Peoples Update Special :लॉटरी की गोटियों से तय होते हैं विधानसभा के तारांकित सवाल, विधायक स्वयं 25 सिक्के उठाकर चुनते हैं चर्चा के प्रश्न

राजीव सोनी, भोपाल। विधानसभा में मंत्री से सीधे चर्चा के लिए रखे जाने वाले सवालों के चयन की अनूठी परंपरा दशकों से चली आ रही है। सवालों का चयन लॉटरी की गोटियां करती हैं। सत्र के दौरान हर दिन 230 सदस्यों में से औसतन सौ-सवा सौ विधायकों के प्रश्न लगते हैं। प्रश्नों के लिखित जवाब संबंधित विभागीय मंत्री देते हैं लेकिन चर्चा के लिए हर दिन 25 सवालों का चयन विधानसभा सचिवालय लॉटरी सिस्टम से करता है। डिब्बे में अलग-अलग नंबर के ये सिक्के विधायक ही निकालते हैं।
पुरानी परंपरा लोकसभा कई राज्यों में
विधानसभा सत्र में प्रश्नोत्तर काल के सवालों के चयन की यह पुरानी परंपरा लोकसभा सहित कई राज्यों में लागू है। इस व्यवस्था में कई बार ऐसा भी होता है कि जो विधायक सिक्के उठाता है उसका स्वयं का ही सवाल नहीं निकलता। हर दिन 25 तारांकित रहते हैं उनके जवाब स्वयं मंत्री देते हैं। प्रश्न पूछने वाले विधायक सीधे मंत्री से रूबरू होते हैं और उन्हें प्रतिप्रश्न करने का मौका भी मिल जाता है। इसलिए सभी विधायक चाहते हैं कि उनके सवालों पर चर्चा हो।
विभाग भेजता है जवाब
सचिवालय के सूत्रों का कहना है कि सत्र में जिस दिन के लिए सवाल लिस्ट होता है उसके 10-12 दिन पहले लॉटरी से सवालों का चयन करते हैं। हर दिन के लिए करीब सौ-सवा सौ सवाल रहते हैं। इन सभी सवालों के लिखित जवाब संबंधित विभाग भेजते हैं। विधायकों को उनके सवालों का लिखित जवाब मिल जाता है।
स्थानीय विधायक को करते हैं फोन
प्रमुख सचिव की मौजूदगी में पक्ष-विपक्ष के विधायकों से डिब्बे की गोटियां उठवा लेते हैं। कभी-कभार ऐसा भी होता है कि प्रश्न चयन और लॉटरी निकलवाने के लिए उस वक्त यदि परिसर में कोई विधायक मौजूद नहीं है तो स्थानीय विधायक को बुलाकर प्रक्रिया पूरी करते हैं।
मेरे सवाल की लॉटरी नहीं निकली
मैंने भी सवाल चुनने की इस प्रक्रिया में कई बार हिस्सा लिया। लेकिन मेरे हाथ से मेरे सवाल की पर्ची कभी नहीं निकली जबकि मेरे प्रश्नों पर सदन में कई बार चर्चा हुई है।
आशीष शर्मा, विधायक खातेगांव
जरूरी नहीं कि अपनी गोटी निकले
विधानसभा में चर्चा के लिए प्रश्नों के चयन की यह प्रामाणिक और पारदर्शी व्यवस्था है। मैंने 15 साल तक अनगिनत बार डिब्बे से गोटियां निकालीं। संयोगवश मेरा सवाल एक बार ही निकला। प्रमुख सचिव एवं विधायक की मौजूदगी में यह प्रक्रिया संपन्न होती है।
यशपाल सिंह सिसोदिया, पूर्व विधायक
ये भी पढ़ें: फोटोग्राफी का ऐसा जुनून ! कैमरे जैसा बनवाया घर, बेटों के नाम रखे Canon, Nikon और Epson
लोकसभा व कई राज्यों में लागू है यह व्यवस्था
तारांकित प्रश्नों के चयन के लिए लोक सभा से लेकर कई राज्यों की विधान सभा में भी यही व्यवस्था है। लॉटरी सिस्टम की यह पारदर्शी व्यवस्था परंपरा से चली आ रही है।
अरविंद शर्मा, प्रमुख सचिव मप्र विधानसभा












