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डॉलर में सैलरी का झांसा: विदेश पहुंचते ही पासपोर्ट जब्त! युवाओं को साइबर ठगी का खेल

फर्जी कंपनी, विदेशी प्रोफेशनल्स के नाम पर ऑनलाइन इंटरव्यू और 60-70 हजार डॉलर के पैकेज का लालच देकर युवाओं को थाईलैंड-म्यांमार सीमा तक पहुंचाने का आरोप; ‘केके पार्क’ में पासपोर्ट छीनकर साइबर ठगी कराने और विरोध पर टॉर्चर की शिकायतें
डॉलर में सैलरी का झांसा: विदेश पहुंचते ही पासपोर्ट जब्त! युवाओं को साइबर ठगी का खेल
प्रतीकात्मक चित्र

इंदौर।   भारतीय युवाओं को साइबर अपराध की अंधेरी दुनिया में धकेले जाने का खतरनाक नेटवर्क सामने आया है। इंदौर समेत देश के अलग-अलग हिस्सों से पढ़े-लिखे युवाओं को थाईलैंड-म्यांमार सीमा तक ले जाकर कथित साइबर स्कैम सेंटरों में काम करने के लिए मजबूर किए जाने के आरोप हैं।फर्जी कंपनी, चमकदार वेबसाइट, ऑफिशियल दिखने वाली ई-मेल और विदेशी प्रोफेशनल्स के नाम पर ऑनलाइन इंटरव्यू,ठगों ने भरोसा जीतने के लिए पूरा कॉर्पोरेट सेटअप तैयार कर रखा है। सालाना 60 से 70 हजार डॉलर तक की सैलरी का पैकेज दिखाकर युवाओं को विदेश बुलाया जाता है।लेकिन एयरपोर्ट पर कदम रखते ही नौकरी का सपना डरावने जाल में बदलने का दावा है।

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एयरपोर्ट पर रिसीव, रास्ते में पासपोर्ट गायब!

पीड़ितों के मुताबिक, विदेश पहुंचते ही गिरोह के लोग उन्हें रिसीव करते हैं। इसके बाद रास्ते में पासपोर्ट अपने कब्जे में ले लिया जाता है और युवक को थाईलैंड-म्यांमार सीमा पर मौजूद कथित साइबर स्कैम सेंटरों तक पहुंचा दिया जाता है।ऐसे ही एक ठिकाने को ‘केके पार्क’ के नाम से बताया जाता है। आरोप है कि यहां पहुंचने के बाद युवाओं की गतिविधियों पर नियंत्रण कर उन्हें साइबर फ्रॉड करने के लिए मजबूर किया जाता है।विरोध करने वालों के साथ मारपीट, खाना बंद करने और करंट के झटके देने जैसे गंभीर उत्पीड़न के आरोप भी पीड़ितों ने बताए हैं।

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पहले फंसाते हैं, फिर दूसरे को फंसाने पर मजबूर!

इस नेटवर्क का सबसे खतरनाक तरीका यह बताया जा रहा है कि फंसे युवाओं को आसानी से बाहर निकलने नहीं दिया जाता। आरोप है कि उनसे कहा जाता है कि पहले अपने स्थान पर किसी दूसरे युवक को नौकरी का लालच देकर विदेश बुलाओ, तभी बाहर निकलने का रास्ता मिलेगा।यानी एक युवक खुद जाल में फंसने के बाद उसी जाल में दूसरे युवक को फंसाने के लिए मजबूर हो जाता है।

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60-70 हजार डॉलर का पैकेज दिखाकर भरोसा जीतते हैं

ठगी का खेल बेहद प्रोफेशनल तरीके से शुरू किया जाता है। युवाओं को उनकी योग्यता और प्रोफाइल के मुताबिक नौकरी का ऑफर भेजा जाता है। ई-मेल कंपनी की आधिकारिक मेल जैसी दिखाई देती है। इसके बाद विदेशी कंपनी का नाम, वेबसाइट और जॉब प्रोफाइल दिखाकर भरोसा बढ़ाया जाता है।ऑनलाइन इंटरव्यू के लिए चीनी या अमेरिकी प्रोफेशनल्स के नाम का इस्तेमाल किया जाता है। इंटरव्यू के बाद मोटी सैलरी वाला ऑफर देकर युवक को विदेश जाने के लिए तैयार कर लिया जाता है।

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वीजा से होटल तक... हर कदम पर पैसों की वसूली

पासपोर्ट की जानकारी लेने के बाद वर्क वीजा के नाम पर रकम मांगी जाती है। कहा जाता है कि यह राशि पहली सैलरी में वापस एडजस्ट कर दी जाएगी।इसके बाद होटल बुकिंग, परिवार के ठहरने और अन्य खर्चों के नाम पर भी पैसे वसूले जाते हैं। नौकरी शुरू होने से पहले ही अलग-अलग बहानों से युवाओं से लाखों रुपये तक लिए जाने की बात सामने आई है।

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हजारों भारतीय युवाओं के फंसे होने का अनुमान

हाल ही में गृह मंत्रालय की कार्रवाई में म्यांमार से 156 लोगों को रेस्क्यू कर भारत लाया गया था। विभिन्न अनुमानों में 20 से 25 हजार भारतीय युवाओं के ऐसे साइबर स्कैम सेंटरों में फंसे होने की बात कही गई है। हालांकि इस आंकड़े की स्वतंत्र पुष्टि अलग-अलग स्रोतों से होना जरूरी है।भारत लौटने वाले पीड़ितों की आपबीती से इस पूरे नेटवर्क में नौकरी के नाम पर युवाओं को विदेश बुलाने और फिर साइबर ठगी में धकेलने का पैटर्न सामने आया है।

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भाषा और हुनर के हिसाब से मिलता है ठगी का टारगेट

राष्ट्रीय सुरक्षा एवं साइबर इंटेलिजेंस विशेषज्ञ अमित कुमार दुबे के अनुसार, ऐसे नेटवर्क युवाओं की भाषा और डिजिटल दक्षता का इस्तेमाल भी साइबर ठगी के लिए करते हैं। उन्हें उनकी भाषा के हिसाब से संभावित पीड़ितों से संपर्क करने और अलग-अलग तरह की साइबर ठगी करने के टारगेट दिए जाते हैं।डिजिटल अरेस्ट जैसी ठगी के तरीकों से लेकर दूसरे ऑनलाइन फ्रॉड तक, युवाओं को बाकायदा काम करने के तरीके सिखाए जाने की बात सामने आई है।

Hemant Nagle
By Hemant Nagle

हेमंत नागले | पिछले बीस वर्षों से अधिक समय से सक्रिय पत्रकारिता में हैं। वर्ष 2004 में मास्टर ऑफ जर्...Read More

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