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बच्चा रात में अचानक चीखकर उठे तो घबराएं नहीं! समझें नाइट टेरर के संकेत और ऐसे करें मदद

कई छोटे बच्चे रात में अचानक चिल्लाने, उठकर बैठने या डरे हुए दिखने लगते हैं। हर बार इसे बुरा सपना समझना सही नहीं है। एक्सपर्ट के मुताबिक यह नाइट टेरर हो सकता है, जो बच्चों की नींद के खास चरण में होता है। सही नींद, तय रूटीन और शांत माहौल से ऐसे एपिसोड को कम करने में मदद मिल सकती है।
बच्चा रात में अचानक चीखकर उठे तो घबराएं नहीं! समझें नाइट टेरर के संकेत और ऐसे करें मदद
नींद में बच्चे के डरने पर रहें शांत

बच्चों का रात में अचानक रोना या चीखना माता-पिता के लिए चिंता की बात बन सकता है। कई बार बच्चा आंखें खोलकर बैठ जाता है, लेकिन पूरी तरह जागा हुआ नहीं होता। पीडियाट्रिशियन डॉ. संतोष यादव के मुताबिक, अगर ऐसा सोने के शुरुआती कुछ घंटों में होता है, तो यह नाइट टेरर हो सकता है। यह बच्चों में नींद के NREM चरण से जुड़ी स्थिति है। आमतौर पर छोटे बच्चों में यह ज्यादा दिखाई देती है और उम्र बढ़ने के साथ कम हो सकती है। हालांकि बार-बार होने पर बच्चे की नींद और रोजमर्रा की दिनचर्या पर ध्यान देना जरूरी है।

अचानक डरकर उठना हमेशा सपना नहीं

अगर बच्चा सोने के कुछ घंटे बाद अचानक चीखने लगे, उठकर बैठ जाए या काफी परेशान नजर आए, तो जरूरी नहीं कि उसने कोई डरावना सपना देखा हो। नाइट टेरर में बच्चा पूरी तरह जागता नहीं है। कई बार वह माता-पिता को पहचान भी नहीं पाता और कुछ समय बाद खुद शांत होकर वापस सो जाता है।

किस उम्र में ज्यादा होता है नाइट टेरर?

बच्चों में नाइट टेरर खास तौर पर करीब 2.5 से 8 साल की उम्र के बीच देखा जा सकता है। जैसे-जैसे बच्चे की उम्र बढ़ती है, कई मामलों में यह समस्या अपने आप कम हो जाती है। इसलिए एक-दो बार ऐसा होने पर माता-पिता को तुरंत घबराने की जरूरत नहीं है।

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नींद पूरी नहीं होगी तो बढ़ सकती है परेशानी

बच्चे का बहुत ज्यादा थका होना नाइट टेरर का एक कारण हो सकता है। अगर बच्चा रोज अलग समय पर सोता है, देर तक जागता है या उसकी नींद पूरी नहीं होती, तो समस्या बढ़ सकती है। इसलिए बच्चे के लिए सोने और जागने का एक तय समय रखना फायदेमंद हो सकता है।

दिनभर की ज्यादा एक्टिविटी भी वजह

कभी-कभी दिनभर बहुत ज्यादा गतिविधियों के कारण बच्चा जरूरत से ज्यादा उत्तेजित हो जाता है। लगातार खेलना, स्क्रीन देखना या सोने से पहले बहुत ज्यादा एक्टिव रहना भी बच्चे को शांत होने में मुश्किल दे सकता है। इसके अलावा बीमारी या तबीयत खराब होने के दौरान भी नींद में ऐसे एपिसोड देखने को मिल सकते हैं।

बच्चा चीखे तो तुरंत जगाएं नहीं

रात में बच्चा अचानक चिल्लाने लगे तो सबसे पहले माता-पिता खुद शांत रहें। उसे जोर से जगाने या बार-बार सवाल पूछने की कोशिश न करें। इससे बच्चा और परेशान हो सकता है। बेहतर है कि उसके पास रहें, सुरक्षा का ध्यान रखें और जरूरत हो तो हल्के हाथ से सहलाकर शांत करने की कोशिश करें।

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सोने का माहौल रखें शांत

बच्चे की नींद बेहतर रखने के लिए रोज लगभग एक ही समय पर सुलाने की कोशिश करें। सोने से पहले माहौल शांत रखें और बच्चे को पर्याप्त आराम दें। अगर एपिसोड बार-बार हो रहे हैं, बहुत लंबे समय तक बने रहते हैं या बच्चे की रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही है, तो बाल रोग विशेषज्ञ से सलाह लेना सही रहेगा।

Aditi Rawat
By Aditi Rawat

अदिति रावत | MCU, भोपाल से M.Sc.(न्यू मीडिया टेक्नॉलजी)| एंकर, न्यूज़ एक्ज़िक्यूटिव की जिम्मेदारियों...Read More

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