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नई दिल्ली। देश का इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात अभूतपूर्व तेजी से बढ़ रहा है। यह गति जारी रही तो यह सेक्टर जल्दी ही देश के निर्यात ढांचे को पूरी तरह बदल देने की स्थिति में जा पहुंचेगा। वाणिज्य मंत्रालय के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025–26 की पहली छमाही में इलेक्ट्रॉनिक्स भारत की तीसरी सबसे बड़ी निर्यात श्रेणी बन चुकी है और अनुमान है कि आने वाले दो वर्षों में यह पेट्रोलियम उत्पादों को पीछे छोड़कर दूसरी सबसे बड़ी श्रेणी बन जाएगी। यह वृद्धि मुख्य रूप से वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं के पुनर्गठन, भारत में बढ़ते विनिर्माण निवेश, और खासकर एप्पल के आईफोन उत्पादन के विस्तार से प्रेरित है। पिछले कुछ वर्षों में भारत ने इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण के क्षेत्र में तेजी से प्रगति की है। वित्त वर्ष 2021–22 में यह श्रेणी निर्यात सूची में सातवें स्थान पर थी, लेकिन कुछ ही वर्षों में यह तीसरे स्थान पर पहुंच गई है।
साल 2025–26 की पहली छमाही में इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात 42% बढ़कर 22.2 अरब डॉलर पर पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की समान अवधि में 15.6 अरब डॉलर था। इनमें से लगभग आधा हिस्सा अकेले एप्पल के आईफोन निर्यात का है, जिससे भारत के तकनीकी निर्यात परिदृश्य में बड़ा परिवर्तन आया है। इसके विपरीत, पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात घट रहा है। अमेरिकी दबाव के कारण भारत ने रूस से कच्चे तेल की खरीद कम कर दी है, जिसके चलते इस श्रेणी का निर्यात 16.4% गिरकर 30.6 अरब डॉलर पर आ गया, जबकि पिछले वर्ष यह 36.6 अरब डॉलर था। एक समय पर पेट्रोलियम उत्पाद भारत के दूसरे सबसे बड़े निर्यात थे, लेकिन अब यह स्थान इलेक्ट्रॉनिक्स को मिलने की संभावना बढ़ गई है। इंजीनियरिंग उत्पाद अभी भी शीर्ष पर हैं, जिनका निर्यात 5.35% बढ़कर 59.3 अरब डॉलर तक पहुंच गया है।
वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, वित्त वर्ष 2023 से 2025 के बीच इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात में 63% की वृद्धि दर्ज की गई है, साल 2023 में 23.5 अरब डॉलर से बढ़कर 2025 में 38.5 अरब डॉलर तक। विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह रफ्तार जारी रही, तो 2026 तक इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात दोगुना हो जाएगा। इसका अर्थ है कि भारत अब केवल सेवा क्षेत्र में नहीं, बल्कि उच्च-तकनीकी विनिर्माण और वैश्विक आपूर्ति शृंखला में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। भारत सरकार की मेक इन इंडिया नीति, उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (पीएलआई) योजनाएं, और प्रमुख वैश्विक ब्रांडों जैसे एप्पल, सैमसंग और फॉक्सकॉन द्वारा स्थानीय स्तर पर निर्माण इकाइयां स्थापित करना इस वृद्धि के प्रमुख कारण हैं। एप्पल के आईफोन जिनका बड़ा हिस्सा अब भारत में तैयार हो रहा है, भारत को वैश्विक स्मार्टफोन निर्यात हब के रूप में स्थापित कर रहे हैं।
यह वृद्धि केवल संख्याओं में बदलाव नहीं बल्कि भारत की आर्थिक संरचना में एक बड़ा परिवर्तन है। लंबे समय तक भारत के निर्यात का मुख्य आधार पेट्रोलियम उत्पाद, रत्न-आभूषण और वस्त्र रहे हैं, लेकिन अब इलेक्ट्रॉनिक्स ने इन पारंपरिक क्षेत्रों को पीछे छोड़ दिया है। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि भारत धीरे-धीरे एक ज्ञान-आधारित और तकनीकी रूप से उन्नत अर्थव्यवस्था की दिशा में बढ़ रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले वर्षों में यदि सरकार स्थिर नीतियां और निवेश माहौल बनाए रखती है, तो भारत एशिया का अगला इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण केंद्र बन सकता है। यह बदलाव न केवल निर्यात में विविधता लाएगा बल्कि लाखों नए रोजगार भी सृजित करेगा। कुल मिलाकर, आईफोन निर्माण के नेतृत्व में भारत की इलेक्ट्रॉनिक्स क्रांति अब देश की आर्थिक कहानी को नए आयाम दे रही है।