हमास की तरह हूतियों ने बनाई 20 KM लंबी खुली सुरंगें, बाब-अल-मंदेब पर बढ़ा खतरा

यमन के हूती विद्रोहियों ने बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य के पास अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए बड़ी किलेबंदी शुरू की है। सैटेलाइट तस्वीरों के विश्लेषण में इस इलाके में करीब 20 किलोमीटर लंबी खाइयां और मिट्टी से बनाई गई रक्षात्मक दीवारें नजर आई हैं। ये निर्माण दुबाब और पेरिम द्वीप के आसपास के ऊंचे इलाकों में दिखाई दिए हैं। इस इलाके की रणनीतिक स्थिति को देखते हुए इसे अहम घटनाक्रम माना जा रहा है।
पहले समझिए बाब-अल-मंदेब इतना जरूरी क्यों है
बाब-अल-मंदेब एक संकरा समुद्री रास्ता है, जो लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है। एशिया और यूरोप के बीच आने-जाने वाले कई जहाज इसी रास्ते का इस्तेमाल करते हैं। इसलिए यहां अगर तनाव बढ़ता है तो इसका असर सिर्फ यमन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि जहाजों की आवाजाही और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी पड़ सकता है। यही वजह है कि बाब-अल-मंदेब के आसपास हूतियों की बढ़ती गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है।
20 किलोमीटर लंबी खाइयां कहां बनी हैं?
सैटेलाइट तस्वीरों में 8 से 16 सितंबर के बीच इस इलाके में कई बदलाव दिखाई दिए हैं। इनमें पहाड़ी और ऊंचे इलाकों में बनाई गई लंबी खाइयां और मिट्टी की किलेबंदी शामिल हैं। इन सभी निर्माणों की कुल लंबाई करीब 20 किलोमीटर बताई जा रही है। ऊंचे इलाकों में होने के कारण यहां से आसपास के क्षेत्र पर नजर रखना आसान हो सकता है। पेरिम द्वीप भी इस पूरे इलाके में खास महत्व रखता है। यह बाब-अल-मंदेब के समुद्री रास्ते के बेहद करीब है।
हूतियों ने ये खाइयां क्यों बनाईं?
इन किलेबंदियों के पीछे दो संभावित वजहें बताई जा रही हैं। पहली, हूती सऊदी समर्थित यमनी सरकारी बलों के खिलाफ अपनी रक्षा मजबूत करना चाहते हैं। दूसरी, वे बाब-अल-मंदेब के आसपास होने वाली गतिविधियों पर नजर रखने के लिए अपनी स्थिति मजबूत कर सकते हैं। हालांकि, इन निर्माणों का इस्तेमाल किस तरह किया जाएगा, यह अभी पूरी तरह साफ नहीं है।
पेरिम द्वीप तक पहुंचने का दावा
हूतियों की इस गतिविधि के बीच उनकी पेरिम द्वीप और यमन के तटीय शहर दुबाब की ओर बढ़ने की रिपोर्ट भी सामने आई है। यमनी सरकार से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, 11 सितंबर को हूती लड़ाके पेरिम द्वीप तक पहुंचे थे। अगर इस इलाके में हूतियों की मौजूदगी और मजबूत होती है, तो बाब-अल-मंदेब के आसपास उनकी रणनीतिक स्थिति बदल सकती है।
समुद्री रास्ते पर क्यों बढ़ सकती है चिंता?
बाब-अल-मंदेब पहले से ही तनाव वाला इलाका रहा है। हूती हमलों के कारण कई अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियां पहले भी इस समुद्री रास्ते से बचते हुए लंबा रास्ता अपनाती रही हैं। अगर इलाके में सैन्य गतिविधियां और बढ़ती हैं, तो जहाजों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ सकती है। इसका असर माल ढुलाई, शिपिंग इंश्योरेंस और सामान की डिलीवरी के समय पर भी पड़ सकता है।
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अभी तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं
सैटेलाइट तस्वीरों में 20 किलोमीटर लंबी खाइयां और किलेबंदी दिखाई देने की बात सामने आई है, लेकिन इनका वास्तविक सैन्य इस्तेमाल किस स्तर पर होगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है। फिलहाल इतना जरूर कहा जा सकता है कि हूती बाब-अल-मंदेब के आसपास अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। यह इलाका दुनिया के अहम समुद्री रास्तों में शामिल है, इसलिए यहां होने वाली किसी भी बड़ी सैन्य गतिविधि पर क्षेत्रीय देशों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नजर रहती है।




















