नई दिल्ली। भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल (AMC) अमर प्रीत सिंह ने फाइटर जेट्स की खरीद में हो रही देरी पर चिंता जताई अपनी आखिरी प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि जेट्स की लेटलतीफी से वायुसेना को सीधा नुकसान हो रहा है। वायुसेना प्रमुख ने कहा, MiG-21 के रिटायरमेंट के बाद हमारे स्क्वाड्रन की संख्या काफी कम हो गई है। हमें हर साल 36 से 40 नए एयरक्राफ्ट शामिल करके इस कमी को पूरा करना होगा। हालांकि उन्होंने साफ किया कि हम संख्या में कम हैं, लेकिन कमजोर नहीं हैं।
इसी माह है रिटायरमेंट
31 अक्टूबर को रिटायर हो रहे ACM सिंह ने कहा, हम प्लान तो करते हैं, लेकिन चीजें समय पर नहीं होतीं। इस बार देरी बहुत ज्यादा लंबी हो गई है। मैं फिर कहूंगा कि टेक्नोलॉजी में देरी का मतलब है टेक्नोलॉजी का न मिलना। गौरतलब है कि भारतीय वायुसेना के पास आदर्श रूप से 42.5 फाइटर स्क्वाड्रन होने चाहिए, लेकिन यह संख्या अब घटकर 29 रह गई है। एयर चीफ ने कहा कि मौजूदा चुनौतीपूर्ण हालात को देखते हुए वायुसेना को 42 से भी ज्यादा स्क्वाड्रन की जरूरत है। भविष्य की योजना पर बात करते हुए वायुसेना प्रमुख ने बताया कि कमी को पूरा करने के लिए मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट (MRFA), LCA MK1A और प्रस्तावित LCA मार्क-2 को शामिल करने पर विचार किया जा रहा है।
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भारतीय वायुसेना को चाहिए AI-युक्त फोर्स, 5वीं पीढ़ी के जेट
एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह ने पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट प्रोग्राम को लेकर अहम जानकारी दी है। उन्होंने कहा, "हमारे पास 5वीं पीढ़ी का AMCA प्रोग्राम है, हम देख रहे हैं कि यह कैसे आगे बढ़ रहा है और इसे पूरा सपोर्ट दे रहे हैं। अगर इसमें देरी होती है तो हमें दूसरे विकल्पों पर विचार करना पड़ेगा।
114 राफेल डील और Su-57 ऑफर पर क्या बोले वायुसेना प्रमुख
फ्रांस के साथ 114 राफेल फाइटर जेट की प्रस्तावित डील पर IAF चीफ ने कहा कि मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट (MRFA) का कॉन्ट्रैक्ट इसी फाइनेंशियल ईयर में साइन होने की उम्मीद है। रूस द्वारा Su-57 फाइटर जेट के ऑफर पर उन्होंने कहा कि अभी तक इस पर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है।
पाकिस्तान के J-35A जेट्स पर चिंता
एयर चीफ मार्शल सिंह ने पाकिस्तान द्वारा चीन से 40 J-35A स्टील्थ फाइटर जेट खरीदने और पाकिस्तानी पायलटों की चीन में ट्रेनिंग की खबरों को चिंताजनक बताया। यह चीन के 5वीं पीढ़ी के कॉम्बैट एयरक्राफ्ट का पहला एक्सपोर्ट होगा। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के पास अलग-अलग प्लेटफॉर्म होने के बावजूद वह कुछ खास नहीं कर पाया, क्योंकि उनके सिस्टम का सही इंटीग्रेशन नहीं था। इससे साफ होता है कि अलग-अलग प्लेटफॉर्म का इंटीग्रेशन सबसे ज्यादा जरूरी है।
IAF को AI से मजबूत बनाना होगा
वायुसेना के आधुनिकीकरण पर जोर देते हुए IAF चीफ ने कहा कि फोर्स को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए मजबूत बनाना होगा। हमें AI-युक्त फोर्स की जरूरत है।
आत्मनिर्भरता पर बोले IAF चीफ
मेक-इन-इंडिया को लेकर 94वें एयर फोर्स डे से पहले उन्होंने कहा, आत्मनिर्भरता जरूरी है, लेकिन हम अपनी डिफेंस तैयारियों की कीमत पर आत्मनिर्भर नहीं बन सकते। यह रातों-रात नहीं आ सकता, इसके लिए पूरा इकोसिस्टम बनाना होगा। हम सही दिशा में बढ़ रहे हैं। लेकिन क्या रफ्तार सही है, यह कहने के लिए मैं सही व्यक्ति नहीं हूं।
थिएटर कमांड और ड्रोन फोर्स पर की टिप्पणी
थिएटर-बेस्ड कमांड सिस्टम पर IAF चीफ ने कहा, वायुसेना थिएटर कमांड के खिलाफ नहीं है, लेकिन ऑपरेशन सिंदूर के बाद एक नई स्थिति बनी है, इसलिए अंतिम फैसला लेने से पहले सभी पहलुओं पर विचार करना जरूरी है। वहीं अलग ड्रोन फोर्स बनाए जाने की संभावना को खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि बिना पायलट वाले सिस्टम और लोइटरिंग म्यूनिशन को वायुसेना के मौजूदा हथियारों और प्लेटफॉर्म के साथ ही इंटीग्रेट किया जाना चाहिए। ड्रोन को उन्होंने फोर्स के लिए एक विकासवादी क्षमता बताया और कहा कि इनकी संख्या और ऑपरेशनल इस्तेमाल लगातार बढ़ाया जा रहा है।
सैन्य ताकत के बिना कोई देश दबाव में आ सकता है
अमर प्रीत सिंह ने सैन्य ताकत के महत्व पर जोर देते हुए कहा, किसी भी देश के लिए मिलिट्री पावर सबसे अहम होती है। अगर पर्याप्त सैन्य ताकत नहीं होगी तो कोई भी देश दबाव में आ सकता है। हमें अपने तरीके से काम करना है और अपने लक्ष्यों को हासिल करना है तो मजबूत सेना का होना बेहद जरूरी है। IAF चीफ ने कहा कि हाल के संघर्षों में एयर पावर सबसे आगे रहा है और सबसे प्रभावी हथियार के तौर पर सामने आई है। उन्होंने कहा, यह एक ऐसा साधन है जिस पर हर देश अपने लक्ष्यों को पूरा करने के लिए निर्भर करता है। रक्षा सौदों और रणनीतिक बातचीत का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, चाहे दुनिया भर में हो रहे डिफेंस डील्स हों या स्ट्रैटेजिक बातचीत, चाहे एडवांस्ड फाइटर जेट हों, लॉन्ग-रेंज प्रिसिजन वेपन्स हों, इंटीग्रेटेड एयर कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम हो या अनमैन्ड एरियल सिस्टम, यह सब दिखाता है कि आज सैन्य ताकत का केंद्र एयरोस्पेस डोमेन बन गया है।