नई दिल्ली। भारत-अमेरिका ट्रेड डील ने भारतीय राजनीति में हलचल मचा दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर लगाए गए टैरिफ को 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने के ऐलान के बाद जहां केंद्र सरकार इसे आर्थिक और कूटनीतिक जीत बता रही है। वहीं कांग्रेस ने इसे लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला है। विपक्ष का आरोप है कि, भारत से जुड़े बड़े फैसलों की जानकारी बार-बार अमेरिका से दी जा रही है, न कि भारत सरकार की ओर से। इस पूरे घटनाक्रम ने विदेश नीति, ऊर्जा सुरक्षा और भारत की कूटनीतिक भूमिका को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
इस ट्रेड डील के बाद देश की राजनीति गरमा गई। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के सामने दबाव में दिखाई देते हैं और आखिरकार उन्होंने हार मान ली है। जयराम रमेश ने तंज कसते हुए लिखा कि, यह कोई ‘फादर ऑफ ऑल डील्स’ नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि, प्रधानमंत्री अब ट्रंप के साथ सार्वजनिक रूप से सहज नजर नहीं आते, जबकि पहले दोनों नेताओं के बीच गर्मजोशी दिखाई देती थी।
कांग्रेस नेता ने इस बात पर भी सवाल उठाया कि, भारत से जुड़े अहम फैसलों की जानकारी बार-बार अमेरिकी राष्ट्रपति या उनके अधिकारियों के जरिए क्यों दी जा रही है। उन्होंने कहा कि, मोदी-ट्रंप फोन कॉल की जानकारी भी पहले भारत में अमेरिकी राजदूत की पोस्ट से सामने आई, न कि भारत सरकार की ओर से। जयराम रमेश ने इसे ‘ट्रंप-निर्भरता’ करार देते हुए कहा कि, यह अब एक तरह की परंपरा बनती जा रही है।
कांग्रेस नेता ने 1987 की फिल्म मिस्टर इंडिया के मशहूर डायलॉग का जिक्र करते हुए कहा कि, वॉशिंगटन में तो साफ है कि मोगैम्बो खुश है। उन्होंने याद दिलाया कि इससे पहले ऑपरेशन सिंदूर, तेल खरीद और अब ट्रेड डील तीनों की घोषणाएं वॉशिंगटन से की गईं।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘Truth Social’ पर यह घोषणा की है कि, भारत और अमेरिका के बीच एक अहम व्यापार समझौता तय हो गया है। इसके तहत अमेरिका ने भारत से आने वाले उत्पादों पर लगाया गया रेसिप्रोकल टैरिफ 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया है।
दरअसल, अगस्त 2025 में रूस से कच्चा तेल खरीदने के कारण भारत पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त पेनल्टी लगाई गई थी। इस तरह भारत पर कुल टैरिफ 50 प्रतिशत तक पहुंच गया था। अब व्हाइट हाउस के अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि, रूस से तेल खरीद को लेकर लगाया गया अतिरिक्त टैरिफ पूरी तरह हटा लिया गया है।
सोमवार सुबह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच फोन पर बातचीत हुई। इस बातचीत के बाद रात करीब 10:30 बजे ट्रंप ने ट्रेड डील की घोषणा की। ट्रंप के मुताबिक, बातचीत में रूस-यूक्रेन युद्ध, ऊर्जा सहयोग और भारत-अमेरिका व्यापार जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा हुई।
ट्रंप ने दावा किया कि, प्रधानमंत्री मोदी रूस से तेल खरीद बंद करने और अमेरिका से ज्यादा तेल खरीदने पर सहमत हो गए हैं। जरूरत पड़ने पर वेनेजुएला से तेल आयात की संभावना पर भी बातचीत हुई।
ट्रंप के बयान के अनुसार, भारत अब रूस के बजाय अमेरिका से ज्यादा कच्चा तेल खरीदेगा। इसके अलावा वेनेजुएला से तेल खरीदने के विकल्प पर भी सहमति बनी है। अमेरिकी राष्ट्रपति का कहना है कि इससे रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म करने में मदद मिलेगी और वैश्विक शांति को बल मिलेगा।
भारत अपनी जरूरत का करीब 96 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में ऊर्जा आपूर्ति के स्रोतों में विविधता लाना भारत की रणनीतिक जरूरत माना जा रहा है।
ट्रेड डील के तहत भारत ने ‘Buy American’ नीति के अंतर्गत अमेरिका से 500 अरब डॉलर (करीब 46 लाख करोड़ रुपए) से अधिक का सामान खरीदने की प्रतिबद्धता जताई है। इसमें ऊर्जा, तकनीक, कृषि उत्पाद, कोयला और औद्योगिक वस्तुएं शामिल होंगी। ट्रंप ने इसे अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा बूस्ट बताया और कहा कि इससे दोनों देशों के रिश्ते और मजबूत होंगे।
ट्रंप के ऐलान के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने X पर लिखा कि राष्ट्रपति ट्रंप से बात करके उन्हें बेहद खुशी हुई। उन्होंने कहा कि ‘मेड इन इंडिया’ उत्पादों पर टैरिफ घटाकर 18 प्रतिशत करने का फैसला भारत के 1.4 अरब लोगों के लिए राहत भरा है। पीएम मोदी ने इस फैसले के लिए ट्रंप का धन्यवाद भी किया।
2 अप्रैल 2025: 10% बेसलाइन टैरिफ
5 अप्रैल 2025: 26% टैरिफ का ऐलान
9 अप्रैल 2025: 90 दिनों की राहत
31 जुलाई 2025: 25% रेसिप्रोकल टैरिफ
6 अगस्त 2025: 25% अतिरिक्त पेनल्टी
27 अगस्त 2025: कुल टैरिफ 50%
2 फरवरी 2026: टैरिफ घटकर 18%
भारत अब उन देशों में शामिल हो गया है, जिन पर अमेरिका अपेक्षाकृत कम टैरिफ लगाता है। चीन पर 34%, बांग्लादेश पर 20%, पाकिस्तान पर 19% और भारत पर 18% टैरिफ लागू है।
विशेषज्ञों का मानना है कि, टैरिफ घटने से भारतीय गारमेंट, जेम्स-ज्वेलरी, कारपेट, झींगा और होम टेक्सटाइल सेक्टर को बड़ा फायदा मिलेगा। इससे अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पाद ज्यादा प्रतिस्पर्धी बनेंगे।
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