ईरान हमले से कतर का सबसे बड़ा LNG प्लांट बंद, सप्लाई ठप;ठीक करने में लगेंगे 5 साल से अधिक समय

ईरानी ड्रोन हमले के बाद कतर का रास लाफान LNG प्लांट बंद हो गया है। यह कतर के LNG निर्यात का 17% हिस्सा है और पूरी दुनिया की गैस सप्लाई प्रभावित कर सकता है। उत्पादन बहाल होने में 5 साल तक लग सकते हैं। वैश्विक गैस कीमतों में तेजी और ऊर्जा संकट का खतरा बढ़ गया है।
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ठीक करने में लगेंगे 5 साल से अधिक समय
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    नई दिल्ली। हाल ही में कतर के रास लाफान LNG प्लांट पर ईरानी ड्रोन हमले के बाद उत्पादन ठप हो गया है। यह प्लांट पिछले 30 सालों में पहली बार पूरी तरह बंद हुआ है। हमले में प्लांट की दो बड़ी प्रोडक्शन यूनिट्स प्रभावित हुई हैं, जिनकी कुल क्षमता लगभग 12.8 मिलियन टन सालाना है। यह कतर के कुल LNG निर्यात का लगभग 17% हिस्सा बनाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्लांट को पूरी तरह ठीक करने में 5 साल या उससे अधिक का समय लग सकता है। इससे वैश्विक गैस सप्लाई पर बड़ा असर पड़ने की संभावना है और दुनिया भर में गैस की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हो सकती है।

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    Strait of Hormuz की बंद स्थिति ने संकट और गंभीर किया

    स्थिति और जटिल इसलिए हो गई है क्योंकि Strait of Hormuz भी लगभग बंद हो चुका है। यह वह प्रमुख मार्ग है, जिससे दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल और गैस सप्लाई होता है। अगर यह मार्ग लंबी अवधि के लिए बंद रहता है, तो पेट्रोल, डीजल और कुकिंग गैस की कीमतों में और उछाल आने की संभावना है। विशेषज्ञों का कहना है कि Strait of Hormuz की बंदी और कतर के LNG प्लांट पर हमले का असर संयुक्त रूप से वैश्विक ऊर्जा बाजार में गंभीर संकट खड़ा कर सकता है।

    दुनिया भर में गैस की कमी का असर

    भारत जैसे देश इस संकट से सीधे प्रभावित हो रहे हैं। कुकिंग गैस (LPG) की कमी की खबरें सामने आ रही हैं और इसकी कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है। एशिया के कई देशों में उद्योगों पर भी संकट मंडरा रहा है। पाकिस्तान जैसे देश लगभग पूरी तरह से कतर से LNG पर निर्भर हैं। वहां बिजली और उद्योग दोनों पर प्रभाव पड़ सकता है। सप्लाई में बाधा होने पर उद्योग उत्पादन कम कर सकते हैं, जिससे आर्थिक गतिविधियों पर असर पड़ेगा।

    तुरंत कोई विकल्प नहीं

    विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह संकट लंबा चलता है, तो यह 2022 के ऊर्जा संकट से भी बड़ा हो सकता है। उस समय रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण गैस सप्लाई बाधित हुई थी और दुनिया भर में कीमतें बढ़ गई थीं। इस बार स्थिति और चुनौतीपूर्ण है क्योंकि LNG सप्लाई के पास बड़े स्टोरेज नहीं हैं। इसके अलावा, सप्लाई लंबे कॉन्ट्रैक्ट्स और तय शिपमेंट्स पर निर्भर करती है। इसका मतलब है कि अचानक सप्लाई बहाल करना मुश्किल है।

    महंगी गैस के चलते प्रदूषण बढ़ने की संभावना

    यदि गैस सप्लाई जल्दी बहाल नहीं हुई, तो कई एशियाई देश महंगी गैस की जगह कोयले का इस्तेमाल करने पर मजबूर हो सकते हैं। इससे वायु प्रदूषण बढ़ सकता है और स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यह सिर्फ ऊर्जा संकट नहीं होगा, बल्कि पर्यावरणीय संकट भी बन सकता है।

    वैश्विक ऊर्जा बाजार पर दबाव

    कतर के LNG प्लांट पर हमले और Strait of Hormuz की बंदी के बाद तेल और गैस की कीमतें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेजी से बढ़ रही हैं। पेट्रोल, डीजल और घरेलू गैस की कीमतों में उछाल आम उपभोक्ताओं के लिए चिंता का विषय बन गया है। वैश्विक ऊर्जा विशेषज्ञ कहते हैं कि यदि सप्लाई बाधित रही, तो पूरे विश्व में ऊर्जा बाजार अस्थिर हो सकता है। इससे न केवल एशियाई देश बल्कि यूरोप और अमेरिका भी प्रभावित हो सकते हैं।

    Sona Rajput
    By Sona Rajput

    माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन किया है। साल 2022 ...Read More

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