हुआ संगम

हरिशंकर परसाई की जन्मभूमि जमानी में गांधी जयंती पर स्मृति समारोह-2026 आयोजित हुआ। ‘परसाई की संसद’, एकल नाट्य, कार्टून प्रदर्शनी और परसाई सम्मान समारोह के प्रमुख आकर्षण रहे।
जमानी में सजा हरिशंकर परसाई स्मृति समारोह

जमानी। हिंदी साहित्य में निर्भीक और धारदार व्यंग्य को नई पहचान देने वाले महान व्यंग्यकार हरिशंकर परसाई की जन्मभूमि ग्राम जमानी में गांधी जयंती और विश्व अहिंसा दिवस के अवसर पर हरिशंकर परसाई स्मृति समारोह-2026 का आयोजन किया गया। गांव की चौपाल पर आयोजित यह समारोह साहित्य, रंगमंच, पत्रकारिता और चित्रकला के संगम का मंच बना। आयोजन में परसाई की स्मृतियों को याद करने के साथ उनके विचार, सामाजिक सरोकार और व्यंग्य चेतना को नई पीढ़ी तक पहुंचाने पर जोर दिया गया। समारोह में साहित्य, रंगमंच, पत्रकारिता और कला जगत से जुड़ी कई प्रतिष्ठित हस्तियां शामिल हुईं। वरिष्ठ साहित्यकार, कथाकार और संपादक राजेन्द्र दानी कार्यक्रम के मुख्य वक्ता रहे।

‘परसाई की संसद’ ने जीवंत किया व्यंग्य संसार

समारोह का प्रमुख आकर्षण जबलपुर के प्रसिद्ध ‘विवेचना रंगमंडल’ की ओर से प्रस्तुत नाटक ‘परसाई की संसद’ रहा। परसाई की रचनाओं पर आधारित इस नाट्य प्रस्तुति में सामाजिक विसंगतियों, व्यवस्था पर व्यंग्य और छात्र आंदोलन से जुड़े प्रसंगों को मंच पर प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया।कलाकारों के संवाद, अभिनय और मंच संयोजन ने दर्शकों का ध्यान लंबे समय तक बनाए रखा। प्रस्तुति के जरिए परसाई के व्यंग्य में छिपे सामाजिक सवालों को नए मंचीय रूप में सामने लाया गया।

सोनू पाहुजा ने एकल नाट्य से बांधा दर्शकों को

कार्यक्रम में जबलपुर से निकलकर बॉलीवुड में अपनी आवाज और डबिंग कला के लिए पहचान बनाने वाले सोनू पाहुजा ने एकल नाट्य ‘लेखक एक छोटा सा’ प्रस्तुत किया। इसकी लेखिका अलका अग्रवाल सेजतिया हैं। पाहुजा के अभिनय और प्रस्तुति ने दर्शकों को परसाई के व्यक्तित्व, उनकी रचनात्मक दृष्टि और लेखकीय दुनिया से जोड़ दिया। एकल नाट्य कार्यक्रम समारोह के प्रमुख आकर्षणों में शामिल रहा।

चित्रकार अवधेश बाजपेयी को मिला ‘हरिशंकर परसाई सम्मान’

हरिशंकर परसाई स्मृति समिति और ग्राम पंचायत जमानी के संयुक्त आयोजन में इस वर्ष का प्रतिष्ठित ‘हरिशंकर परसाई सम्मान’ सुप्रसिद्ध चित्रकार अवधेश बाजपेयी को प्रदान किया गया। सम्मान प्राप्त करते हुए बाजपेयी भावुक नजर आए। उन्होंने परसाई के साथ अपने जुड़ाव को याद करते हुए कहा कि उन्होंने परसाई से बहुत कुछ सीखा और उनके जीवन तथा रचनात्मक यात्रा पर परसाई का गहरा प्रभाव रहा है।

गांधी और परसाई को बताया समाज का सजग प्रहरी

कार्यक्रम में निर्मल शुक्ल ने गांधी और हरिशंकर परसाई के व्यक्तित्व एवं विचारों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि दोनों अपने-अपने समय में समाज के सजग प्रहरी रहे और सामाजिक विसंगतियों तथा अन्याय के खिलाफ अपनी-अपनी भूमिका निभाई। उनके मुताबिक गांधी ने अपने तरीके से सामाजिक बदलाव की दिशा में काम किया, वहीं परसाई ने व्यंग्य को माध्यम बनाकर व्यवस्था और समाज की कमजोरियों पर सवाल उठाए।

पलास सुरजन ने जमानी की पहल को सराहा

वरिष्ठ पत्रकार और लेखक पलास सुरजन ने ग्राम पंचायत जमानी की पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि किसी महान लेखक की जन्मभूमि में वर्षों बाद भी उनकी स्मृतियों को जीवंत रखना एक महत्वपूर्ण परंपरा है। उन्होंने यह भी कहा कि देश के दूसरे साहित्यकारों की जन्मभूमियों पर भी इसी तरह की स्मृति परंपराएं विकसित की जानी चाहिए, ताकि नई पीढ़ी अपने साहित्यिक विरासत से जुड़ सके।

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बालेन्दु परसाई की कार्टून प्रदर्शनी बनी आकर्षण

समारोह स्थल पर प्रसिद्ध कार्टूनिस्ट बालेन्दु परसाई ‘बाप’ की कार्टून प्रदर्शनी भी लगाई गई। समकालीन परिस्थितियों और सामाजिक विसंगतियों पर आधारित उनके व्यंग्यात्मक कार्टूनों को दर्शकों ने खूब सराहा। प्रदर्शनी ने परसाई की व्यंग्य परंपरा को चित्रकला के माध्यम से आगे बढ़ाने का संदेश दिया। दर्शकों ने कार्टूनों में उभरते सामाजिक और समसामयिक सवालों को करीब से देखा।

जन्मभूमि के विकास के लिए आर्थिक सहयोग की घोषणा

हरिशंकर परसाई स्मृति समारोह इस बार केवल साहित्यिक आयोजन तक सीमित नहीं रहा। समारोह के दौरान परसाई परिवार और अन्य लोगों ने ग्राम जमानी के विकास के लिए आर्थिक सहयोग की घोषणा भी की। परसाई परिवार की ओर से उनके दामाद डॉ. शक्ति सिंह ने गांव के विकास के लिए एक लाख रुपये देने की घोषणा की। वहीं प्रकाश दुबे ने एक लाख 11 हजार रुपये देने की घोषणा की। इन घोषणाओं से समारोह का जुड़ाव साहित्यिक स्मृतियों के साथ-साथ जन्मभूमि के विकास से भी हुआ। उपस्थित लोगों ने इसे गांव और परसाई की स्मृतियों के प्रति जिम्मेदारी से जोड़कर देखा।

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साहित्य और जन्मभूमि के रिश्ते को मिला नया आयाम

समारोह में मौजूद वक्ताओं और अतिथियों ने कहा कि महान रचनाकारों की विरासत केवल उनकी पुस्तकों में नहीं होती, बल्कि उनकी जन्मभूमि, स्मृतियों और विचारों में भी जीवित रहती है। जमानी में आयोजित यह कार्यक्रम इसी रिश्ते को मजबूत करने वाली पहल के रूप में सामने आया।कार्यक्रम का संचालन संयोजक हेमंत दुबे ने किया, जबकि आभार डॉ. सुभाष दुबे ने व्यक्त किया। मंच पर वरिष्ठ नागरिक अश्वनी दुबे और ग्राम पंचायत जमानी की सरपंच कला कुमरे सहित कई गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। हरिशंकर परसाई स्मृति समारोह-2026 ने साहित्य, रंगमंच और कला को एक मंच पर लाने के साथ यह संदेश भी दिया कि किसी रचनाकार की जन्मभूमि उसकी स्मृति को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। जमानी में आयोजित यह समारोह परसाई के साहित्यिक योगदान और उनकी मिट्टी से जुड़े रिश्ते को फिर से सामने लाने वाला आयोजन बनकर उभरा।

Neelam Tiwari
By Neelam Tiwari

नीलम तिवारी - सोहागपुर के वरिष्ठ पत्रकार, 40 वर्षों से निष्पक्ष, जनसरोकार और ग्रामीण मुद्दों की निर्...Read More

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