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IRS दंपति ने बगैर अनुमति बनाया होम स्टे...पन्ना टाइगर रिजर्व में छह कॉटेज और कई निर्माण, जांच रिपोर्ट में बड़ा खुलासा 

पन्ना टाइगर रिजर्व के इको सेंसेटिव जोन में अवैध निर्माण की जांच करने वाली समिति ने अपनी रिपोर्ट में निर्माण को 'होमस्टे' बताया है। रिपोर्ट में वन विभाग की अनुमति के बिना जमीन खरीद और निर्माण, वन कानूनों के संभावित उल्लंघन तथा कई स्थायी संरचनाओं के निर्माण का उल्लेख किया गया है। मामले में वाइल्डलाइफ एक्टिविस्ट ने भी कार्रवाई की मांग उठाई है।
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पन्ना टाइगर रिजर्व में छह कॉटेज और कई निर्माण, जांच रिपोर्ट में बड़ा खुलासा 
फाइल फोटो

भोपाल/नई दिल्ली। पन्ना टाइगर रिजर्व के पारिस्थितिकी रूप से संवेदनशील क्षेत्र में भारतीय राजस्व सेवा (IRS) अधिकारी और उनकी पत्नी द्वारा कथित रूप से किए गए अवैध निर्माण की जांच के लिए गठित तीन सदस्यीय समिति ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। पीटीआई ने बतया कि रिपोर्ट में उल्लेख है कि संबंधित इमारत का उपयोग 'होमस्टे' के रूप में किया जा रहा था। यह समिति सितंबर 2025 में अवैध निर्माण के आरोप सामने आने के बाद केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय द्वारा गठित की गई थी।

4.9 एकड़ जमीन की खरीद पर उठे सवाल 

समिति की रिपोर्ट के अनुसार, जिस 4.9 एकड़ जमीन पर निर्माण किया गया, उसे वर्ष 2018 से 2022 के बीच मध्यप्रदेश वन विभाग की सहमति या जानकारी के बिना खरीदा गया। राजस्व रिकॉर्ड में यह जमीन वरिष्ठ आईआरएस अधिकारी बी. श्रीनिवास कुमार और उनकी पत्नी हिमानी सारद के नाम दर्ज है। हिमानी सारद वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट में केंद्रीय जन सूचना अधिकारी हैं।

वन कानूनों के उल्लंघन की आशंका 

समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि भूमि आवंटन करने वाले प्राधिकरण ने वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 और भारतीय वन अधिनियम के प्रावधानों के विपरीत कार्य किया प्रतीत होता है। रिपोर्ट में इस मामले की विस्तृत जांच और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की समीक्षा की आवश्यकता भी जताई गई है।

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वन क्षेत्र के भीतर बताई गई निर्माण स्थल की स्थिति 

रिपोर्ट के अनुसार, संबंधित जमीन छतरपुर जिले के राजगढ़ गांव में स्थित खसरा नंबर 1841 का हिस्सा है। यह कुल 42.5 एकड़ क्षेत्र में फैली है, जिसमें से 35.8 एकड़ वन भूमि और 6.7 एकड़ राजस्व भूमि है। समिति ने पाया कि मौके पर वन और राजस्व भूमि की स्पष्ट सीमाएं निर्धारित नहीं थीं क्योंकि सीमा स्तंभ मौजूद नहीं थे।

पन्ना नेशनल पार्क और टाइगर रिजर्व का हिस्सा है क्षेत्र 

समिति ने बताया कि वर्ष 1982 में संबंधित वन क्षेत्र को पन्ना नेशनल पार्क में शामिल किया गया था। बाद में वर्ष 2007 में इसे पन्ना बाघ अभयारण्य के कोर क्षेत्र का हिस्सा बनाया गया और वर्ष 2024 में इसे पारिस्थितिकी रूप से संवेदनशील क्षेत्र (Eco-Sensitive Zone) घोषित किया गया। ऐसे क्षेत्र में निर्माण गतिविधियों पर विशेष नियम लागू होते हैं।

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जांच में मिली कई स्थायी संरचनाएं 

स्थलीय निरीक्षण के दौरान समिति ने पाया कि निर्माण स्थल पर छह बड़े कॉटेज, स्विमिंग पूल, रसोई एवं भोजन कक्ष, पूलसाइड डाइनिंग एरिया, पावर रूम, जिम, जल शुद्धिकरण संयंत्र, दो सफारी वाहन, ट्रैक्टर, नाव, पार्किंग शेड और कर्मचारियों के लिए दो मंजिला भवन मौजूद था। इसके अलावा क्षमता से अधिक की एक आरा मशीन भी मिली, जिसे वन विभाग ने जब्त कर लिया।

ग्राम सभा की अनुमति, लेकिन वन विभाग से नहीं ली मंजूरी 

रिपोर्ट में कहा गया कि भूमि मालिकों ने निर्माण के लिए ग्राम सभा की अनुमति तो प्राप्त की थी, लेकिन वन विभाग से आवश्यक मंजूरी नहीं ली गई। समिति ने इसे नियमों के उल्लंघन का मामला माना और संबंधित प्रावधानों के पालन पर सवाल उठाए।

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वाइल्डलाइफ एक्टिविस्ट ने प्रबंधन पर उठाए सवाल 

वाइल्डलाइफ एक्टिविस्ट अजय दुबे ने कहा कि पन्ना टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र में अवैध निर्माण और आरा मिल संचालन के मामले दर्ज होने के बावजूद संबंधित संरचनाओं को हटाने की कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने इसे अभयारण्य प्रबंधन की गंभीर लापरवाही बताया। वहीं, इस मामले में भेजे गए सवालों पर मध्यप्रदेश वन विभाग और पन्ना बाघ अभयारण्य प्रबंधन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं मिली।

Naresh Bhagoria
By Naresh Bhagoria

नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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