भारत की 70% कंपनियों की रणनीति में AI शामिल, लेकिन 67% कंपनियों में क्यों आई दिक्कत?

भारत में कंपनियां अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा रही हैं। कारोबार को बेहतर बनाने, काम की रफ्तार बढ़ाने और नए समाधान तैयार करने के लिए कंपनियां AI को अपनी बिजनेस रणनीति का हिस्सा बना रही हैं। हालांकि, इस तकनीक को बड़े स्तर पर अपनाने के रास्ते में सुरक्षा, नियमों का पालन और तकनीकी ढांचे से जुड़ी चुनौतियां भी सामने आ रही हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की करीब 70% कंपनियों ने AI को अपनी रणनीतिक प्राथमिकताओं में शामिल किया है। वहीं, 67% भारतीय कंपनियों का मानना है कि उनके मौजूदा डेटा सेंटर बड़े स्तर पर AI का काम संभालने के लिए तैयार नहीं हैं। रिपोर्ट बताती है कि AI को अपनाने के साथ कंपनियों को अपनी तकनीकी तैयारियों पर भी ध्यान देना होगा।
भारत में AI का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा
रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 26% कंपनियां AI या जनरेटिव AI से जुड़े समाधानों का इस्तेमाल वास्तविक कारोबारी कामकाज में कर रही हैं। एक साल पहले यह आंकड़ा 20% था। इससे पता चलता है कि कंपनियां अब AI को केवल प्रयोग तक सीमित रखने के बजाय अपने रोजमर्रा के काम में शामिल कर रही हैं। इस अध्ययन में भारत के 150 बिजनेस और आईटी से जुड़े निर्णय लेने वाले लोगों समेत 35 देशों के कुल 2,950 लोगों को शामिल किया गया। रिपोर्ट में कंपनियों की AI संबंधी तैयारियों, तकनीकी जरूरतों और इसे अपनाने में आने वाली समस्याओं का आकलन किया गया है। हालांकि, AI का इस्तेमाल बढ़ने के बावजूद कंपनियां नए प्रोजेक्ट शुरू करने से पहले उनके संभावित फायदे और जोखिमों का आकलन करना चाहती हैं। एशिया प्रशांत, जापान और चीन क्षेत्र के 72% प्रतिभागियों ने कहा कि स्पष्ट कारोबारी नतीजों और जोखिमों से निपटने की योजना के बिना वे नए AI प्रोजेक्ट शुरू नहीं करना चाहेंगे।
AI प्रोजेक्ट में सुरक्षा बनी बड़ी चुनौती
AI का इस्तेमाल बढ़ने के साथ डेटा की सुरक्षा और नियमों का पालन कंपनियों के लिए अहम मुद्दे बन गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की 61% कंपनियों ने बताया कि सुरक्षा और नियमों से जुड़ी चिंताओं के कारण उनके AI प्रोजेक्ट में देरी हुई या उन्हें कुछ समय के लिए रोकना पड़ा। कंपनियां अब AI को अपने जरूरी बिजनेस सिस्टम और डेटा से जोड़ रही हैं। ऐसे में डेटा की गोपनीयता बनाए रखना, सिस्टम को सुरक्षित रखना और लागू नियमों का पालन करना पहले से ज्यादा जरूरी हो गया है। AI सिस्टम में संवेदनशील जानकारी का इस्तेमाल होने के कारण कंपनियों को यह सुनिश्चित करना पड़ता है कि डेटा का उपयोग सही तरीके से हो और तकनीक से जुड़े जोखिमों को समय रहते संभाला जा सके। यही वजह है कि AI प्रोजेक्ट शुरू करने से पहले सुरक्षा की तैयारी पर जोर दिया जा रहा है।
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67% कंपनियों के डेटा सेंटर AI के लिए तैयार नहीं
AI को बड़े स्तर पर चलाने के लिए केवल सॉफ्टवेयर या नए टूल पर्याप्त नहीं हैं। इसके लिए मजबूत तकनीकी ढांचे की भी जरूरत होती है। इसमें कंप्यूटिंग क्षमता, डेटा स्टोरेज और तेज नेटवर्किंग जैसी सुविधाएं शामिल हैं। रिपोर्ट के अनुसार, भारत की 67% कंपनियों का मानना है कि उनके मौजूदा डेटा सेंटर बड़े स्तर पर AI का काम संभालने के लिए तैयार नहीं हैं। AI एप्लिकेशन का इस्तेमाल बढ़ने के साथ कंप्यूटर सिस्टम पर काम का दबाव भी बढ़ता है। ऐसे में कंपनियों को अपनी तकनीकी क्षमता बढ़ाने और मौजूदा सिस्टम को अपग्रेड करने की जरूरत पड़ रही है। यदि तकनीकी ढांचा जरूरत के मुताबिक मजबूत नहीं होगा, तो AI प्रोजेक्ट को बड़े स्तर पर लागू करने में परेशानी आ सकती है। इसलिए कंपनियों के लिए AI अपनाने के साथ अपने डेटा सेंटर और आईटी सिस्टम को बेहतर बनाना भी जरूरी है।
10 में से करीब 9 कंपनियां तलाश रहीं टेक्नोलॉजी पार्टनर
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की करीब 10 में से 9 कंपनियां AI और डिजिटल बदलाव के लिए ऐसे टेक्नोलॉजी पार्टनर चुन रही हैं, जो उन्हें एक साथ कई क्षेत्रों में मदद दे सकें। इनमें AI समाधान, तकनीकी ढांचा, डेटा प्रबंधन और सुरक्षा से जुड़ी सेवाएं शामिल हैं। रिपोर्ट के अनुसार, कंपनियां अब इन तकनीकों को अलग-अलग देखने के बजाय एक साथ आगे बढ़ा रही हैं। इसका उद्देश्य AI को कारोबार में बेहतर तरीके से लागू करना और उससे उपयोगी नतीजे हासिल करना है। कुल मिलाकर, रिपोर्ट बताती है कि भारत में AI को लेकर कंपनियों की दिलचस्पी तेजी से बढ़ रही है। लेकिन इसका पूरा फायदा उठाने के लिए केवल AI टूल अपनाना काफी नहीं होगा। कंपनियों को स्पष्ट कारोबारी लक्ष्य तय करने, डेटा सुरक्षित रखने, तकनीकी ढांचे को मजबूत बनाने और सही टेक्नोलॉजी पार्टनर चुनने पर भी ध्यान देना होगा।




















