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इंडोनेशिया के बाटम में AI डेटा सेंटर के खिलाफ लोगों का गुस्सा, 300 लोग खाली बोतलों के साथ परिसर में घुसे - 3 महीने से नहीं आ रहा नल में पानी

Indonesia Batam Water Crisis: नोंग्सा डिजिटल पार्क में प्रदर्शन, ग्रामीणों का आरोप - डेटा सेंटर को मिल रहा पानी, घरों में बूंद तक नहीं है। अधिकारियों ने पानी की कमी के लिए लंबे समय तक सूखे को जिम्मेदार ठहराया और इन आरोपों को खारिज कर दिया कि घरों के लिए तय पानी को डेटा सेंटरों की ओर मोड़ा जा रहा है।
इंडोनेशिया के बाटम में AI डेटा सेंटर के खिलाफ लोगों का गुस्सा, 300 लोग खाली बोतलों के साथ परिसर में घुसे - 3 महीने से नहीं आ रहा नल में पानी
इंडोनेशिया में डेटा सेंटर के खिलाफ प्रदर्शन।

जकार्ता। इंडोनेशिया के बाटम द्वीप के लगभग 300 निवासी खाली बोतलों और जेरी कैन के साथ एक डेटा सेंटर परिसर में घुस गए। वे पानी की कमी का विरोध कर रहे थे और उनका कहना है कि द्वीप पर AI इंफ्रास्ट्रक्चर के तेजी से बढ़ने के बीच पिछले तीन महीनों से उनके घरों में नल से पानी नहीं आ रहा है। BBC की एक रिपोर्ट के अनुसार, प्रदर्शनकारी नोंग्सा डिजिटल पार्क में जमा हुए और डेटा सेंटरों पर आरोप लगाया कि उन्हें पानी की सप्लाई मिल रही है, जबकि स्थानीय निवासियों को घर के लिए जरूरी पानी भी नहीं मिल पा रहा है।

अधिकारियों ने कहा-सूखा जिम्मेदार

अधिकारियों ने पानी की कमी के लिए लंबे समय तक सूखे को जिम्मेदार ठहराया और इन आरोपों को खारिज कर दिया कि घरों के लिए तय पानी को डेटा सेंटरों की ओर मोड़ा जा रहा है।  बाकाउ सेरिप गांव की निवासी डेवी सुसांती ने आरोप लगाया कि पिछले तीन महीनों से हमारे नलों में पानी की एक बूंद भी नहीं आई है, जब तक डेटा सेंटर नहीं आए थे, तब तक हमारी पानी की सप्लाई ठीक-ठाक थी। उन्होंने कहा कि निवासियों को टैंकर ट्रकों से आने वाले पानी पर निर्भर रहना पड़ रहा है, जिसे उन्होंने गंदा, मटमैला और बदबूदार बताया। इससे घर का खर्च बढ़ गया है और रोजमर्रा की जिंदगी में भी दिक्कतें आ रही हैं।

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नहीं बोले- डेटा सेंटर कर रहे पानी की कमी

बाटम की जल आपूर्ति एजेंसी ने BBC को बताया कि वे सप्लाई बेहतर करने के लिए काम कर रहे हैं, लेकिन उन्होंने इस बात पर कोई टिप्पणी नहीं की कि क्या डेटा सेंटरों की वजह से पानी की कमी हो रही है। व्यापार और उद्योग की देखरेख करने वाली एजेंसी BP बाटम ने पानी की कमी के लिए लंबे सूखे को जिम्मेदार ठहराया। उसने इन आरोपों को खारिज कर दिया कि घरों के लिए तय पानी को इन सुविधाओं की ओर मोड़ा जा रहा।

साफ पानी के स्रोतों पर दबाव बढ़ा

ये विरोध-प्रदर्शन ऐसे समय में हो रहे हैं जब बाटम के मीठे पानी के स्रोतों पर दबाव लगातार बढ़ रहा है। द्वीप के 13 लाख निवासी छह कृत्रिम जलाशयों में जमा बारिश के पानी पर निर्भर हैं। वहीं, एक स्थानीय पर्यावरण समूह के सिमुलेशन से पता चलता है कि  बाकाउ को पानी की आपूर्ति करने वाला नोंग्सा जलाशय बारिश न होने पर 1 महीने में सूख सकता है।

पानी के संकट से डेटा सेंटर की चिंताएं भी बढ़ीं

पानी के संकट ने डेटा सेंटर हब के रूप में बाटम के तेजी से हो रहे विस्तार को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। इस सेक्टर में निवेश 2026 के मध्य तक 6.7 बिलियन डॉलर से अधिक हो गया है। अधिकारियों ने द्वीप पर 10 डेटा सेंटरों को मंजूरी दी है। इनमें से छह नोंग्सा डिजिटल पार्क में हैं जबकि कम से कम छह और प्रोजेक्ट्स की समीक्षा की जा रही है।

अपने डिसेलिनेशन प्लांट्स बनाने को कहा था

अगस्त और सितंबर में हुए विरोध-प्रदर्शनों के बाद, बाटम के अधिकारियों ने डेटा सेंटर बनाने वाली कंपनियों को निर्देश दिया कि वे जलाशयों के मीठे पानी पर निर्भर रहने के बजाय अपने खुद के डिसेलिनेशन प्लांट बनाएं।

AI डेटा सेंटरों को बड़ी मात्रा में साफ पानी की जरूरत क्यों होती है

AI डेटा सेंटरों को शक्तिशाली सर्वर और GPU को ठंडा करने के लिए बड़ी मात्रा में साफ पानी की जरूरत होती है, क्योंकि डेटा प्रोसेस करते समय ये गर्मी पैदा करते हैं। कई सुविधाएं इवैपोरेटिव कूलिंग सिस्टम का इस्तेमाल करती हैं, जिसमें पानी गर्मी सोखता है और भाप बनकर उड़ जाता है, जिसके लिए लगातार ताजे पानी की आपूर्ति की जरूरत होती है।

रोज चाहिए 11 लाख लीटर से ज्यादा पानी

एक सामान्य डेटा सेंटर रोजाना लगभग लगभग 11.4 लाख लीटर पानी की खपत कर सकता है, जो लगभग 1,000 अमेरिकी घरों में रोजाना इस्तेमाल होने वाले पानी के बराबर है। हालांकि, खपत सुविधा के आकार, कूलिंग टेक्नोलॉजी और काम करने की स्थितियों के आधार पर अलग-अलग हो सकती है। सीधे कूलिंग के अलावा, डेटा सेंटरों का अप्रत्यक्ष वॉटर फुटप्रिंट भी होता है क्योंकि बिजली उत्पादन के लिए पानी की जरूरत पड़ सकती है।

Puneet Pandey
By Puneet Pandey

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