जंतर-मंतर प्रदर्शन में महिला शिकायतों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त! यौन उत्पीड़न के आरोपों की जांच होगी पहले

नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर हुए छात्र प्रदर्शन के दौरान महिला प्रदर्शनकारियों के साथ बदसलूकी का मामला अब सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत कहा कि महिला प्रदर्शनकारियों की ओर से लगाए गए यौन उत्पीड़न, छेड़छाड़ और हिंसा के आरोपों को जांच में प्राथमिकता दी जाएगी। अदालत ने इस मामले की पड़ताल के लिए पहले ही पांच सदस्यीय हाई-पावर्ड कमेटी बनाई है। कमेटी को पुलिस और प्रदर्शनकारियों, दोनों पक्षों से जुड़े आरोपों की जांच करनी है। अब महिला प्रदर्शनकारियों की शिकायतों पर जल्द कार्रवाई और अंतरिम रिपोर्ट देने पर खास जोर रहेगा।
20 जुलाई के प्रदर्शन से शुरू हुआ विवाद
यह मामला 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर हुए छात्र प्रदर्शन से जुड़ा है। वरिष्ठ वकील शोभा गुप्ता ने सुप्रीम कोर्ट में महिला प्रदर्शनकारियों की शिकायतों का मुद्दा उठाया। उन्होंने बताया कि कुछ महिलाओं ने पुलिसकर्मियों पर कथित छेड़छाड़ और यौन उत्पीड़न जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना था कि इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए अदालत को खुद मामले पर ध्यान देना चाहिए।
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सुप्रीम कोर्ट ने जांच को लेकर दिया बड़ा निर्देश
सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने बताया कि इसी विषय पर एक अलग याचिका पहले से अदालत में मौजूद है। इस मामले की जांच के लिए हाई-पावर्ड कमेटी को जिम्मेदारी दी गई है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि 18 अगस्त के आदेश में महिला प्रदर्शनकारियों से जुड़ी शिकायतों को भी जांच के दायरे में रखा गया है। अदालत ने इन मामलों को प्राथमिकता के साथ देखने को कहा है।
महिला शिकायतों पर सबसे पहले होगी कार्रवाई
कमेटी को महिला प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसा, छेड़छाड़ और उत्पीड़न की शिकायतों पर पहले ध्यान देना होगा। इसके अलावा पुलिस की ओर से कथित तौर पर जरूरत से ज्यादा बल इस्तेमाल किए जाने के आरोपों की भी जांच होगी। अदालत ने कमेटी को इन मामलों में जल्द अंतरिम रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है, ताकि शिकायतों पर आगे की कार्रवाई का रास्ता साफ हो सके।
पांच सदस्यीय कमेटी करेगी पूरे मामले की जांच
सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व जज जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय कमेटी बनाई है। यह कमेटी प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों की ओर से लगाए गए आरोपों की पड़ताल करेगी। इसका मकसद पूरे घटनाक्रम को अलग अलग पक्षों के बयान और उपलब्ध जानकारी के आधार पर समझना है। महिला प्रदर्शनकारियों की शिकायतें भी इसी जांच का अहम हिस्सा रहेंगी।
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शिकायत दर्ज कराने का तरीका भी होगा तय
सुनवाई के दौरान यह सवाल भी उठा कि जिन महिलाओं ने शिकायत की है, वे कमेटी तक अपनी बात कैसे पहुंचाएंगी। इस पर चीफ जस्टिस ने बताया कि कमेटी के अध्यक्ष नोडल अधिकारियों की नियुक्ति कर सकते हैं। इन अधिकारियों के जरिए शिकायतें लेने की व्यवस्था तैयार की जाएगी। नोडल अधिकारियों की नियुक्ति के बाद शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया की जानकारी सार्वजनिक की जाएगी।




















