Iran-US War:अमेरिकी हमले थमते ही सस्ता हुआ कच्चा तेल, क्या अब भारत में घटेंगे पेट्रोल-डीजल के दाम?

अमेरिका। पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव में कमी आने का असर सीधे अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर दिखाई दिया है। सोमवार को कच्चे तेल की कीमतों में करीब 6 फीसदी तक की गिरावट दर्ज की गई। पिछले कुछ हफ्तों से लगातार बढ़ रहे दाम अब नीचे आते नजर आ रहे हैं। इससे उन देशों को राहत मिलने की उम्मीद जगी है जो बड़े पैमाने पर तेल का आयात करते हैं। भारत भी इनमें शामिल है। यदि आने वाले दिनों में हालात शांत रहते हैं तो पेट्रोल और डीजल की कीमतों में नई बढ़ोतरी का खतरा भी कम हो सकता है।
तनाव कम होते ही तेल बाजार में आई राहत
अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य कार्रवाई रुकने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। कारोबार के दौरान ब्रेंट क्रूड 90 डॉलर प्रति बैरल के नीचे फिसल गया। वहीं अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) भी करीब 84 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया। बाजार में यह गिरावट इसलिए आई क्योंकि निवेशकों को अब उम्मीद है कि क्षेत्र में हालात पहले की तुलना में बेहतर हो सकते हैं और तेल की सप्लाई पर बड़ा खतरा फिलहाल टल गया है।
ये भी पढ़ें: वेस्ट बैंक में बड़े सैन्य अभियान की तैयारी में इजरायल! नेतन्याहू बोले- आतंकियों के खिलाफ होगी सख्त कार्रवाई
एक महीने की तेजी पर लगा ब्रेक
पिछले एक महीने के दौरान कच्चे तेल की कीमतों में करीब 20 फीसदी की तेजी देखी गई थी। होर्मुज स्ट्रेट और रेड सी के आसपास बढ़ते तनाव के कारण तेल की सप्लाई प्रभावित होने की आशंका थी। इसी वजह से कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई थीं। हालांकि अब हालात में सुधार के संकेत मिलने के बाद बाजार शांत होता नजर आ रहा है।
बातचीत की उम्मीद से बढ़ा भरोसा
अमेरिका की ओर से हमले रोकने के फैसले के बाद दोनों देशों के बीच बातचीत की संभावना मजबूत हुई है। इसी उम्मीद ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया है। हालांकि जानकारों का कहना है कि समुद्री रास्तों पर पूरी तरह सामान्य स्थिति बनने में अभी समय लग सकता है। कई शिपिंग कंपनियां अब भी सतर्क हैं और सुरक्षा की स्थिति साफ होने का इंतजार कर रही हैं।
समुद्री रास्तों पर अभी भी बनी हुई है चुनौती
तेल की सप्लाई के लिए होर्मुज स्ट्रेट और बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य बेहद अहम माने जाते हैं। हाल के तनाव के कारण इन रास्तों से गुजरने वाले जहाजों की संख्या कम हो गई थी। हालांकि अब हालात पहले से बेहतर हैं, लेकिन शिपिंग कंपनियां पूरी तरह सामान्य संचालन शुरू करने में सावधानी बरत रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर क्षेत्र में शांति बनी रहती है तो आने वाले दिनों में तेल की सप्लाई भी सामान्य हो सकती है।
ये भी पढ़ें: भारत के Gen Z आंदोलन की गूंज सरहद पार, पाकिस्तान-नेपाल-श्रीलंका के युवाओं ने कहा- 'आपने बदलाव की नई मिसाल कायम की'
भारत में फिलहाल नहीं बदले पेट्रोल-डीजल के दाम
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें घटने के बावजूद भारत में पेट्रोल और डीजल के दाम फिलहाल स्थिर बने हुए हैं। पिछली बार कीमतों में बढ़ोतरी के बाद से सरकारी तेल कंपनियों ने कोई नया बदलाव नहीं किया है। अगर वैश्विक बाजार में कच्चा तेल लंबे समय तक सस्ता रहता है तो भविष्य में घरेलू ईंधन कीमतों पर भी इसका सकारात्मक असर देखने को मिल सकता है। फिलहाल उपभोक्ताओं की नजर अंतरराष्ट्रीय बाजार के अगले रुख और सरकार के फैसलों पर बनी हुई है।











