अमेरिका को आतंकियों का डर: पेशावर का काउंसुलेट धीरे-धीरे बंद करेगा, जिम्मेदारी इस्लामाबाद स्थित अमेरिकी दूतावास को

वॉशिंगटन। सुरक्षा को लेकर चिंता के कारण अमेरिका पेशावर में अपना काउंसुलेट (वाणिज्य दूतावास) बंद कर रहा है। इसका एक और कारण जो अमेरिका ने दिया है वो है- संसाधनों के बेहतर आवंटन की आवश्यकता। इस संबंध में अमेरिकी विदेश विभाग का कहना है कि वह इस काउंसुलेट को चरणबद्ध तरीके से बंद करेगा। इसके साथ ही खैबर पख्तूनख्वा के साथ राजनयिक संबंधों की जिम्मेदारी इस्लामाबाद स्थित अमेरिकी दूतावास को ट्रांसफर कर दी जाएगी।
पेशावर छोड़ रहे हैं पर लोगों से जुड़े रहेंगे
अमेरिका का कहना है कि इस शहर में उसकी उपस्थिति कम होने के बावजूद वह यहां के लोगों से सक्रिय रूप से जुड़ा रहेगा। हम आर्थिक संबंधों को बढ़ावा देने, क्षेत्रीय सुरक्षा को प्रोत्साहित करने के लिए काम करेंगे। अमेरिकी लोगों के हितों को आगे बढ़ाने के लिए खैबर पख्तूनख्वा के लोगों से जुड़ाव जारी रखेंगे। हालांकि विदेश विभाग ने कहा- इस्लामाबाद में उसका दूतावास और कराची-लाहौर में उसके वाणिज्य दूतावास काम करते रहेंगे।
पाकिस्तान में अशांति
अमेरिका ने यह निर्णय इजराइल-अमेरिका द्वारा ईरान पर किए गए किए गए हमलों के बाद पाकिस्तान में फैली अशांति को देखते हुए लिया गया है। हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या कर दी गई थी। इसके बाद कराची में अमेरिकी वाणिज्य दूतावास के पास प्रदर्शनकारियों और पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के बीच झड़पें हुई जिनमें 9 लोगों की मौत हो गई थी। इसके बाद लाहोर और कराची स्थित वाणिज्य दूतावासों से अमेरिका ने गैरजरूरी स्टाफ को हटा दिया था।
लगातार बढ़ रही हैं आतंकी घटनाएं
खैबर पख्तूनख्वा में आतंकी घटनाओं में लगातार वृद्धि देखी जा रही है। इसके चलते 2025-2026 में मरने वालों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) और ISPK जैसे आतंकवादी समूह नागरिकों, पाकिस्तानी सेना को निशाना बना रहे हैं। इन संगठनों का कुछ हिस्सा अफगानिस्तान की सीमा के पास स्थित है। आतंकी घटनाओं में यहां 2025 में 2,300 से अधिक लोगों की मौत हुई। उत्तरी वजीरिस्तान, बन्नू और पेशावर प्रमुख रूप से प्रभावित जिले हैं।












