इंदौर में SBI-HDFC मैनेजर बनकर साइबर ठगी! KYC बंद होने का डर, QR कोड भेजा और खाता किया साफ

इंदौर में खजराना पुलिस और मुंबई क्राइम ब्रांच ने डिजिटल अरेस्ट व साइबर ठगी के नेटवर्क का खुलासा कर पंकज गुप्ता को गिरफ्तार किया। आरोपी खुद को SBI-HDFC बैंक मैनेजर बताकर KYC बंद होने का डर दिखाता था। 5 रुपए के QR कोड व फर्जी लिंक से लोगों के खाते खाली करने का आरोप है। आरोपी फर्जी स्पूफिंग ऐप बनाकर दूसरे साइबर ठगों को भी बेचता था।
इंदौर में SBI-HDFC मैनेजर बनकर साइबर ठगी! KYC बंद होने का डर, QR कोड भेजा और खाता किया साफ

इंदौर। बैंक खाते की KYC बंद होने का डर दिखाकर लोगों को ठगी के जाल में फंसाने वाले साइबर गिरोह का इंदौर में खुलासा हुआ है। खजराना थाना पुलिस और मुंबई क्राइम ब्रांच की संयुक्त टीम ने कार्रवाई करते हुए एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोपी खुद को SBI, HDFC और अन्य बड़े बैंकों का मैनेजर बताकर लोगों को फोन करता था और फिर फर्जी लिंक व QR कोड के जरिए उनके बैंक खातों तक पहुंच बनाने का आरोप है।  पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार आरोपी की पहचान पंकज गुप्ता पिता अवधेश गुप्ता के रूप में हुई है। वह मूल रूप से नागदा, उज्जैन का रहने वाला है और वर्तमान में इंदौर के स्कीम नंबर-134 में रह रहा था। मुंबई में दर्ज साइबर ठगी के एक मामले की जांच के दौरान आरोपी के इंदौर कनेक्शन का पता चला। इसके बाद मुंबई क्राइम ब्रांच ने खजराना पुलिस से संपर्क किया और संयुक्त टीम ने आरोपी के ठिकाने पर दबिश देकर उसे पकड़ लिया।

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बैंक मैनेजर बनकर करता था फोन

पूछताछ में पुलिस को साइबर ठगी के एक ऐसे तरीके की जानकारी मिली, जिसमें भरोसा जीतने के लिए आरोपी खुद को बैंक अधिकारी बताता था। वह ग्राहकों को फोन कर कहता था कि उनकी KYC सस्पेंड या बंद होने वाली है। बैंक खाता बंद होने के डर से लोग उसके बताए निर्देशों का पालन करने लगते थे।इसके बाद आरोपी वेरिफिकेशन के नाम पर पीड़ित को एक लिंक या QR कोड भेजता था। उससे महज 5 रुपए जमा कर बैलेंस चेक करने के लिए कहा जाता था। पुलिस के अनुसार, जैसे ही पीड़ित दिए गए लिंक या QR कोड के जरिए प्रक्रिया पूरी करता, आरोपी कथित तौर पर खाते से रकम निकालने की कोशिश करता था।

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सिर्फ ठगी नहीं, ऐप बनाने में भी माहिर

जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी तकनीकी जानकारी का इस्तेमाल कर फर्जी और स्पूफिंग ऐप तैयार करता था। पुलिस के अनुसार, इन ऐप्स को दूसरे साइबर अपराधियों को भी बेचा जाता था। यानी आरोपी खुद ठगी करने के साथ दूसरे ठगों को भी साइबर फ्रॉड के लिए तकनीकी साधन उपलब्ध कराता था।

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मोबाइल और बैंक खातों की जांच शुरू

गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने आरोपी के पास मिले मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच शुरू कर दी है। साथ ही उसके बैंक खातों और लेन-देन की जानकारी भी खंगाली जा रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस नेटवर्क से कितने लोग जुड़े हैं और अब तक कितने लोगों को निशाना बनाया गया।मुंबई में दर्ज साइबर ठगी के मामले में आरोपी के खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

Hemant Nagle
By Hemant Nagle

हेमंत नागले | पिछले बीस वर्षों से अधिक समय से सक्रिय पत्रकारिता में हैं। वर्ष 2004 में मास्टर ऑफ जर्...

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