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अमेरिकी अय्याश को क्यों भेजा गया मक्का का पवित्र किसवा?नई एपस्टीन फाइल्स में खुलासे से उठे सवाल

नई ‘एपस्टीन फाइल्स’ में खुलासा हुआ कि 2017 में मक्का के काबा का पवित्र किसवा अमेरिका भेजा गया और यह खेप सीधे जेफ्री एपस्टीन के फ्लोरिडा घर तक पहुंची। दस्तावेजों में ईमेल और शिपमेंट का पूरा विवरण है, जिससे धार्मिक और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गंभीर सवाल उठ खड़े हुए हैं।
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नई एपस्टीन फाइल्स में खुलासे से उठे सवाल
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    वॉशिंगटन डीसी। नई ‘एपस्टीन फाइल्स’ ने एक बेहद संवेदनशील और विवादित मामले को उजागर किया है। दस्तावेजों के मुताबिक 2017 में मक्का के काबा का पवित्र किसवा अमेरिका भेजा गया, यह खेप सीधे कुख्यात यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन के फ्लोरिडा स्थित घर तक पहुंची। यह घटना उस समय हुई जब एपस्टीन पहले ही जेल की सजा काट चुका था और एक पंजीकृत सेक्स ऑफेंडर था।

    फाइल्स में शामिल ईमेल और दस्तावेजों से पता चलता है कि, इस शिपमेंट की व्यवस्था यूएई से जुड़ी कारोबारी महिला अजीजी अल-अहमदी और अब्दुल्ला अल-मारी नामक शख्स के बीच हुई थी। इन संपर्कों के जरिए काबा के किसवा से जुड़े तीन अलग-अलग टुकड़ों की शिपमेंट सऊदी अरब से ब्रिटिश एयरवेज के माध्यम से अमेरिका भेजी गई।

    किसवा के तीन टुकड़े और उनका महत्व

    ईमेल्स के अनुसार, तीनों टुकड़े अलग-अलग हिस्सों के थे। पहला टुकड़ा काबा के अंदर इस्तेमाल किया गया। दूसरा बाहरी हिस्से को ढकने के लिए था। तीसरा टुकड़ा इस्तेमाल नहीं हुआ था, जिसे आर्टवर्क बताकर कस्टम्स प्रक्रिया आसान बनाई गई।

    अजीजी अल-अहमदी ने ईमेल में लिखा कि, यह काला कपड़ा करोड़ों मुसलमानों द्वारा छुआ गया है और इस पर उनकी दुआएं, आंसू और उम्मीदें छोड़ी गई हैं। इसे पवित्र माना जाता है और हज के दौरान लाखों तीर्थयात्री इसे छूकर तवाफ करते हैं।

    फाइल्स में एपस्टीन का धार्मिक संपर्क

    ईमेल्स से यह स्पष्ट नहीं होता कि, एपस्टीन और अल-अहमदी की पहचान कैसे हुई और किस आधार पर उसे काबा का किसवा भेजा गया। इसके अलावा एपस्टीन की सहायक लेस्ली ग्रॉफ द्वारा डीएनए टेस्टिंग किट भेजने का जिक्र भी किया गया है, हालांकि इसका उद्देश्य साफ नहीं है।

    मार्च 2017 में शिपमेंट एपस्टीन के फ्लोरिडा स्थित घर तक पहुंची। इस दौरान एपस्टीन जेल से बाहर था और यौन अपराधियों की सूची में शामिल था। एपस्टीन की सहायक और संपर्क में रहने वाली अल-अहमदी ने मजाकिया अंदाज में नया टेंट कारपेट भेजने की भी बात कही।

    खुफिया एजेंसियों के संपर्क में था एपस्टीन

    नई फाइल्स में यह दावा भी किया गया है कि, एपस्टीन अमेरिकी और इजरायली खुफिया एजेंसियों के संपर्क में था। वह इजरायल के पूर्व प्रधानमंत्री एहुद बराक के करीब माना जाता था। यह खुलासा एपस्टीन केस के अलावा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।

    एफबीआई मेमो में उल्लेख है कि, एपस्टीन की गतिविधियों और शिपमेंट के पीछे सरकारी और खुफिया एजेंसी का हाथ होने की संभावना पर भी संदेह जताया गया।

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    काबा और किसवा का धार्मिक महत्व

    काबा इस्लाम का सबसे पवित्र स्थल है। इसे ‘अल्लाह का घर’ कहा जाता है। मुसलमान नमाज के दौरान इसी की दिशा (किबला) की ओर मुख करते हैं। हज के दौरान तीर्थयात्री माउंट अराफात जाकर तवाफ करते हैं और किसवा को छूते हैं।

    किसवा काला रेशमी कपड़ा है, जिस पर सोने या चांदी के धागों से कुरान की आयतें कढ़ी जाती हैं। काला रंग शांति का प्रतीक है, जबकि सोने का काम अल्लाह की शान और शौकत को दिखाता है। हर साल हिजरी कैलेंडर के धु-अल-हिज्जाह महीने की 9 तारीख को नया किसवा चढ़ाया जाता है। पुराना किसवा टुकड़ों में बांटा जाता है और इसे खास लोगों या संस्थानों को दिया जाता है।

    एपस्टीन का अतीत और यौन अपराध

    जेफ्री एपस्टीन न्यूयॉर्क का करोड़पति फाइनेंसर था। 2005 में फ्लोरिडा में पहली बार नाबालिग लड़की के यौन उत्पीड़न की शिकायत दर्ज हुई। जांच में सामने आया कि, वह लड़कियों को ‘मसाज’ के बहाने अपने आलीशान घर बुलाता और फिर यौन उत्पीड़न करता था।

    इसके बाद करीब 50 नाबालिग लड़कियों ने इसके खिलाफ शिकायत की। पाम बीच पुलिस ने गंभीरता से मामले की जांच की। एपस्टीन के पास मैनहट्टन और पाम बीच में विला था, जहां वह हाई-प्रोफाइल पार्टियां आयोजित करता और छोटी उम्र की लड़कियों को ‘लोलिता एक्सप्रेस’ जेट से लाता था।

    उसकी पार्टनर गिस्लीन मैक्सवेल भी इन गतिविधियों में शामिल रही। एपस्टीन को 2008 में 13 महीने की जेल हुई और 2019 में सेक्स ट्रैफिकिंग के आरोप में गिरफ्तार किया गया, लेकिन मुकदमे से पहले जेल में उसकी मौत हो गई। मैक्सवेल को 2021 में दोषी करार दिया गया और 20 साल की सजा सुनाई गई।

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    Manisha Dhanwani
    By Manisha Dhanwani

    मनीषा धनवानी | जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी से BJMC | 6 वर्षों के पत्रकारिता अनुभव में सब-एडिटर, एंकर, ...Read More

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