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भारत के Gen Z आंदोलन की गूंज सरहद पार,पाकिस्तान-नेपाल-श्रीलंका के युवाओं ने कहा- 'आपने बदलाव की नई मिसाल कायम की'

NEET और पेपर लीक विरोधी आंदोलन को लेकर भारत के Gen Z की चर्चा अब पड़ोसी देशों तक पहुंच गई है। पाकिस्तान, नेपाल और श्रीलंका के युवाओं ने भारतीय छात्रों की एकजुटता, साहस और सोशल मीडिया के रचनात्मक इस्तेमाल की सराहना की। कई विदेशी कंटेंट क्रिएटर्स और मीडिया संस्थानों ने इस आंदोलन को नई पीढ़ी की लोकतांत्रिक ताकत बताया।
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पाकिस्तान-नेपाल-श्रीलंका के युवाओं ने कहा- 'आपने बदलाव की नई मिसाल कायम की'
भारत में Gen Z के आंदोलनों की गूंज अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सुनाई दे रही है।

दिल्ली के जंतर-मंतर से शुरू हुआ छात्रों का आंदोलन अब सिर्फ भारत की सीमाओं तक सीमित नहीं रहा। परीक्षा पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही की मांग को लेकर शुरू हुए इस विरोध प्रदर्शन ने पड़ोसी देशों के युवाओं का भी ध्यान अपनी ओर खींचा है। पाकिस्तान, नेपाल और श्रीलंका के कई कंटेंट क्रिएटर्स, सामाजिक कार्यकर्ताओं और युवाओं ने भारतीय छात्रों की एकजुटता, रचनात्मक विरोध और साहस की खुलकर सराहना की है। सोशल मीडिया पर मीम्स, इंस्टाग्राम रील्स, छोटे वीडियो और डिजिटल कैंपेन के जरिए चलाए गए इस आंदोलन को कई विदेशी युवाओं ने आधुनिक लोकतांत्रिक विरोध की नई मिसाल बताया। भारतीय छात्रों के आंदोलन की तस्वीरें और वीडियो पड़ोसी देशों में भी तेजी से साझा किए गए, जहां उन्हें सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली।

सोशल मीडिया बना आंदोलन की सबसे बड़ी ताकत

भारत के छात्र आंदोलन की सबसे बड़ी पहचान इसका डिजिटल स्वरूप रहा। पारंपरिक रैलियों और नारों के साथ-साथ मीम्स, रील्स और वायरल वीडियो ने आंदोलन को देशभर में तेजी से फैलाने का काम किया। प्रदर्शन से जुड़े वीडियो न केवल लोगों तक पहुंचे, बल्कि पुलिस कार्रवाई और घटनास्थल की तस्वीरें भी सोशल मीडिया के जरिए लाखों लोगों तक पहुंचीं। यही वजह रही कि यह आंदोलन भारत से बाहर भी चर्चा का विषय बना और पड़ोसी देशों के युवाओं ने इसे करीब से देखा।

पाकिस्तान के युवाओं ने भारतीय छात्रों की सराहना की

एक बातचीत में पाकिस्तान की एक युवती ने भारतीय छात्रों की एकजुटता की तारीफ करते हुए कहा कि इतना अच्छा करोगे तो नफरत कैसे होगी? उनका कहना था कि सीमाएं अलग हो सकती हैं, लेकिन युवाओं की सोच और बदलाव की इच्छा एक जैसी होती है। एक अन्य पाकिस्तानी युवक ने कहा कि भारतीय छात्रों ने धर्म और जाति से ऊपर उठकर आंदोलन किया, जबकि पाकिस्तान में समाज कई वर्गों में बंटा हुआ है। उसके मुताबिक यही भारतीय Gen Z की सबसे बड़ी ताकत रही। पाकिस्तानी कंटेंट क्रिएटर बिलाल हसन ने आंदोलन को लेकर लगाए गए विदेशी फंडिंग के आरोपों पर व्यंग्य करते हुए कहा कि हमारे पास अपना देश चलाने के पैसे नहीं हैं, हम भारत के आंदोलन को कैसे फंड कर सकते हैं? उन्होंने यह भी कहा कि भारत में विरोध प्रदर्शन के दौरान लाठीचार्ज हो सकता है, लेकिन पाकिस्तान में कई बार प्रदर्शनकारियों को गायब कर दिया जाता है। इसी दौरान उन्होंने व्यंग्य में कहा कि यहां तो लोग एक प्लेट बिरयानी पर भी बिक जाते हैं।

पाकिस्तानी मीडिया में भी हुई चर्चा

भारतीय छात्र आंदोलन पर पाकिस्तान के प्रमुख अखबार ने भी संपादकीय प्रकाशित किया। इसमें सवाल उठाया गया कि पाकिस्तान में वैसा छात्र आंदोलन क्यों नहीं बन पाया जैसा भारत में देखने को मिला। इंस्टाग्रामर जई औरंगजेब ने इसका कारण बताते हुए कहा कि 1980 के दशक में तत्कालीन सैन्य शासन के दौरान छात्र संघों को खत्म कर दिया गया था, जिससे छात्र राजनीति कमजोर होती चली गई।

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श्रीलंका के युवाओं ने बताया प्रेरणादायक आंदोलन

भारत के छात्र आंदोलन की चर्चा श्रीलंका में भी हुई। वर्ष 2022 में आर्थिक संकट के खिलाफ बड़े जन आंदोलन का हिस्सा रहे कई सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भारतीय छात्रों का समर्थन किया। श्रीलंका के सामाजिक कार्यकर्ता बुवानका परेरा ने भारतीय युवाओं के नाम संदेश देते हुए लिखा, "हिम्मत मत हारिए और अपनी लड़ाई जारी रखिए। वहीं चर्चित कार्टूनिस्ट अवंता आर्टिगाला ने आंदोलन पर व्यंग्य चित्र साझा किया, जबकि लॉ छात्रा स्वास्थिका अरुलिंगम ने मुंबई में पुलिस वैन के सामने खड़ी छात्रा रिया अहीर की तस्वीर साझा करते हुए उसे लोकतांत्रिक साहस का प्रतीक बताया।

नेपाल के युवाओं ने भी जताया समर्थन

नेपाल के कंटेंट क्रिएटर अविनाश मिश्रा ने भारतीय छात्रों के आंदोलन को जायज बताते हुए कहा कि किसी भी युवा की आवाज को ओवररिएक्शन कहकर खारिज नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने अपने वीडियो संदेश में कहा कि आप जो महसूस कर रहे हैं, वह पूरी तरह जायज है। आंदोलन का असली उद्देश्य कभी मत भूलिए।" उन्होंने नेपाल में हुए छात्र आंदोलनों का जिक्र करते हुए कहा कि युवाओं की एकजुटता लोकतांत्रिक बदलाव की सबसे बड़ी ताकत होती है।

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सीमाओं से आगे बढ़ा भारतीय युवाओं का संदेश

भारत में परीक्षा पेपर लीक के खिलाफ शुरू हुआ यह आंदोलन अब अंतरराष्ट्रीय चर्चा का विषय बन चुका है। पाकिस्तान, नेपाल और श्रीलंका से सामने आई प्रतिक्रियाएं बताती हैं कि भारतीय छात्रों की एकजुटता, डिजिटल अभियान और शांतिपूर्ण विरोध ने पड़ोसी देशों के युवाओं पर भी प्रभाव छोड़ा है। मीम्स, सोशल मीडिया और रचनात्मक विरोध के जरिए अपनी बात रखने वाले भारत के Gen Z को कई विदेशी युवाओं ने लोकतांत्रिक भागीदारी और सामाजिक बदलाव का नया उदाहरण बताया। यही वजह है कि यह आंदोलन अब केवल भारत का मुद्दा नहीं, बल्कि दक्षिण एशिया के युवाओं के बीच चर्चा का विषय बन गया है।

Sona Rajput
By Sona Rajput

माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन किया है। साल 2022 ...Read More

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