Manisha Dhanwani
31 Jan 2026
वॉशिंगटन डीसी। दुनिया की बदलती राजनीति और ऊर्जा बाजार के उतार-चढ़ाव के बीच भारत के कच्चे तेल आयात को लेकर बड़ा संकेत मिला है। अमेरिका ने भारत से कहा है कि, वह जल्द ही वेनेजुएला से कच्चा तेल खरीदना दोबारा शुरू कर सकता है। इसे रूस से आने वाले तेल के विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है। यह प्रस्ताव ऐसे वक्त आया है, जब भारत रूसी तेल के आयात में लगातार कटौती करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है और अमेरिकी टैरिफ का दबाव भी बढ़ चुका है।
तेल अब सिर्फ ईंधन नहीं रहा, बल्कि यह कूटनीति, रणनीति और वैश्विक संतुलन का अहम हथियार बन चुका है। भारत के सामने अब सवाल यह है कि वह ऊर्जा सुरक्षा, सस्ते आयात और अंतरराष्ट्रीय दबावों के बीच किस तरह संतुलन साधे।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ने भारत को संकेत दिया है कि वह वेनेजुएला से कच्चा तेल फिर से खरीद सकता है। यह सप्लाई रूस से घटती आपूर्ति की भरपाई के लिए एक विकल्प के रूप में पेश की जा रही है। जानकारी के अनुसार, भारत आने वाले महीनों में रूस से प्रतिदिन कई लाख बैरल कच्चे तेल की खरीद कम करने की योजना बना रहा है। अमेरिका चाहता है कि, रूसी तेल से होने वाली कमाई को सीमित किया जाए, क्योंकि इसी आय से यूक्रेन युद्ध को फंडिंग मिल रही है।
2022 में यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद पश्चिमी देशों ने रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाए थे। इसके चलते रूस ने अपना तेल भारी छूट पर बेचना शुरू किया और भारत उसके सबसे बड़े खरीदारों में शामिल हो गया। लेकिन समय के साथ हालात बदलने लगे। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूसी तेल से जुड़े आयात पर अतिरिक्त टैरिफ लगा दिए। भारतीय उत्पादों पर भी शुल्क बढ़ाया गया। रूसी तेल खरीद से जुड़े 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ जोड़ने के बाद कुल टैरिफ 50 प्रतिशत तक पहुंच गए। इस बढ़ते दबाव के बीच भारत ने संकेत दिए कि वह रूस पर अत्यधिक निर्भरता कम करेगा।
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मार्च 2025 में अमेरिका ने वेनेजुएला से तेल खरीदने वाले देशों पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया था। भारत भी उन देशों में शामिल था। उसी दौरान अमेरिकी प्रशासन ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के खिलाफ सख्त रुख अपनाया था।
3 जनवरी को अमेरिकी सेना द्वारा मादुरो की गिरफ्तारी के बाद वॉशिंगटन का रुख और सख्त हो गया था, लेकिन अब हालात बदलते नजर आ रहे हैं। अमेरिका संकेत दे रहा है कि, रूस से तेल आयात कम करने वाले देशों को वेनेजुएला से सप्लाई की छूट दी जा सकती है।
फिलहाल यह साफ नहीं है कि, भारत को वेनेजुएला का तेल किस माध्यम से मिलेगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह तेल निजी ट्रेडिंग कंपनियों जैसे विटोल या ट्राफिगुरा के जरिए भी आ सकता है या फिर सीधे वेनेजुएला की सरकारी तेल कंपनी पीडीवीएसए द्वारा बेचा जा सकता है। इस पर अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन बातचीत के संकेत मिल चुके हैं।
भारत सरकार पहले ही साफ कर चुकी है कि वह कच्चे तेल के स्रोतों में विविधता लाने पर काम कर रही है। तेल मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने हाल ही में कहा था कि भारत किसी एक देश पर निर्भर नहीं रहना चाहता। हालांकि, उन्होंने सीधे तौर पर वेनेजुएला का नाम नहीं लिया, लेकिन यह जरूर कहा कि भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए नए विकल्प तलाश रहा है। वर्तमान में भारत अपनी तेल जरूरतों के लिए मिडिल ईस्ट, अफ्रीका, अमेरिका और दक्षिण अमेरिका पर भी ध्यान बढ़ा रहा है।
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मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत जल्द ही रूसी तेल आयात को 10 लाख बैरल प्रतिदिन से नीचे ला सकता है।
जनवरी में आयात: लगभग 12 लाख बैरल प्रतिदिन
फरवरी अनुमान: करीब 10 लाख बैरल
मार्च अनुमान: लगभग 8 लाख बैरल
एक अन्य सूत्र का कहना है कि आगे चलकर यह मात्रा 5 से 6 लाख बैरल प्रतिदिन तक भी गिर सकती है।
व्यापार से जुड़े आंकड़े बताते हैं कि, दिसंबर में भारत का रूसी तेल आयात पिछले दो साल के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। इसका सीधा असर यह हुआ कि ओपेक देशों से तेल आयात बढ़ गया। भारतीय रिफाइनरियों ने मिडिल ईस्ट, अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका से तेल की खरीद तेज कर दी है ताकि सप्लाई में किसी तरह की कमी न आए।
विशेषज्ञों का मानना है कि, रूस पर निर्भरता घटाने से भारत और अमेरिका के बीच व्यापक व्यापार समझौते की राह आसान हो सकती है। ऊर्जा सहयोग इस रिश्ते का अहम हिस्सा बनता जा रहा है। अगर भारत वेनेजुएला से तेल खरीद शुरू करता है, तो यह सिर्फ एक कारोबारी फैसला नहीं होगा, बल्कि वैश्विक कूटनीति में भारत की संतुलनकारी भूमिका को भी दिखाएगा।
आज के दौर में कच्चा तेल केवल ऊर्जा का स्रोत नहीं रहा। यह विदेश नीति, वैश्विक दबाव और रणनीतिक साझेदारी का अहम हिस्सा बन चुका है। भारत के सामने चुनौती यह है कि वह सस्ते तेल, ऊर्जा सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय संबंधों के बीच संतुलन बनाए रखे। वेनेजुएला से तेल खरीदने का प्रस्ताव इसी संतुलन की एक नई कड़ी माना जा रहा है।
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