देशभर में साढ़े तीन हजार छात्रों ने छोड़ी IIT की पढ़ाई: पढ़ाई बीच में छोड़ रहे विद्यार्थियों ने बढ़ाई चिंता

इंदौर- देश के आईआईटी संस्थानों में पढ़ाई अधूरी छोड़ने वाले विद्यार्थियों को लेकर सामने आए आंकड़े चिंता बढ़ाने वाले हैं। वर्ष 2018 से 2023 के दौरान एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग के 3542 विद्यार्थियों ने आईआईटी की पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी। वहीं, मध्यप्रदेश के आईआईटी इंदौर में इसी तस्वीर के बीच छात्र संख्या बढ़ने का सकारात्मक पक्ष सामने आया है। नेशनल टास्क फोर्स (एनटीएफ) की अंतरिम रिपोर्ट के मुताबिक, आईआईटी इंदौर में वर्ष 2022-23 में 2333 विद्यार्थी पढ़ रहे थे। इसके बाद संख्या में लगातार इजाफा हुआ। अगस्त 2023-24 में यह आंकड़ा 2810, अगस्त 2024-25 में 3140 और अगस्त 2025-26 तक 3385 विद्यार्थियों तक पहुंच गया।
यानी 2022-23 के मुकाबले करीब चार साल में आईआईटी इंदौर के छात्र आधार में 1052 विद्यार्थियों की बढ़ोतरी हुई। प्रतिशत के हिसाब से यह वृद्धि करीब 45 फीसदी बैठती है। संस्थान के विस्तार के लिहाज से इसे अच्छा संकेत माना जा सकता है। हालांकि, सिर्फ विद्यार्थियों की संख्या बढ़ने के आधार पर यह कहना सही नहीं होगा कि यहां ड्रॉपआउट की समस्या नहीं है।
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पुराने रिकॉर्ड में 50 विद्यार्थियों ने छोड़ी पढ़ाई
आईआईटी इंदौर के पहले के संसदीय रिकॉर्ड में 50 ड्रॉपआउट का उल्लेख मिलता है। इनमें 6 एससी, 3 एसटी और 8 ओबीसी विद्यार्थी शामिल थे। हालांकि, इस रिकॉर्ड को एनटीएफ द्वारा लिए गए 2018-23 के राष्ट्रीय आंकड़ों से सीधे जोड़ना उचित नहीं होगा। दोनों का समय और संदर्भ अलग है।सरकारी स्तर पर पढ़ाई छोड़ने के पीछे कई वजहें बताई गई हैं। इनमें विद्यार्थी का किसी दूसरे संस्थान या विभाग में दाखिला लेना, व्यक्तिगत परिस्थितियां और अन्य कारण शामिल हैं। इसलिए हर ड्रॉपआउट के पीछे शैक्षणिक परेशानी को ही वजह मानना सही नहीं होगा।आईआईटी इंदौर के पीआरओ प्रो. सुनील कुमार के अनुसार, संस्थान में विद्यार्थियों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जो इसके विस्तार को दर्शाता है। संस्थान की कोशिश है कि विद्यार्थियों को आवश्यक सहयोग और बेहतर शैक्षणिक माहौल मिले, ताकि उन्हें पढ़ाई बीच में छोड़ने की जरूरत न पड़े।
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इंदौर IIT में ऐसे बढ़ता गया छात्र आधार
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2022-23: 2333 विद्यार्थी
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2023-24: 2810 विद्यार्थी
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2024-25: 3140 विद्यार्थी
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2025-26 (अगस्त तक): 3385 विद्यार्थी
चार वर्षों के अंतराल में छात्र संख्या में 1052 का इजाफा हुआ है। यानी संस्थान में विद्यार्थियों का आधार लगभग 45 फीसदी बढ़ा है।
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ड्रॉपआउट के आंकड़ों में ये वर्ग शामिल
पुराने रिकॉर्ड में अलग-अलग श्रेणियों से जुड़े आंकड़े इस प्रकार बताए गए हैं—
03 एसटी | 06 एससी | 08 ओबीसी | 17 एससी-एसटी-ओबीसी | 33 अन्य श्रेणियां
इन आंकड़ों का संदर्भ अलग रिकॉर्ड और वर्गीकरण से जुड़ा है, इसलिए इन्हें राष्ट्रीय 3542 के आंकड़े के साथ सीधे जोड़कर निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
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छात्र बढ़े हैं तो सहायता का दायरा भी बढ़ाना होगा
आईआईटी इंदौर में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ने के साथ उनके लिए सहायता तंत्र को भी मजबूत करना जरूरी है। अतिरिक्त अकादमिक सहायता, व्यक्तिगत काउंसलिंग, आर्थिक मदद और छात्रों की परेशानियों की समय रहते पहचान जैसी व्यवस्थाएं पढ़ाई बीच में छोड़ने की स्थिति को कम करने में मदद कर सकती हैं।एनटीएफ के सर्वे में सामने आया कि जवाब देने वाले 70 फीसदी से ज्यादा संस्थानों में पूर्णकालिक मानसिक स्वास्थ्य सेवा प्रदाता उपलब्ध नहीं था। वहीं, 4 फीसदी से कम संस्थानों ने आत्महत्या जोखिम से निपटने के लिए औपचारिक प्रोटोकॉल होने की जानकारी दी।इसलिए आईआईटी इंदौर के लिए बढ़ती छात्र संख्या एक उपलब्धि जरूर है, लेकिन अगला कदम यह सुनिश्चित करना होगा कि संस्थान में आने वाला विद्यार्थी पढ़ाई पूरी होने तक जुड़ा रहे और किसी परेशानी की स्थिति में उसे समय पर शैक्षणिक, आर्थिक या मानसिक स्वास्थ्य संबंधी सहायता मिल सके।




















