Aakash Waghmare
20 Jan 2026
तेहरान। मध्य-पूर्व में युद्ध का माहौल और अधिक गंभीर हो गया है। ताजा रिपोर्ट्स के अनुसार, इजराइल ने ईरान के फोर्डो न्यूक्लियर प्लांट पर बड़ा हवाई हमला किया है। यह वही स्थान है जहां एक दिन पहले अमेरिका ने अत्याधुनिक GBU-57 बंकर बस्टर बम से हमला किया था। इजराइल के हमले में उस क्षेत्र को दोबारा टारगेट किया गया जहां अमेरिकी बी-2 बॉम्बर्स द्वारा 13,000 किलो वजनी बम गिराया गया था। माना जा रहा है कि इस हमले से ईरान के परमाणु कार्यक्रम को गंभीर नुकसान पहुंचा है।
IAEA प्रमुख राफेल ग्रॉसी ने कहा है कि इस क्षेत्र में इतने उच्च क्षमता वाले विस्फोटकों के इस्तेमाल से संवेदनशील परमाणु सेंट्रीफ्यूज को स्थायी क्षति पहुंचने की आशंका है। अभी तक इस भूमिगत क्षति का पूरा आकलन संभव नहीं हो पाया है।
इजराइली सेना के अनुसार, सोमवार सुबह ईरान की तरफ से इजराइल पर भारी मिसाइल हमले किए गए। मिसाइल हमलों के बाद जॉर्डन और मध्य इजराइल में रेड अलर्ट जारी कर सायरन बजाए गए। इसके जवाब में इजराइल ने ईरान की राजधानी तेहरान समेत अन्य शहरों में बमबारी की, जिसमें फोर्डो के अलावा कई अन्य प्रमुख ठिकाने भी शामिल थे।
तेहरान स्थित इविन जेल जो कि कुख्यात राजनीतिक कैदियों की जेल मानी जाती है, उसे भी इजराइल ने टारगेट किया। इजराइली आर्मी रेडियो ने पुष्टि की है कि IDF ने इस जेल के मुख्य प्रवेश द्वार को निशाना बनाकर हमला किया। सूत्रों के अनुसार, इस हमले का उद्देश्य जेल में बंद राजनीतिक कैदियों को भागने का अवसर देना था, जिससे ईरान की आंतरिक व्यवस्था कमजोर हो सके। यह हमला सीधे तौर पर ईरान की सत्ता संरचना को चुनौती देने जैसा है।
ईरान की स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इजराइली फाइटर जेट्स ने तेहरान के ऊर्जा मंत्रालय की इमारत को भी निशाना बनाया है। इस हमले का उद्देश्य ईरान की बिजली और इंफ्रास्ट्रक्चर क्षमताओं को बाधित करना माना जा रहा है।
ईरानी सेना के संयुक्त प्रमुख जनरल अब्दुलरहीम मौसवी ने अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा है कि इन हमलों ने ईरान को अमेरिकी सेना और उसके हितों के खिलाफ कार्रवाई की खुली छूट दे दी है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी हमले ईरान की संप्रभुता का उल्लंघन हैं और इसका जवाब दिया जाएगा। जनरल मौसवी ने यह भी स्पष्ट किया कि अब ईरान संकोच नहीं करेगा, चाहे लक्ष्य इजराइल हो या अमेरिका।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में हुई बैठक में अमेरिका की एयरस्ट्राइक का ब्रिटेन और इजराइल ने समर्थन किया है। दोनों देशों ने कहा कि ईरान परमाणु हथियार नहीं रख सकता। वहीं दूसरी ओर, रूस, चीन और पाकिस्तान ने अमेरिका के हमले की कड़ी निंदा की है और इसे क्षेत्रीय शांति के लिए खतरनाक कदम बताया।