इंदौर में बैंक खातों का खेल! खाता यश के नाम, कमान जतिन के हाथ:दो गिरफ्तार

इंदौर। साइबर ठगों तक ठगी की रकम पहुंचाने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे म्यूल बैंक खातों के खिलाफ चल रहे ऑपरेशन मैट्रिक्स में क्राइम ब्रांच ने बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने ऐसे बैंक खाते के मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिसके कागजों में खाताधारक कोई और था, जबकि उसका संचालन दूसरा व्यक्ति कर रहा था।जांच में सामने आया कि बैंक ऑफ इंडिया की विजय नगर शाखा में खुला खाता फोटोग्राफर यश शर्मा, निवासी धर्मपुरी, के नाम पर दर्ज था। पुलिस के मुताबिक, इस खाते का वास्तविक संचालन निजी कंपनी में काम करने वाला जतिन चंदेल, निवासी न्यू गौरी नगर कर रहा था। पुलिस को आशंका है कि खाते का इस्तेमाल अंतरराज्यीय साइबर ठगी के लेन-देन में किया गया।
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इनपुट मिला तो खुलने लगी खाते की परतें
क्राइम ब्रांच के एडिशनल डीसीपी राजेश दंडोतिया के अनुसार, राज्य साइबर पुलिस मुख्यालय, I4C, NCRP और साइबर क्राइम पोर्टल से प्राप्त जानकारी के आधार पर खाते की जांच शुरू की गई थी। बैंक से रिकॉर्ड हासिल करने पर खाता यश शर्मा के नाम पर मिला।इसके बाद पुलिस ने खाते के लेन-देन और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच की। पूछताछ के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर पुलिस का दावा है कि खाते का संचालन जतिन चंदेल द्वारा किया जा रहा था। इसके बाद दोनों आरोपियों को कार्रवाई के दायरे में लिया गया।
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एक खाते के खिलाफ 10 साइबर फ्रॉड शिकायतें
साइबर क्राइम पोर्टल पर दर्ज रिकॉर्ड खंगालने के दौरान पुलिस को इस बैंक खाते से जुड़ी 10 साइबर ठगी की शिकायतें मिलीं। खास बात यह है कि शिकायतें अलग-अलग राज्यों से सामने आई हैं।जिन राज्यों से शिकायतें मिलीं, उनमें आंध्र प्रदेश, गुजरात, हरियाणा, केरल, कर्नाटक, महाराष्ट्र और तेलंगाना शामिल हैं। इससे पुलिस को खाते के अंतरराज्यीय साइबर अपराध नेटवर्क में इस्तेमाल होने का संदेह मजबूत हुआ है।
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किसके पास पहुंचा पैसा, आगे कहां गया-जांच जारी
पुलिस ने शुरुआती जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर यश शर्मा और जतिन चंदेल के खिलाफ धारा 318(4) और 3(5) बीएनएस के तहत प्रकरण दर्ज किया है।अब जांच का फोकस इस बात पर है कि साइबर ठगी की रकम इस खाते में किस रास्ते से पहुंची, रकम जमा होने के बाद उसे किन खातों में ट्रांसफर किया गया और आखिरकार पैसा किसके पास पहुंचा।पुलिस यह भी पता लगा रही है कि बैंक खाते के संचालन और ठगी की रकम को आगे पहुंचाने में आरोपियों के अलावा और कितने लोग जुड़े हुए हैं। अंतरराज्यीय साइबर अपराध नेटवर्क से जुड़े संभावित आरोपियों की जानकारी भी जुटाई जा रही है।
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म्यूल अकाउंट क्यों बनते हैं ठगों का जरिया?
साइबर अपराधी अक्सर दूसरे लोगों के बैंक खातों का इस्तेमाल ठगी की रकम जमा करने और उसे आगे ट्रांसफर करने के लिए करते हैं। ऐसे खातों को म्यूल अकाउंट कहा जाता है। खाताधारक के नाम और वास्तविक संचालन करने वाले व्यक्ति के अलग होने से जांच एजेंसियों के लिए ठगी की रकम की असली कड़ी तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है।ऑपरेशन मैट्रिक्स के तहत क्राइम ब्रांच अब ऐसे खातों की परत-दर-परत जांच कर रही है, ताकि स्थानीय स्तर पर खाते उपलब्ध कराने वालों से लेकर दूसरे राज्यों में बैठे साइबर ठगों तक पूरी चेन का पता लगाया जा सके।


















