साइबर अपराध से आतंकवाद तक, सुरक्षा चुनौतियों पर आज से बैठक! अमित शाह करेंगे नेतृत्व

नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सोमवार और मंगलवार को होने वाले राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति सम्मेलन में शामिल होंगे। यह बैठक ऐसे समय हो रही है जब सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियां लगातार बदल रही हैं और अपराधी नई तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं। सम्मेलन में केंद्र और राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी एक साथ बैठकर मौजूदा हालात की समीक्षा करेंगे। बैठक का आयोजन हाइब्रिड तरीके से किया जाएगा, जिसमें अधिकारी प्रत्यक्ष और ऑनलाइन दोनों माध्यमों से जुड़ेंगे। देशभर के अलग-अलग सुरक्षा बलों और पुलिस संगठनों के 850 से ज्यादा अधिकारी इसमें हिस्सा लेंगे। जमीनी अनुभवों के आधार पर सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने पर भी चर्चा होगी।
आतंकवाद पर रहेगा सबसे ज्यादा फोकस
दो दिवसीय सम्मेलन में आतंकवाद एक प्रमुख मुद्दा रहेगा। सुरक्षा एजेंसियां आतंकवादी गतिविधियों से निपटने के अपने अनुभव साझा करेंगी और भविष्य के खतरों से निपटने की तैयारी पर बात करेंगी। बदलते तरीकों और नई तकनीक के इस्तेमाल को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने पर भी जोर रहेगा। इसके साथ ही साइबर अपराध और ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी के बढ़ते मामलों पर चर्चा होगी। डिजिटल माध्यमों के जरिए होने वाले अपराधों को रोकने के लिए एजेंसियों के बीच बेहतर सूचना साझा करने की जरूरत पर विचार किया जाएगा।
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एन्क्रिप्टेड ऐप्स और साइबर अपराध भी एजेंडे में
सुरक्षा के क्षेत्र में तकनीक की भूमिका लगातार बढ़ रही है। इसी वजह से एन्क्रिप्टेड कम्युनिकेशन ऐप्स से पैदा होने वाली चुनौतियां भी सम्मेलन के एजेंडे में शामिल हैं। ऐसे प्लेटफॉर्म का गलत इस्तेमाल रोकने और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने के तरीकों पर अधिकारी चर्चा करेंगे। वित्तीय धोखाधड़ी से जुड़े मामलों में तेजी से बदल रहे तौर-तरीकों को समझना भी बैठक का अहम हिस्सा होगा। अधिकारियों के अनुभवों के जरिए इन चुनौतियों से निपटने के बेहतर उपाय तलाशे जाएंगे।
घुसपैठ और अवैध आव्रजन पर भी चर्चा
देश की सुरक्षा से जुड़े दूसरे महत्वपूर्ण मुद्दों में घुसपैठ और अवैध आव्रजन भी शामिल हैं। सम्मेलन में इनसे जुड़ी चुनौतियों पर चर्चा के साथ निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के उपायों पर विचार किया जाएगा। मादक पदार्थों की तस्करी को रोकना भी एजेंडे में रहेगा। तस्करी के नेटवर्क पर कार्रवाई के लिए केंद्रीय एजेंसियों और राज्य पुलिस के बीच तालमेल बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा।
विमानन और बंदरगाह सुरक्षा पर भी मंथन
सम्मेलन में विमानन और बंदरगाहों की सुरक्षा पर भी चर्चा होगी। देश के महत्वपूर्ण परिवहन केंद्रों को सुरक्षित रखने और संभावित खतरों से निपटने की तैयारियों की समीक्षा की जाएगी। इसके अलावा आतंकवादी गतिविधियों और तस्करी से जुड़े भगोड़ों को देश वापस लाने के लिए केंद्रीय और राज्य एजेंसियों के बीच सहयोग बढ़ाने के तरीकों पर भी विचार किया जाएगा।
850 से ज्यादा अधिकारी होंगे शामिल
राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति सम्मेलन का आयोजन हाइब्रिड मोड में किया जा रहा है। इसमें विभिन्न सुरक्षा बलों, केंद्रीय एजेंसियों और राज्य पुलिस के 850 से ज्यादा अधिकारी शामिल होंगे। कुछ अधिकारी दिल्ली में मौजूद रहेंगे, जबकि अन्य ऑनलाइन माध्यम से बैठक में हिस्सा लेंगे। सम्मेलन में जमीनी स्तर पर काम करने वाले अधिकारियों के अनुभव और विशेषज्ञों की राय को भी महत्व दिया जाएगा। इसका मकसद सुरक्षा तंत्र को मौजूदा और आने वाली चुनौतियों के लिए तैयार करना है।
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2016 से हर साल हो रहा सम्मेलन
राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति सम्मेलन की शुरुआत हर साल सुरक्षा चुनौतियों पर चर्चा के उद्देश्य से की गई थी। 2016 में DGP और IGP सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस तरह की बैठक आयोजित करने पर जोर दिया था। इसके पीछे उद्देश्य सुरक्षा से जुड़े अधिकारियों और विशेषज्ञों के अनुभव को एक मंच पर लाना था।




















