पचमढ़ी के सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में वन्यप्राणी संरक्षण सप्ताह, ‘सतपुड़ा शहद’ इकाई शुरू; जंगलों में संयुक्त गश्ती

पचमढ़ी। वन्यप्राणी संरक्षण सप्ताह-2026 के तहत सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में वन्यजीव संरक्षण, जनभागीदारी और स्थानीय लोगों की आजीविका बढ़ाने से जुड़ी कई गतिविधियां आयोजित की गईं। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री के संदेश का वाचन किया गया। इसके बाद अधिकारियों और कर्मचारियों ने वन एवं वन्यप्राणी संरक्षण की शपथ ली।
‘सतपुड़ा शहद’ प्रसंस्करण इकाई शुरू
वन परिक्षेत्र देनवा बफर के आलमोद में ‘सतपुड़ा शहद’ प्रसंस्करण इकाई का शुभारंभ किया गया। यह इकाई सतपुड़ा शहद आजीविका मिशन, आलमोद द्वारा संचालित की जाएगी। इस अवसर पर सहायक संचालक पचमढ़ी संजीव शर्मा और सहायक संचालक पिपरिया आशीष खोबरागड़े मौजूद रहे। इस इकाई का मुख्य उद्देश्य स्थानीय महिला स्वसहायता समूहों को आर्थिक रूप से मजबूत करना है। यहां स्थानीय स्तर पर शहद का प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन किया जाएगा। इससे स्थानीय लोगों को रोजगार और आजीविका के नए अवसर मिलने की उम्मीद है। इसके साथ ही स्थानीय स्तर पर तैयार होने वाले उत्पादों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने में भी मदद मिलेगी।
सीमावर्ती जंगलों में संयुक्त गश्ती
वन्यप्राणी संरक्षण सप्ताह के दौरान सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के देनवा बफर और पश्चिम छिंदवाड़ा वनमंडल के सांगाखेड़ा वन क्षेत्र के अधिकारियों और कर्मचारियों की संयुक्त बैठक भी हुई। बैठक में सीमावर्ती जंगलों की सुरक्षा, वन्यप्राणियों की निगरानी और सूचनाओं के तेजी से आदान-प्रदान को लेकर चर्चा की गई। संवेदनशील क्षेत्रों में दोनों विभागों के बीच बेहतर समन्वय के साथ संरक्षण गतिविधियां चलाने पर भी जोर दिया गया।
संभावित शिकार वाले इलाकों की पहचान
बैठक के बाद दोनों वन क्षेत्रों के कर्मचारियों ने सीमावर्ती इलाके में संयुक्त पैदल गश्ती की। इस दौरान वरिष्ठ अधिकारियों ने संभावित अवैध शिकार वाले क्षेत्रों और उन स्थानों की पहचान की, जहां शिकारी फंदे लगा सकते हैं। मैदानी कर्मचारियों को संवेदनशील क्षेत्रों में ज्यादा सतर्क रहने और लगातार निगरानी करने के निर्देश दिए गए।
सीमावर्ती इलाकों में निगरानी होगी मजबूत
वन विभाग के अनुसार, संयुक्त गश्ती और बेहतर समन्वय से सतपुड़ा टाइगर रिजर्व और पश्चिम छिंदवाड़ा वनमंडल के सीमावर्ती क्षेत्रों में निगरानी व्यवस्था मजबूत होगी। साथ ही वन्यप्राणियों की सुरक्षा के लिए सूचना तंत्र को बेहतर बनाने और संयुक्त संरक्षण गतिविधियों को आगे भी जारी रखने पर जोर दिया गया।




















