वॉशिंगटन डीसी। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव अब एक बड़े भू-राजनीतिक संकट का रूप लेता जा रहा है। जहां अमेरिका, ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते सैन्य टकराव के बीच हालात और गंभीर हो गए हैं। ईरान पर लगातार हमले कर रहा अमेरिकी की इस युद्ध में बुरी हालात होते दिखाई दे रही है। इसी बीच अमेरिकी रक्षा विभाग ने इस युद्ध से निपटने के लिए 200 अरब डॉलर की फंडिंग की मांग की है, जिसने वैश्विक स्तर पर हलचल पैदा कर दी है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हालांकि स्थिति को लेकर एक अलग रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि फिलहाल अमेरिका किसी भी नए इलाके में सेना तैनात करने की योजना नहीं बना रहा है। ओवल ऑफिस में जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची के साथ बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि अगर वे ऐसा कोई फैसला लेते भी हैं, तो उसे सार्वजनिक नहीं करेंगे, लेकिन अभी ऐसा कुछ नहीं हो रहा है। उनके इस बयान को युद्ध के विस्तार को सीमित रखने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
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वहीं दूसरी ओर, संघर्ष के बीच एक बड़ा सैन्य घटनाक्रम सामने आया है। ईरान ने दावा किया है कि उसने अमेरिकी वायुसेना के अत्याधुनिक F-35 लड़ाकू विमान को निशाना बनाया। ईरान के इस हमले के बाद विमान को इमरजेंसी स्थिति में लैंडिंग करनी पड़ी।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रवक्ता के अनुसार, यह फाइटर जेट एक कॉम्बैट मिशन पर था, तभी उसे तकनीकी और हमले से जुड़ी स्थिति का सामना करना पड़ा। हालांकि, ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) का दावा है कि यह विमान पूरी तरह गिर चुका हो सकता है, लेकिन इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
इस बढ़ते संकट को देखते हुए यूरोप और अन्य सहयोगी देश भी सक्रिय हो गए हैं। ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान और नीदरलैंड्स सहित कई देशों ने एक संयुक्त बयान जारी कर खाड़ी क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने पर जोर दिया है।
खासतौर पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे अहम जलमार्ग को सुरक्षित बनाए रखने की प्रतिबद्धता जताई गई है, जो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
इसी बीच अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने संकेत दिया कि युद्ध जैसी परिस्थितियों से निपटने के लिए संसाधनों की आवश्यकता होती है। हालांकि उन्होंने सीधे तौर पर 200 अरब डॉलर की राशि की पुष्टि नहीं की, लेकिन यह जरूर कहा कि पेंटागन ने अतिरिक्त फंडिंग के लिए कांग्रेस से संपर्क किया है। हालांकि इस फैसले से साफ है कि अमेरिका पर युद्ध का असर दिखने लगा है और सेना पर हथियारों और गोला बारूद की कमी दिख रही है।
दूसरी तरफ, ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कड़ा रुख अपनाते हुए चेतावनी दी है कि अगर ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर फिर से हमला हुआ, तो तेहरान बिना किसी संयम के जवाब देगा। उन्होंने यह भी कहा कि अब तक ईरान ने अपनी सैन्य क्षमता का केवल सीमित उपयोग किया है। लेकिन अगर दुश्मनों ने सीमा लांघी तो इसका बुरा अंजाम भुगतना होगा।