तेहरान। मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के बीच ईरान को एक और बड़ा झटका लगा है। इजरायल के ताजा हवाई हमले में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के प्रमुख प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल अली मोहम्मद नैनी की मौत हो गई है। ईरानी अधिकारियों ने इस घटना की पुष्टि करते हुए कहा कि, यह हमला अमेरिका और इजरायल के संयुक्त सैन्य अभियान के दौरान हुआ।
ईरान की सरकारी और सेमी-ऑफिशियल मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह हमला तड़के सुबह किया गया, जिसमें नैनी मारे गए। उनकी मौत को ईरान के सैन्य ढांचे के लिए बड़ा नुकसान माना जा रहा है, क्योंकि वे IRGC के जनसंपर्क और मनोवैज्ञानिक युद्ध रणनीति के प्रमुख चेहरों में से एक थे।
ब्रिगेडियर जनरल अली मोहम्मद नैनी ईरान की शक्तिशाली सैन्य इकाई इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के आधिकारिक प्रवक्ता थे। इसके साथ ही वे संगठन के जनसंपर्क विभाग के उप-प्रमुख भी थे। उन्हें जुलाई 2024 में IRGC के कमांडर-इन-चीफ हुसैन सलामी द्वारा इस पद पर नियुक्त किया गया था। इसके बाद से वह अक्सर मीडिया और प्रेस कॉन्फ्रेंस में ईरान की सैन्य क्षमताओं और रणनीति को लेकर बयान देते नजर आते थे।
नैनी के जिम्मे IRGC की ओर से जारी होने वाले सभी आधिकारिक बयान, प्रेस रिलीज और रणनीतिक संदेशों की निगरानी रहती थी। माना जाता था कि, संगठन की ओर से जारी होने वाला कोई भी महत्वपूर्ण बयान उनकी मंजूरी के बिना जारी नहीं होता था।
यह भी पढ़ें: Iran-Israel War : मिडिल ईस्ट तनाव की रुपया पर बुरी मार, आज 64 पैसे टूटकर 93 के निचले स्तर पर पहुंचा
अली मोहम्मद नैनी का जन्म 1957 में ईरान में हुआ था। वे ईरान-इराक युद्ध के अनुभवी सैनिकों में शामिल थे और उस युद्ध के दौरान गंभीर रूप से घायल भी हुए थे। युद्ध के बाद उन्होंने सैन्य और रणनीतिक संचार के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। धीरे-धीरे वे IRGC की मीडिया और प्रचार रणनीति के प्रमुख चेहरों में शामिल हो गए। ईरान की सैन्य ताकत और मिसाइल कार्यक्रम को लेकर वैश्विक स्तर पर संदेश देने में उनकी अहम भूमिका थी।
मौत से कुछ दिन पहले ही अली मोहम्मद नैनी ने एक इंटरव्यू में दावा किया था कि, ईरान कम से कम छह महीने तक हाई-इंटेंसिटी युद्ध लड़ने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा था कि, ईरान के पास अभी भी कई नई पीढ़ी की मिसाइलें और ड्रोन मौजूद हैं, जिनका इस्तेमाल अभी तक नहीं किया गया है।
नैनी के मुताबिक, ईरान ने अब तक सिर्फ पुरानी पीढ़ी की मिसाइलों का इस्तेमाल किया है और अगर युद्ध लंबा चलता है तो नई और अधिक उन्नत मिसाइलों का इस्तेमाल किया जाएगा।
[featured type="Featured"]
नैनी ने हाल ही में ईरान की मिसाइल इंडस्ट्री को लेकर भी बड़ा दावा किया था। उन्होंने कहा था कि, देश के मिसाइल स्टॉक में किसी तरह की कमी नहीं है और उत्पादन लगातार जारी है। उन्होंने ईरानी कैलेंडर वर्ष 1404 (2025-2026) में मिसाइल उद्योग को 20 में से 20 अंक देते हुए इसे पूरी तरह सफल बताया था। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा था कि, ईरान के दुश्मनों के लिए कई सरप्राइज तैयार हैं, जो युद्ध के आगे बढ़ने के साथ सामने आएंगे।
इजरायल की सेना ने बयान जारी कर कहा है कि उसने ईरान के 130 से ज्यादा सैन्य और रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया है। इन लक्ष्यों में शामिल थे-
इजरायल के मुताबिक, ये हमले मुख्य रूप से पश्चिमी और मध्य ईरान के इलाकों में किए गए।
इजरायली वायु सेना ने कहा कि, इन हमलों का उद्देश्य ईरान की उस क्षमता को कमजोर करना है, जिससे वह इजरायल की ओर मिसाइल और ड्रोन हमले कर सकता है।
यह भी पढ़ें: ईरान हमले से कतर का सबसे बड़ा LNG प्लांट बंद, सप्लाई ठप; ठीक करने में लगेंगे 5 साल से अधिक समय
इजरायल ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि, उसकी वायु सेना लगातार ईरान के सैन्य ठिकानों को निशाना बना रही है। इजरायली सेना के मुताबिक, इन हमलों का मकसद ईरान की ओर से होने वाली गोलाबारी के दायरे को कम करना और क्षेत्र में अपनी हवाई श्रेष्ठता को मजबूत करना है। इजरायल का कहना है कि, जब तक ईरान से खतरा बना रहेगा, तब तक ऐसे सैन्य अभियान जारी रहेंगे।
अमेरिका और इजरायल द्वारा शुरू किए गए सैन्य अभियान को अब 21 दिन हो चुके हैं। इस संघर्ष का असर पूरे पश्चिम एशिया में देखने को मिल रहा है। युद्ध के दौरान कई देशों में तेल आपूर्ति और सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हाल ही में ईरान ने कुवैत में ड्रोन हमला किया, जिससे एक तेल रिफाइनरी में आग लग गई। हालांकि इस हमले की आधिकारिक पुष्टि सभी पक्षों से नहीं हुई है।
[breaking type="Breaking"]
दूसरी ओर इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बयान के बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई भी तेज कर दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने गुरुवार देर रात इजरायल की ओर कई मिसाइलें दागीं। इन हमलों के दौरान यरुशलम में जोरदार धमाकों की आवाजें सुनी गईं और पूरे शहर में एयर रेड सायरन बजने लगे। इस घटना के बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है।
इस युद्ध को लेकर अमेरिका के अंदर भी राजनीतिक बहस तेज हो गई है। कई राजनीतिक दलों और विश्लेषकों ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीति पर सवाल उठाए हैं। आलोचकों का कहना है कि अमेरिका को एक और लंबे युद्ध में धकेल दिया गया है, जिससे देश को आर्थिक और सैन्य नुकसान उठाना पड़ सकता है। हालांकि ट्रंप के समर्थक और मेक अमेरिका ग्रेट अगेन (MAGA) आंदोलन से जुड़े लोग अभी भी इस सैन्य कार्रवाई का समर्थन कर रहे हैं।
यह भी पढ़ें: ईरान के खिलाफ युद्ध से अमेरिका पर बड़ा बोझ : ट्रंप प्रशासन ने अमेरिकी संसद से मांगी 200 बिलियन डॉलर की मदद
इसी बीच ईरान के नए सुप्रीम लीडर अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई ने भी कड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि, ईरान के दुश्मनों की सुरक्षा छीन ली जानी चाहिए। यह बयान उस समय आया जब इजराइल के खुफिया मंत्री इस्माइल खतीब की हत्या की खबर सामने आई। बताया जा रहा है कि, मोजतबा खामेनेई को हाल ही में सुप्रीम लीडर बनाया गया है, क्योंकि उनके पिता और पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई युद्ध के पहले दिन इजरायली एयरस्ट्राइक में मारे गए थे।