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इंदौर कमिश्नर की सख्त चेतावनी :कागजों में निगरानी बंद करो! बदमाश ने की वारदात तो TI होगा जिम्मेदार

इंदौर पुलिस कमिश्नर संतोष कुमार सिंह ने सूचीबद्ध और आदतन अपराधियों की निगरानी में लापरवाही पर थाना प्रभारियों को सख्त चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि बदमाश दूसरे थाना क्षेत्र में जाकर भी अपराध करता है तो उसके मूल थाने के TI की जवाबदेही तय होगी। बीट पुलिसिंग मजबूत करने, बदमाशों की गतिविधियों पर नजर रखने और ड्रग पैडलरों की सूची तैयार करने के निर्देश दिए।
इंदौर कमिश्नर की सख्त चेतावनी :कागजों में निगरानी बंद करो! बदमाश ने की वारदात तो TI होगा जिम्मेदार
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इंदौर -पुलिस कमिश्नर (एडीजी) संतोष कुमार सिंह ने सूचीबद्ध और आदतन अपराधियों की निगरानी को लेकर थाना प्रभारियों को सख्त निर्देश दिए हैं। शनिवार को पुलिस अधिकारियों की बैठक में उन्होंने साफ कहा कि किसी थाना क्षेत्र का सूचीबद्ध बदमाश यदि दूसरे थाना क्षेत्र में जाकर अपराध करता है, तो संबंधित थाना प्रभारी यह कहकर अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकेगा कि वारदात उसके इलाके में नहीं हुई।कमिश्नर ने कहा कि पुलिस की जिम्मेदारी केवल अपने थाना क्षेत्र में होने वाले अपराध की जांच तक सीमित नहीं है। अपने क्षेत्र में सक्रिय बदमाशों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखना भी थाना प्रभारी की जिम्मेदारी है। यदि निगरानी में लापरवाही सामने आती है और वही बदमाश दोबारा अपराध करता है, तो संबंधित पुलिस अधिकारियों की भूमिका की भी समीक्षा की जाएगी।

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कागजों में नहीं, जमीन पर दिखे निगरानी

बैठक में कमिश्नर ने सूचीबद्ध अपराधियों की निगरानी व्यवस्था को लेकर विशेष नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि बदमाशों की जानकारी केवल थाने के रिकॉर्ड या रजिस्टर में दर्ज रहने से पुलिसिंग पूरी नहीं होती। बीट और माइक्रो बीट स्तर के पुलिसकर्मियों को यह पता होना चाहिए कि उनके क्षेत्र में कौन बदमाश सक्रिय है, वह कहां आता-जाता है और किन लोगों के संपर्क में है।उन्होंने थाना प्रभारियों को निर्देश दिए कि सूचीबद्ध बदमाशों की गतिविधियों की नियमित जानकारी जुटाई जाए। उनके ठिकानों, आवाजाही और आपराधिक संपर्कों पर नजर रखी जाए। किसी बदमाश के दोबारा अपराध में शामिल होने की सूचना मिलने पर यह भी देखा जाएगा कि उसके खिलाफ पहले से क्या निगरानी और प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की गई थी।

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दूसरे थाना क्षेत्र में अपराध किया तो भी होगी जवाबदेही

कमिश्नर ने कहा कि कई मामलों में बदमाश अपने मूल थाना क्षेत्र से बाहर जाकर अपराध कर देते हैं। ऐसे मामलों में स्थानीय पुलिस का यह तर्क स्वीकार नहीं किया जाएगा कि अपराध दूसरे थाने की सीमा में हुआ है। यदि आरोपी पहले से सूचीबद्ध या आदतन अपराधी है तो उसके मूल थाना क्षेत्र की पुलिस को उसकी गतिविधियों की जानकारी रखना जरूरी है।उन्होंने पुलिस अधिकारियों को अपराध होने का इंतजार करने के बजाय संभावित अपराध को पहले ही रोकने की रणनीति अपनाने के निर्देश दिए। उनका जोर इस बात पर रहा कि पुलिसिंग का मकसद केवल वारदात के बाद आरोपी को पकड़ना नहीं, बल्कि अपराध की संभावना को समय रहते खत्म करना होना चाहिए।

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बीट और माइक्रो बीट पुलिसिंग पर जोर

बैठक में बीट पुलिसिंग को और मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया। कमिश्नर ने कहा कि क्षेत्र में तैनात पुलिसकर्मियों को स्थानीय अपराधियों और संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी अपडेट रखनी होगी। बाउंड ओवर किए गए अपराधी या सूचीबद्ध बदमाश के दोबारा अपराध में शामिल होने पर मामले को गंभीरता से लिया जाएगा।ऐसे अपराधियों के खिलाफ प्रतिबंधात्मक कार्रवाई के साथ उनकी गतिविधियों की नियमित समीक्षा करने के निर्देश भी दिए गए। पुलिस को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया कि जिन बदमाशों से दोबारा अपराध की आशंका है, उनकी गतिविधियां पुलिस की नजर से बाहर न जाएं।

ड्रग पैडलरों की जानकारी पर भी TI से सवाल

बैठक में शहर के संवेदनशील थाना क्षेत्रों की पुलिसिंग की भी समीक्षा की गई। खजराना, चंदन नगर, लसूड़िया, बाणगंगा, आजाद नगर, द्वारकापुरी और सदर बाजार थाना क्षेत्रों के कामकाज पर विशेष रूप से चर्चा हुई।खजराना टीआई मनोज सेंधव से जब क्षेत्र में सक्रिय ड्रग पैडलरों की जानकारी मांगी गई तो वे स्पष्ट जानकारी नहीं दे सके। इस पर कमिश्नर ने नाराजगी जताई। उन्होंने पुलिस अधिकारियों से कहा कि नशे के कारोबार से जुड़े लोगों की जानकारी थाना स्तर पर व्यवस्थित तरीके से उपलब्ध रहनी चाहिए।

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तीन दिन में तैयार करनी होगी ड्रग नेटवर्क की सूची

चंदन नगर टीआई तिलक करोले से भी ड्रग खरीदने और बेचने वालों का पूरा डेटा मांगा गया। कमिश्नर ने तीन दिन के भीतर ऐसी पूरी सूची तैयार करने के निर्देश दिए। इसमें नशे के कारोबार से जुड़े लोगों के साथ उनकी गतिविधियों और संपर्कों की जानकारी जुटाने पर जोर दिया गया। इसके अलावा हत्या जैसे गंभीर अपराधों के मामलों में आरोपितों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखने के निर्देश दिए गए। ऐसे मामलों में यदि आरोपित जमानत पर बाहर हैं तो उनकी गतिविधियों की निगरानी के साथ जरूरत पड़ने पर जमानत निरस्त कराने के लिए कानूनी प्रक्रिया शुरू करने को कहा गया। बैठक में कमिश्नर ने थाना प्रभारियों को स्पष्ट संदेश दिया कि अपराध नियंत्रण में लापरवाही किसी भी स्तर पर स्वीकार नहीं की जाएगी। सूचीबद्ध बदमाशों की निगरानी से लेकर नशे के कारोबार और गंभीर अपराधों के आरोपितों पर नजर रखने तक, पुलिस को सक्रिय और परिणाम आधारित कार्रवाई करनी होगी।

Hemant Nagle
By Hemant Nagle

हेमंत नागले | पिछले बीस वर्षों से अधिक समय से सक्रिय पत्रकारिता में हैं। वर्ष 2004 में मास्टर ऑफ जर्...Read More

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