Naresh Bhagoria
2 Feb 2026
बाबा महाकाल की नगरी इस वर्ष 6 फरवरी से 15 फरवरी तक महाशिवरात्रि महापर्व की भव्य तैयारियों में रंग-बिरंगी हो जाएगी। यह पर्व 10 दिनों तक चलेगा और हर दिन भगवान महाकाल के अलग-अलग दिव्य रूपों की पूजा की जाएगी। पहले दिन से ही भक्तों के लिए मंदिर खोले रहेंगे और जलधारी, स्नान, वस्त्र धारण और रुद्राभिषेक जैसे अनुष्ठान होंगे।
पहले दिन बाबा महाकाल का दुशाला पहनाकर श्रृंगार किया जाएगा। दूसरे दिन उन्हें शेषनाग श्रृंगार पहनाया जाएगा। तीसरे दिन घटाघटा स्थापित होगा, जो शिवलिंग के समान होता है। चौथे दिन प्रभु का छवि दर्शन होगा। पांचवें दिन बाबा महाकाल को मन-महेश, उमा-महेश, शिव तांडव और होलकर रूप में सजाया जाएगा।
महाशिवरात्रि के दिन 15 फरवरी को खास पूजा और अनुष्ठान होंगे। चारों पहर की पूजा और आरती होगी। रात में बाबा महाकाल का स्नान कराकर उन्हें दूल्हे के रूप में श्रृंगारित किया जाएगा। इस अवसर पर भक्तों के लिए मंदिर परिसर में नौ दिन तक भजन, कीर्तन और आरती का आयोजन रहेगा।
मंदिर प्रशासन ने महापर्व से पहले व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं। इसमें मुख्य शिखर की सफाई, मंदिर परिसर का रंग-रोगन, कोटि तीर्थ कुंड की सफाई और स्वच्छता अभियान शामिल हैं। अधिकारियों का कहना है कि ये कदम श्रद्धालुओं की सुविधा और भीड़ नियंत्रण के लिए हैं।
महापर्व 2026 का उद्घाटन 6 फरवरी को कोटि तीर्थ में श्री कोटेश्वर महादेव की पूजा और भांग-चंदन श्रृंगार के साथ होगा। इसके बाद हर दिन अलग श्रृंगार और अनुष्ठान होंगे:
15 फरवरी को महाशिवरात्रि के दिन भगवान महाकाल की निराकार अवस्था में पूजा होगी और शिवलिंग पर लगातार जल चढ़ाया जाएगा। भक्तों को लगभग 44 घंटे तक दर्शन करने का अवसर मिलेगा।
मंदिर प्रशासन ने बताया कि महापर्व के दौरान श्रद्धालुओं की संख्या काफी बढ़ सकती है। इस वजह से स्थानीय प्रशासन और पुलिस के साथ मिलकर सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन की विशेष व्यवस्था की जा रही है। सभी भक्त सुरक्षित, स्वच्छ और आध्यात्मिक अनुभव के साथ महापर्व में शामिल हो सकेंगे।
10 दिनों तक चलने वाले इस उत्सव में भक्तों के लिए हर दिन नए अनुष्ठान, भजन-कीर्तन और विशेष श्रृंगार की झलक देखने को मिलेगी, जिससे महाकाल मंदिर की केंद्रीय भूमिका और भी मजबूत होगी। बाबा महाकाल का दूल्हा श्रृंगार भक्तों के लिए विशेष आकर्षण होगा।