Iran US War:ट्रंप ने ईरान को दी अंतिम चेतावनी! बोले- 'आखिरी मौका गंवाया तो पछताओगे'...

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को बड़ा संदेश देते हुए कहा है कि उसके पास अमेरिका के साथ अच्छा परमाणु समझौता करने का यह आखिरी मौका है।
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ट्रंप ने ईरान को दी अंतिम चेतावनी! बोले- 'आखिरी मौका गंवाया तो पछताओगे'...
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को समझौता करने की 'अंतिम चेतावनी' दी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ चल रही बातचीत को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत जारी है और दोनों देशों के बीच संपर्क बना हुआ है। ट्रंप का कहना है कि ईरान भी बातचीत से पीछे नहीं हट रहा है और वह कुछ अहम मुद्दों पर चर्चा करने के लिए तैयार है। हालांकि, ट्रंप ने साफ कर दिया कि अमेरिका की सबसे बड़ी चिंता ईरान का परमाणु कार्यक्रम है। उनका कहना है कि जब तक ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम पर ठोस कदम नहीं उठाता, तब तक स्थायी समाधान संभव नहीं होगा।

होर्मुज स्ट्रेट पर भी हुई चर्चा

ट्रंप ने कहा कि बातचीत के दौरान होर्मुज स्ट्रेट (Hormuz Strait) का मुद्दा भी सामने आया है। यह समुद्री रास्ता दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक माना जाता है। यहां से हर दिन बड़ी मात्रा में कच्चे तेल की सप्लाई होती है। ट्रंप के मुताबिक, ईरान ने इस समुद्री मार्ग को लेकर बातचीत की इच्छा जताई है। अमेरिका चाहता है कि यह रास्ता पूरी तरह खुला रहे, ताकि वैश्विक व्यापार और तेल आपूर्ति प्रभावित न हो।

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'पहले होर्मुज स्ट्रेट, फिर परमाणु समझौता'

डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि बातचीत दो चरणों में आगे बढ़ सकती है। पहला चरण होर्मुज स्ट्रेट को सुरक्षित और खुला रखने से जुड़ा है। इसके बाद दूसरा और सबसे अहम चरण ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर होगा। उन्होंने कहा कि परमाणु निरस्त्रीकरण (Denuclearization) आसान प्रक्रिया नहीं है और इसमें समय लग सकता है। लेकिन अमेरिका चाहता है कि ईरान इस दिशा में गंभीरता से कदम उठाए।

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फिलहाल नहीं होगा बड़ा सैन्य हमला

ट्रंप ने यह भी बताया कि अमेरिका ने फिलहाल ईरान पर किसी बड़े सैन्य हमले का फैसला टाल दिया है। उन्होंने कहा कि कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) जैसे खाड़ी देशों ने क्षेत्र में तनाव कम करने की अपील की है। इन सहयोगी देशों की सलाह को ध्यान में रखते हुए अमेरिका ने फिलहाल सैन्य कार्रवाई आगे नहीं बढ़ाने का फैसला किया है।

ईरान के पास 'आखिरी मौका'

डोनाल्ड ट्रंप ने अपने बयान में ईरान को साफ संदेश देते हुए कहा कि यह उसके पास एक अच्छे समझौते पर हस्ताक्षर करने का आखिरी मौका है। उन्होंने कहा कि अगर ईरान समय रहते समझौता नहीं करता, तो हालात और मुश्किल हो सकते हैं। ट्रंप के इस बयान को अमेरिका की ओर से ईरान पर बढ़ते दबाव के रूप में देखा जा रहा है।

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'हमलों से बचना है तो समझौता करें'

इससे पहले भी ट्रंप ने कहा था कि ईरान के पास अमेरिका के साथ बातचीत करने और समझौता करने का अंतिम अवसर है। उन्होंने कहा कि अगर ईरान समझौते के लिए तैयार नहीं होता, तो भविष्य में हालात गंभीर हो सकते हैं। ट्रंप ने उम्मीद जताई कि अगले एक या दो दिनों में दोनों देशों के बीच औपचारिक बातचीत शुरू हो सकती है।

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अमेरिका की क्या है सबसे बड़ी मांग?

अमेरिका लगातार चाहता है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को सीमित करे और ऐसा समझौता करे जिससे भविष्य में परमाणु हथियार बनने का खतरा खत्म हो जाए। अमेरिका का मानना है कि अगर ईरान का परमाणु कार्यक्रम बिना किसी निगरानी के आगे बढ़ता रहा, तो इससे पूरे पश्चिम एशिया की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। इसी कारण अमेरिका इस मुद्दे को बातचीत का सबसे अहम विषय मान रहा है।

ईरान क्या चाहता है?

ईरान लगातार कहता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम केवल शांतिपूर्ण और ऊर्जा उत्पादन के लिए है। हालांकि, अमेरिका और कई पश्चिमी देशों को आशंका है कि ईरान भविष्य में परमाणु हथियार बनाने की दिशा में आगे बढ़ सकता है। इसी वजह से दोनों देशों के बीच लंबे समय से विवाद बना हुआ है।

कई महीनों से जारी है तनाव

अमेरिका और ईरान के बीच पिछले कई महीनों से तनाव लगातार बना हुआ है। इस दौरान अमेरिका ने ईरान से जुड़े कई ठिकानों पर हवाई हमले किए। जवाब में ईरान ने भी अमेरिकी हितों और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने की कोशिश की।

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अब बातचीत से निकल सकता है समाधान

हालिया बयान से संकेत मिल रहे हैं कि दोनों देश अब सैन्य टकराव के बजाय बातचीत के जरिए समाधान तलाशना चाहते हैं। यदि बातचीत सफल रहती है, तो इससे न केवल अमेरिका और ईरान के रिश्तों में सुधार आ सकता है, बल्कि पूरे पश्चिम एशिया में तनाव कम होने की भी उम्मीद है।

Garima Vishwakarma
By Garima Vishwakarma

गरिमा विश्वकर्मा | People’s Institute of Media Studies से B.Sc. Electronic Media की डिग्री | पत्रकार...Read More

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