Naresh Bhagoria
2 Feb 2026
जयदेव विश्वकर्मा, सतना। सतना सेंट्रल जेल की ऊंची दीवारों के भीतर अब सिर्फ सन्नाटा या आदेशों की आवाज नहीं गूंजती, बल्कि भजन, गीत और सकारात्मक संदेश भी सुनाई देते हैं। जेल प्रबंधन की अनूठी पहल ‘जेलवाणी’ ने बंदियों के जीवन में उम्मीद और बदलाव की नई तरंग पैदा की है। यह कोई आम रेडियो नहीं, बल्कि कैदियों द्वारा, कैदियों के लिए संचालित ऐसा मंच है, जो मनोरंजन के साथ सुधार और पुनर्वास का माध्यम बन रहा है। हर सुबह जेल परिसर में दिन की शुरुआत जेलवाणी से होती है।
सुबह 7 से 8.30 बजे तक एक कैदी ‘रेडियो जॉकी’ बनकर भजन-कीर्तन और प्रेरक गीतों के जरिए माहौल को सकारात्मक बनाता है। दोपहर 12.30 बजे दूसरा कैदी जिम्मेदारी संभालता है। जेल के प्रत्येक बैरक में स्पीकर लगाए गए हैं, जिससे जेल में होने वाला हर कार्यक्रम, संदेश और सूचना सीधे बंदियों तक पहुंचती है।
जेल प्रशासन के अनुसार, तीन ऐसे कैदी हैं, जिन्हें अध्यात्म का अच्छा ज्ञान है। जेलवाणी के माध्यम से न सिर्फ मनोरंजन होता है, बल्कि बंदियों को शिक्षा, रचनात्मक गतिविधियों और जेल के अंदर चल रहे कार्यक्रमों से भी जोड़ा जा रहा है।
सतना में जेलवाणी की शुरुआत 2016 से हुई। इसका उद्देश्य बंदियों में सकारात्मक सोच विकसित करना और व्यवहार में सुधार लाना है।
सोनवीर सिंह कुशवाह, उप जेल अधीक्षक, सतना