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ये ‘जेलवाणी’है...सतना सेंट्रल जेल में 'रेडियो जॉकी' बने कैदी, सलाखों के बीच गूंजती है उम्मीद की आवाज

जेल में वैसे तो कैदियों को आचरण सुधार एवं जीविकोपार्जन के लिए विविध कार्यक्रम चलाए जाते हैं, लेकिन सतना जेल में एक नया प्रयोग किया गया है। यहां जेल प्रबंधन ने 'जेलवाणी' के तहत बंदियों को रेडियो 
सतना सेंट्रल जेल में 'रेडियो जॉकी' बने कैदी, सलाखों के बीच गूंजती है उम्मीद की आवाज
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    जयदेव विश्वकर्मा, सतना। सतना सेंट्रल जेल की ऊंची दीवारों के भीतर अब सिर्फ सन्नाटा या आदेशों की आवाज नहीं गूंजती, बल्कि भजन, गीत और सकारात्मक संदेश भी सुनाई देते हैं। जेल प्रबंधन की अनूठी पहल ‘जेलवाणी’ ने बंदियों के जीवन में उम्मीद और बदलाव की नई तरंग पैदा की है। यह कोई आम रेडियो नहीं, बल्कि कैदियों द्वारा, कैदियों के लिए संचालित ऐसा मंच है, जो मनोरंजन के साथ सुधार और पुनर्वास का माध्यम बन रहा है। हर सुबह जेल परिसर में दिन की शुरुआत जेलवाणी से होती है।

    भजन-कीर्तन और प्रेरक गीतों से पॉजिटिव माहौल

    सुबह 7 से 8.30 बजे तक एक कैदी ‘रेडियो जॉकी’ बनकर भजन-कीर्तन और प्रेरक गीतों के जरिए माहौल को सकारात्मक बनाता है। दोपहर 12.30 बजे दूसरा कैदी जिम्मेदारी संभालता है। जेल के प्रत्येक बैरक में स्पीकर लगाए गए हैं, जिससे जेल में होने वाला हर कार्यक्रम, संदेश और सूचना सीधे बंदियों तक पहुंचती है। 

    3 कैदी निभाते हैं जिम्मेदारी

    जेल प्रशासन के अनुसार, तीन ऐसे कैदी हैं, जिन्हें अध्यात्म का अच्छा ज्ञान है।  जेलवाणी के माध्यम से न सिर्फ मनोरंजन होता है, बल्कि बंदियों को शिक्षा, रचनात्मक गतिविधियों और जेल के अंदर चल रहे कार्यक्रमों से भी जोड़ा जा रहा है। 

    बंदियों में सकारात्मक सोच विकसित कर रहे

    सतना में जेलवाणी की शुरुआत 2016 से हुई। इसका उद्देश्य बंदियों में सकारात्मक सोच विकसित करना और व्यवहार में सुधार लाना है।

    सोनवीर सिंह कुशवाह, उप जेल अधीक्षक, सतना 

    Naresh Bhagoria
    By Naresh Bhagoria

    नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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